Farmer's Long March: 5 साल बाद फिर से 5000 किसान मुंबई की ओर पैदल चल पड़ें
Farmer's Long March: पांच साल बाद एक बार फिर से 5000 से अधिक किसान मुंबई की ओर पैदल मार्च कर रहे हैं। किसान अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर यह मार्च कर रहे हैं।

Farmer's Long March: तकरीबन 5000 किसानों के गुट ने एक बार फिर से मुंबई की ओर अपना पैदल मार्च शुरू कर दिया है। ये किसान जंगली जमीन और अन्य किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों ने सोमवार को अपना मार्च शुरू किया है, किसान शुक्रवार रात को मुंबई पहुंच जाएंगे। बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब किसानों ने इतने संगठित तरह से अपने मार्च को शुरू किया है। इससे पहले भी पांच साल पहले किसान मुंबई की ओर पैदल मार्च किया था। उस वक्त किसानों के इस मार्च पर सरकार की ओर से कहा गया था कि उनकी सभी मांगों को पूरा किया जाएगा। लेकिन किसानों की कुछ ही मांगों को पूरा किया गया।
इस बार अलग-अलग जगह से किसान इकट्ठा होकर मार्च कर रहे हैं। इसमे नासिक और अहमदनगर के अलावा धुले और पालघर के किसान भी शामिल हैं। ये किसान ऑल इंडिया किसान सभा के बैनर तले मार्च कर रहे हैं। सभा के महासचिव अजीत नवले ने कहा कि 2018 में हमारी कुछ मांगे पूरी हुई थी, लेकिन अभी भी कई मागों को पूरा नहीं किया गया है। नवले ने बताया कि पांच साल पहले मार्च की वजह से सरकार ने किसानों के कर्ज को माफ करने की नीति बनाई। लेकिन अभी भी कई ऐसे मसले हैं जो सुलझे नहीं हैं। हम प्याज किसानों के लिए 600 रुपए प्रति कुंटल की राहत मांग रहे हैं, लेकिन हमे सिर्फ 300 रुपए की ही सब्सिडी दी गई है। सरकार हमे सिर्फ आश्वासन दे रही है, हमारे साथ न्याय नहीं हो रहा है, किसान न्याय के लिए लगातार सरकार पर दबाव डालते रहेंगे।
इसके अलावा किसान जंगल की जमीन को लेकर भी मार्च कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जो आदिवासी जमीन जोत रहे हैं, उन्हे अभी भी जमीन पर अधिकार नहीं मिला है। लिखित आश्वासन के बाद भी कुछ भी नहीं हुआ। एफआरए के तहत जमीन के आंकड़ों को इकट्ठा किया गया। लेकिन 18 साल के बाद भी अभी तक कुछ नहीं हुआ। किसान मुंबई की ओर से मार्च कर रहे हैं, इस वक्त विधानसभा का सत्र चल रहा है। शिंदे सरकार किसानों से बातचीत के जरिए उनके मसलों को हल करनेकी कोशिश कर रही है। मंगलवार को दोनों पक्षों की एक बैठक होनी थी, लेकिन यह टल गई क्योंकि किसानों ने इसमे हिस्सा लेने से मना कर दिया, किसानों का कहना है कि सरकार के प्रतिनिधि को यहां आना चाहिए और उनसे मार्च में ही बात करनी चाहिए।
महाराष्ट्र के मंत्री दादा भूसे और अतुल सावे ने कहा कि हम किसानों से मिलने के लिए जाएंगे। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिंदे सरकार को निशाना साधते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अन्नदाता को इतनी दूर से पैदल आना पडड़ रहा है। सरकार को उनसे मिलने के लिए वहां जाना चाहिए। उन्हें किसानों की समस्या को समझना चाहिए।
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