Lawrence Bishnoi Vs Dawood: दाऊद का पैटर्न लॉरेंस बिश्नोई ने आजमाया! बंदूक का निशाना सिद्दीकी को क्यों बनाया?
Lawrence Bishnoi Vs Dawood: मुंबई, जिसे अक्सर 'मायानगरी' कहा जाता है, न सिर्फ अपने ग्लैमर और सिनेमा के लिए फेमस है, बल्कि 90 के दशक में इसका एक और चेहरा भी था- 'अंडरवर्ल्ड'। और इस अंडरवर्ल्ड का सबसे बड़ा नाम था पुलिस कॉन्स्टेबल का बेटा दाऊद इब्राहिम। दाऊद ने सिर्फ मुंबई में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने आपराधिक साम्राज्य का विस्तार किया। 90 के दशक में दाऊद का नाम मुंबई के हर गली-चौराहे पर सुनाई देता था, और उसका खौफ लोगों के दिलों-दिमाग पर छाया हुआ था।
अब, लगभग दो दशक बाद, एक और पुलिस वाले का बेटा लॉरेंस बिश्नोई अपराध की दुनिया में उभरा है। उसने दाऊद के नक्शे-कदम पर चलते हुए अपनी आपराधिक गतिविधियों का दायरा बढ़ाया और 11 राज्यों और 6 देशों में 700 गुर्गों के नेटवर्क के साथ अपनी पहचान बनाई है।

जैसे दाऊद ने 90 के दशक में मुंबई में आतंक फैलाया, वैसे ही लॉरेंस बिश्नोई ने मुंबई पर अपनी नजरें गड़ा लीं। उसकी पहली बड़ी हरकत सलमान खान को धमकाना और फिर एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या करना था। बंदूक का निशाना सिद्दीकी को क्यों बनाया? समझें पर्दे के पीछे क्या है? आइए जानते हैं...
लॉरेंस बिश्नोई ने सिद्दीकी को क्यों निशाना बनाया?
- दहशत फैलाना: मुंबई में अपनी पहचान और खौफ जमाने के लिए।
- दाऊद को चुनौती देना: लॉरेंस गैंग का मकसद था दाऊद इब्राहिम और उसके नेटवर्क को एक सीधी चुनौती देना।
- सलमान खान को धमकाना: बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान को धमकाकर मुंबई के ग्लैमर जगत में अपनी पकड़ मजबूत करना।
- अंडरवर्ल्ड में नाम बनाना: दाऊद की तरह ही अंडरवर्ल्ड में अपनी जगह बनाना।
90 के दशक का खूनी इतिहास
- 1997: गुलशन कुमार, बॉलीवुड म्यूजिक प्रोड्यूसर, हत्या में दाऊद के शूटरों का नाम उजागर।
- 1997: यूनियन लीडर दत्ता सामंत की निर्मम हत्या में दाऊद का दायां हाथ छोटा राजन का नाम उजागर।
- 1994: प्रमुख सामुदायिक नेता जियाउद्दीन बुखारी की हत्या में दाऊद और छोटा शकील के दोस्त अरुण गवली गैंग।
- 1994: प्रेम कुमार शंकर दत्त शर्मा दो बार के बीजेपी विधायक की हत्या में दाऊद का नाम उजागर।
- 1994: बीजेपी नेता रामदास नायक की हत्या में दाऊद गैंग।
- 1993: शिवसेना नेता रमेश मोरे की हत्या में दाऊद और छोटा शकील के दोस्त अरुण गवली गैंग।
- 1992: शिवसेना विधायक विट्ठल चव्हाण की हत्या में गुरु सतनाम गैंग।
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लॉरेंस का दाऊद वाला पैटर्न
लॉरेंस बिश्नोई भी एक पुलिस वाले का बेटा है, दाऊद की तरह। बिश्नोई ने 2010 में चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान अपराध की दुनिया में कदम रखा और 2011 में पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में शामिल हो गया। वहीं, उसकी मुलाकात गोल्डी बरार से हुई, जो एक और कुख्यात गैंगस्टर है। धीरे-धीरे लॉरेंस ने अपने अपराधी नेटवर्क का विस्तार किया और 11 राज्यों में अपने गुर्गों का साम्राज्य खड़ा कर लिया।
दाऊद इब्राहिम की तरह ही, लॉरेंस ने भी छोटे अपराधों से शुरुआत की और फिर हत्याओं, लूट और तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल हो गया। वह आज 700 से अधिक शूटरों के एक बड़े नेटवर्क का संचालन कर रहा है, जो भारत के 11 राज्यों में फैला हुआ है।
सिद्दीकी की हत्या से फैली दहशत
12 अक्टूबर 2024 को मुंबई की सड़कों पर लॉरेंस गैंग ने सिद्दीकी की हत्या करके फिर से खून बहा दिया। इसका मकसद मुंबई के अंडरवर्ल्ड में अपनी धाक जमाना और दाऊद इब्राहिम को चुनौती देना था।
लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ पहले से ही पिछले 12 सालों में 36 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, डकैती और जबरन वसूली शामिल हैं। चंडीगढ़ स्थित द ट्रिब्यून की 2022 की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मामले पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में दर्ज किए गए हैं।
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अंडरवर्ल्ड का नया चेहरा लॉरेंस!
बिश्नोई का तरीका और उद्देश्य साफ है-वह उसी राह पर चल रहा है, जिस पर कभी दाऊद इब्राहिम चला था। मायानगरी मुंबई पर कब्जा जमाने की यह लड़ाई सिर्फ अपराधियों के बीच की टकराहट नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि अंडरवर्ल्ड का खौफ आज भी जिंदा है। सिद्दीकी की हत्या, दाऊद को चुनौती और सलमान खान को धमकाने की घटनाएं बताती हैं कि लॉरेंस बिश्नोई अब अंडरवर्ल्ड का नया चेहरा बन चुका है।
2016 से जेल में है लॉरेंस
आपको बता दें कि, 2014 में उसे गुरुग्राम से लॉरेंस को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन, पुलिस की कस्टडी से फरार हो गया। 2016 में दोबारा पुलिस ने लॉरेंस को गिरफ्तार किया गया। साल 2021 में लॉरेंस बिश्नोई को राजस्थान की जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में शिफ्ट किया गया। अगस्त 2023 से लॉरेंस गुजरात की साबरमती जेल में बंद है।
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