Maharashtra Chunav 2024: वोटर टर्नआउट तय करेगा चुनाव के नतीजे! क्या कहता है ज्यादा मतदान का रुझान ?
Maharashtra Election 2024 News: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इस बार मतदान का प्रतिशत कई सीटों पर हार और जीत तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। क्योंकि, राज्य में भले ही दो गठबंधन ही मुख्य मुकाबले में दिख रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर यह पूरी तरह से बहुकोणीय मुकाबला है। इसलिए राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर से मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए काफी मेहनत की थी और बुधवार 20 नवंबर, 2024 की रात 11.30 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार इसमें वह सफल भी हुए हैं।
टीओआई की एक रिपोर्ट में राजनीतिक विश्लेषकों के हवाले से बताया गया था कि सभी दलों और उम्मीदवारों के लिए कड़ी लड़ाई में कम अंतर से हार या जीत को लेकर बहुत ज्यादा चिंता रही है। यही वजह है कि उन्होंने अपने-अपने इलाकों में बैकरूम वर्करों और बूथ-स्तरीय कार्यकर्ताओं को काफी पहले से ही सक्रिय कर रखा था।

बहुकोणीय मुकाबले में कई सीटों पर कांटे की लड़ाई
इसकी वजह ये है कि 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मुख्य रूप से दो गठबंधनों की चार पार्टियों के बीच ही मुकाबला था। लेकिन, इस बार एनसीपी और शिवसेना में विभाजन की वजह से प्रमुख दलों की संख्या बढ़कर 6 हो चुकी है। इनके अलावा कई छोटी-छोटी पार्टियां भी अकेले या गठबंधन बनाकर चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में पार्टियों के बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की अहमियत बहुत ज्यादा रही है,जिन्हें मैनेज करने में बीजेपी बहुत ही माहिर रही है।
वोटर टर्नआउट से पड़ेगा चुनाव नतीजों पर फर्क!
एक राजनीतिक विश्लेषक ने बताया, 'बहुकोणीय मुकाबले को देखते हुए मार्जिन कम रहने की उम्मीद है। लोकसभा में मुंबई नॉर्थ वेस्ट में शिवसेना के रविंद्र वायकर सिर्फ 48 वोटों से जीते थे, इसलिए इस बार उम्मीदवार और उनके चुनाव मैनेजर कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। वोटर टर्नआउट और पार्टियों की वोटिंग मशीनरी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी, जितना कि उम्मीदवार या नेता की लोकप्रियता।'इसी वजह से सभी दलों की ओर से अपने कोर वोटरों को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए तमाम इंतजाम किए गए थे।
यही वजह है कि चुनाव अभियान के समाप्त होने के बाद ही उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने एक्स पर एक पोस्ट डाला था। इसमें उन्होंने कहा था कि चुनाव अभियान खत्म होने के बाद उन्होंने अपनी साउथ-वेस्ट नागपुर विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी नेताओं, बूथ प्रमुखों और बूथ कार्यकर्ताओं से फोन पर बात की और तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।
छोटे-छोटे दलों और निर्दलियों ने चुनाव को कठिन बनाया
असल में कई ऐसे दल मैदान में हैं, जिनके बारे में संभावना है कि वह निश्चित तौर पर कुछ न कुछ वोट विभाजित कर सकते हैं। मसलन, एमएनएस और वंचित बहुजन अघाड़ी जैसी पार्टियां 200 से ज्यादा सीटों पर चुनाव मैदान में हैं। एक राजनीतिक विश्लेषक ने बताया, 'इनके उम्मीदवार जो महायायुति या एमवीए में नहीं हैं, उन्होंने बड़े दलों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। जैसे एनसीपी और शिवसेना बंट चुकी है और दोनों ही गुट अलग-अलग गठबंधनों में हैं। ऐसे में इन छोटे दलों या निर्दलिय प्रत्याशी किसका वोट काटेंगे, अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।'
ज्यादा मतदान! कैसा आएगा परिणाम?
इसलिए, ये तमाम दलों के पास एक ही उपाय बच गया था कि वह अपने-अपने समर्थकों से ज्यादा से ज्यादा मतदान सुनिश्चित करवाएं। रात 11.30 बजे के आंकड़े के मुताबिक महाराष्ट्र में इस बार 65.1% मतदान हुआ है, जो 2019 के विधानसभा चुनावों से 4% ज्यादा है। जाहिर है कि इतनी बड़ी तादाद में अगर मतदाता वोट डालने निकले हैं तो परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं और जो दल और गठबंधन बूथ मैनेजमेंट में आगे रहा है, उसकी बल्ले-बल्ले होनी तय है।
यही नहीं, इस बार के चुनाव में बागी प्रत्याशियों ने भी बड़े दलों और गठबंधनों की चिंता की लकीरें बढ़ा रखी हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इस बार करीब 150 प्रत्याशी ऐसे थे, जिन्होंने अपने दलों से टिकट नहीं मिलने पर नाराज होकर निर्दलीय ही मैदान में उतर आए थे। इन बागियों को मनाने में कुछ हद तक बड़ी पार्टियां सफल भी रही हैं। लेकिन, जो फिर भी मतदान के दिन तक करीब 80 डटे रह गए, उनसे पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों पर काफी दबाव महसूस किया गया है। अब ज्यादा मतदान से हो सकता है कि बागियों का असर कुछ कम हो जाए!












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