ओमराजे निंबालकर कौन हैं? जिनके फैसले पर टिकी है उद्धव-शिंदे की सियासी जंग, क्या दिग्गज कांग्रेसी नेता का बेटा
Who is Omraje Nimbalkar: महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों में शह और मात का खेल चल रहा है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के बीच धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। क्योंकि उनका फैसला शिवसेना के दोनों गुटों के बीच चल रहे इस शक्ति प्रदर्शन के खेल का रुख बदल सकता है।
ओमराजे निंबालकर के फैसले पर क्यों टिकी है पूरी बाजी?
बता दें उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 7 सांसदों के बगावत कर एकनाथ शिंदे खेमे के संपर्क में हैं। इन चर्चाओं के बीच धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर का फैसला इसिलए अहम माना जा रहा है क्योंकि दलबदल विरोधी कानून के तहत एकनाथ शिंदे गुट को दो-तिहाई समर्थन का आंकड़ा पूरा करने के लिए सात सांसदों की जरूरत है। ऐसे में सबकी नजर ओमराजे के अगले कदम पर टिकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वह भी शिंदे गुट में शामिल होंगे? जानिए कौन हैं ओमराजे निंबालकर?

कौन हैं ओमराजे निंबालकर?
ओमराजे का संबंध मराठवाड़ा के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से है। उनका जन्म 17 जुलाई 1983 को धाराशिव जिले में हुआ था। ओमराजे निंबालकर धाराशिव लोकसभा सीट से सांसद हैं और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख चेहरों में शामिल ओमराजे ने 2019 में पहली बार सांसद बने थे। इसके बाद 2024 के आम चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखते हुए लगातार दूसरी जीत दर्ज की।
आदित्य ठाकरे के भरोसेमंद नेताओं में शुमार हैं ओमराजे
2022 में शिवसेना के विभाजन के दौरान भी उन्होंने उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ा और एकनाथ शिंदे गुट में जाने के बजाय शिवसेना (यूबीटी) के साथ बने रहे, जिससे वे उद्धव और आदित्य ठाकरे के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए।
ओमराजे के कांग्रेसी पिता की कर दी गई थी हत्या
ओमराजे के पिता पवनराजे निंबालकर क्षेत्र के चर्चित नेता थे, जिनकी 2006 में हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किया बल्कि ओमराजे के राजनीतिक सफर की भी नींव रखी। वरिष्ठ नेता पद्मसिंह पाटिल उनके चाचा हैं, जबकि रणजगजीतसिंह पाटिल उनके चचेरे भाई हैं। पिता की हत्या के बाद ओमराजे निंबालकर ने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और 2009 में उस्मानाबाद विधानसभा सीट जीतकर विधायक बने।
पवनराजे निंबालकर हत्याकांड के आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी
बता दें उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों की बगावत के ठीक पहले ओमराजे के पिता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया और दोनों शिवसेना गुटों ने अपनी-अपनी रणनीतियां सक्रिय कर दीं। इस फैसले के बाद दावा किया जाने लगा कि ओमराजे पर दबाव बनाया जा रहा है।
शिंदे गुट का बड़ा दांव, सीबीआई करेगी अपील
अदालती फैसले के तुरंत बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने बड़ा राजनीतिक दांव चला। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से घोषणा की गई कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) विशेष अदालत के फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ विस्तृत चर्चा भी की है। इस कदम को राजनीतिक हलकों में विशेष महत्व के साथ देखा जा रहा है।
ओमराजे की चुप्पी से बढ़ा सस्पेंस
इन अटकलों के बीच सांसद ओमराजे निंबालकर की रहस्यमयी चुप्पी ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी। बताया जाता है कि वह लगातार तीन दिनों तक किसी के संपर्क में नहीं रहे सूत्रों के मुताबिक उद्धव ठाकरे गुट ओमराजे को अपने साथ बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। पार्टी नेताओं ने उनसे मुलाकात भी की है। वहीं, दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक में गैरहाजिर रहने के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है
संजय राउत ने लगाए थे दबाव बनाने के आरोप
अदालती फैसले से ठीक पहले शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भाजपा और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि लंबित न्यायिक मामलों का उपयोग विपक्षी सांसदों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। राउत ने संकेत दिया था कि ओमराजे निंबालकर पर भी इस मामले के जरिए राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है।
वफादारी का दावा, लेकिन अगला कदम अभी साफ नहीं
फैसले के बाद पुणे स्थित अपने निवास पहुंचे ओमराजे निंबालकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने कभी भी उद्धव ठाकरे या आदित्य ठाकरे के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया है और भविष्य में भी ऐसा नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने समर्थकों से चर्चा करने के बाद ही आगे की राजनीतिक दिशा तय करेंगे। उनके इस बयान ने राजनीतिक अटकलों को और बढ़ा दिया है। एक ओर उन्होंने ठाकरे परिवार के प्रति निष्ठा जताई, वहीं दूसरी ओर भविष्य के फैसले को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं दिए।
उद्धव खेमे की सक्रियता बढ़ी
ओमराजे को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच शिवसेना (यूबीटी) भी सक्रिय हो गई है। पार्टी नेतृत्व समझता है कि यदि एक भी सांसद टूटता है तो उसका राजनीतिक संदेश दूरगामी हो सकता है। इसी कारण युवा सेना नेता वरुण सरदेसाई समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने पुणे जाकर ओमराजे निंबालकर से मुलाकात की और उन्हें पार्टी में बने रहने के लिए मनाने का प्रयास किया।
अगले कदम पर टिकी महाराष्ट्र की राजनीति
महाराष्ट्र की राजनीति इस समय एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ सीबीआई विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ ओमराजे निंबालकर का अगला कदम दोनों शिवसेना गुटों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह घटनाक्रम राज्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है और 'ऑपरेशन टाइगर' की सफलता या विफलता काफी हद तक ओमराजे के फैसले पर निर्भर मानी जा रही है।















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