Mumbai Hostage Eyewitness: 'विंडो पर काले पर्दे, गेट पर सेंसर, नर्क सा माहौल', रोहित आर्या की दादी ने खोली पोल
Mumbai Hostage Eyewitness Mangala Patankar Story: मुंबई के पवई इलाके में 30 अक्टूबर 2025 को एक सनसनीखेज घटना ने पूरे शहर को हिला दिया। वेब सीरीज के ऑडिशन के बहाने 17 मासूम बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्या की साजिश ने माता-पिता के दिलों में डर पैदा कर दिया। लेकिन, पुलिस की बहादुरी से सभी बच्चे सुरक्षित बचा लिए गए, जबकि आरोपी को एनकाउंटर में गोली लगी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस डरावनी घटना की सबसे करीबी गवाह बनीं 75 साल की बुजुर्ग मंगल पाटणकर, जो अपनी पोती के साथ स्टूडियो में फंसी रहीं। अस्पताल के बेड से उन्होंने बताया कि रोहित ने कैसे मीठी बोली और पटाखों की आड़ में सबको बेवकूफ बनाया। आइए, जानते हैं इस कांड की वो खौफनाक दास्तां, जो किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं...

ऑडिशन का लालच: कैसे फंसाए गए 17 बच्चे और दादी-पोती
सब कुछ नॉर्मल लग रहा था। पिछले 6 दिनों से पवई के RA Studio (महावीर क्लासिक कॉम्प्लेक्स में स्थित) में वेब सीरीज के लिए ऑडिशन चल रहे थे। सुबह 10 बजे शुरू होकर रात 8 बजे तक बच्चे आ-जा रहे थे। 30 अक्टूबर को दोपहर डेढ़ बजे का वक्त था। कोल्हापुर से आईं मंगल पाटणकर (Mangala Patankar) अपनी 15 साल की पोती के साथ ऑडिशन के लिए पहुंचीं। ऑडिशन में और भी गई बच्चे मौजूद थे। ज्यादातर 15 साल के लड़के-लड़कियां। लंच टाइम था, लेकिन रोहित आर्या नाम का 50 साल का शख्स (पुणे का रहने वाला, चेंबूर में रहता था) और एक काला दिखने वाला सहयोगी सबको अंदर बुला रहे थे।
'अमीर घरों के छोटे बच्चों को अलग करके बंधक बनाया'
मंगल बताती हैं, 'सब नॉर्मल लग रहा था। रोहित ने कहा, 'अंदर कमरे में जाओ, शूटिंग होगी।' अचानक दरवाजे बंद हो गए। अफरा-तफरी मच गई।' रोहित ने पहले ही खिड़कियों पर काले पर्दे लगाए थे, दरवाजों पर सेंसर चिपकाए थे। बाहर माता-पिता इंतजार कर रहे थे, अंदर नर्क सा माहौल। मंगल ने पोती और अन्य बच्चों को संभाला, लेकिन रोहित ने अमीर घरों के छोटे बच्चों को अलग कर ऊपरी माले पर ले जाकर बंधक बना लिया। 'चार दिनों में उसने सबके बारे में पता कर लिया था - कौन अमीर, कौन गरीब।
'मीठी बोली की जाल, पटाखे फोड़े, गोलीबारी का झांसा दिया'
रोहित की साजिश पहले से तय थी। मंगल के मुताबिक, उसने कुछ बच्चों को नीचे छोड़ दिया, बाकी को ऊपर ले गया। थोड़ी देर बाद लौटा और मंगल को भी ऊपर बुलाया। वहां कुछ नहीं सिखाया गया - सिर्फ बंधक बनाया। मंगल ने अस्पताल से बताया, 'उसने चार बच्चों से माता-पिता को फोन करवाया। हर एक से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। कुल 4 करोड़ चाहिए थे। रोहित लगातार चिल्ला रहा था, 'महाराष्ट्र शिक्षा विभाग मुझे 2 करोड़ का बकाया दे! वरना सब खत्म!'
लेकिन सबसे शातिर चाल - मीठा व्यवहार। मंगल कहती हैं, 'आर्या बहुत मीठा बोल रहा था। पूरे समय अच्छा बर्ताव, लेकिन नाटक भी खूब किया। दिवाली का समय था, तो उसने पटाखे फोड़े। बोला, 'बाहर गोलीबारी हो रही है, डरो मत। इमारत से बाहर मत निकलो।' बाहर पुलिस और दमकल टीम पहुंच चुकी थी। माता-पिता घबरा रहे थे। मंगल ने फोन पर उन्हें तस्वीरें भेजीं - 'बच्चे सुरक्षित हैं, चिंता मत करो।' लेकिन अंदर धमकियां जारी- 'इमारत में बम रखा है, एक गलती तो सब उड़ जाएगा।'मंगल को शक है कि स्टूडियो की एक महिला कर्मचारी भी इस साजिश में शामिल थी। 'वो डरी नहीं लग रही थी। सब प्लान था।'
Mumbai Hostage Case Update: पुलिस की बहादुरी- 3.5 घंटे का ड्रामा, रेस्क्यू और आरोपी की मौत
घटना दोपहर 1:45 बजे शुरू हुई, शाम 5 बजे तक चली। पवई पुलिस ने तुरंत स्पेशल कमांडो बुलाए। डक्ट पाइप पर चढ़कर बच्चे निकाले। एक पुलिसकर्मी बाथरूम की खिड़की से घुसा, जब रोहित एक बच्चे को नुकसान पहुंचाने लगा, तो जवाबी फायरिंग में गोली लग गई। रोहित को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। सभी 19 बंधक (17 बच्चे, मंगल और एक अन्य) सुरक्षित। पवई-साकी नाका रोड पर 1 किमी जाम लग गया। मंगल को बचाते हुए सिर पर कांच के टुकड़े लगे, अभी भी अस्पताल में हैं। उन्होंने खासकर लड़कियों की हिफाजत की।
दादी की नजर से सीख: साजिश की आड़ में छिपा खौफ
मंगल पाटणकर की जुबानी ये कहानी दिल दहला देती है। मीठी बोली से भरोसा जीतना, पटाखों से डराना, फिरौती मांगना - रोहित की ये चालाकी ने मुंबई को सिहरा दिया। लेकिन पुलिस की फुर्ती ने बड़ा हादसा टाल दिया। मंगल कहती हैं, 'बच्चों की सुरक्षा पहले।' ये कांड हमें याद दिलाता है - चकाचौंध के पीछे खतरा छिपा हो सकता है। क्या रोहित अकेला था या गैंग? पुलिस खंगाल रही है।
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