Prince Yadav: रस्सी की मार भी नहीं रोक पाई क्रिकेट का जुनून! बैन के बाद कैसे टीम इंडिया में पहुंचे प्रिंस यादव

Prince Yadav Journey: दिल्ली की गलियों में टेनिस बॉल क्रिकेट खेलने वाला एक लड़का आज भारतीय टीम तक पहुंच चुका है। युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव (Prince Yadav) की कहानी सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और वापसी की मिसाल बन गई है। कभी उम्र विवाद के चलते 2 साल का बैन झेलने वाले प्रिंस ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत के दम पर खुद को फिर से खड़ा किया। IPL 2026 में Lucknow Super Giants के लिए शानदार गेंदबाजी और घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें पहली बार टीम इंडिया तक पहुंचा दिया। अब अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए उनका चयन उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ बन चुका है।

आईपीएल 2026 प्रिंस यादव के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। लखनऊ सुपर जायंट्स की ओर से खेलते हुए उन्होंने 12 मैचों में 16 विकेट लेकर अपनी तेज गेंदबाजी का दम दिखाया। नई गेंद से लगातार प्रभाव छोड़ने वाले प्रिंस ने मुश्किल मौकों पर विकेट निकालकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके अलावा विजय हजारे ट्रॉफी में 18 विकेट लेकर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में भी अपनी फॉर्म साबित की। यही लगातार प्रदर्शन उनके भारतीय टीम में चयन की सबसे बड़ी वजह बना।आइए जानते हैं प्रिंस यादव के पिता राम निवास यादव ने बेटे का चयन क्या कहा...

Prince Yadav

खत्म होने की कगार पर था करियर

प्रिंस यादव के करियर का सबसे मुश्किल दौर साल 2019 में आया। दिल्ली अंडर-19 क्रिकेट के दौरान उम्र छिपाने के आरोपों में BCCI ने उन पर 2 साल का बैन लगा दिया। उस समय परिवार को लगा कि शायद उनका क्रिकेट करियर यहीं खत्म हो जाएगा।

क्रिकेट से दूर रहने का वह दौर प्रिंस और उनके परिवार दोनों के लिए बेहद कठिन था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लॉकडाउन के बाद 2023 में नेट बॉलर के तौर पर दोबारा शुरुआत की और धीरे-धीरे खुद को फिर से साबित करना शुरू किया। यही वापसी आगे चलकर उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत बन गई।

गांव की पिच से बड़े मंच तक का सफर

प्रिंस यादव ने 19 साल की उम्र में तेज गेंदबाजी को गंभीरता से लेना शुरू किया। गांव के तालाब के पास बनी एक साधारण सी दिखने वाली पिच पर उन्होंने घंटों अभ्यास किया, और अपने लगातार प्रयास से गेंदबाजी को निखारा।

जीवन में कब आया सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट?

इसी दौरान पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान (Pradeep Sangwan) की नजर उन पर पड़ी। नजफगढ़ में खेलते हुए सांगवान ने उनके टैलेंट को पहचाना और बेहतर ट्रेनिंग लेने की सलाह दी। इसके बाद कोच अमित वशिष्ठ के मार्गदर्शन में प्रिंस ने अपनी गेंदबाजी पर मेहनत की और धीरे-धीरे दिल्ली क्रिकेट में अपनी पहचान बना ली।

पिता ने सुनाई संघर्ष की कहानी

प्रिंस यादव के पिता राम निवास यादव ने ANI से बातचीत में बताया कि भारतीय टीम में बेटे का चयन पूरे परिवार के लिए भावुक कर देने वाला पल था। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रिंस की नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सालों के संघर्ष और त्याग की जीत है।

पढ़ाई के पैसों से खरीदा क्रिकेट का सामान

राम निवास यादव के मुताबिक, प्रिंस ने शुरुआत महंगी क्रिकेट अकादमी से नहीं बल्कि टेनिस बॉल क्रिकेट से की थी। वह सूरत और मुंबई जैसे शहरों में लोकल टूर्नामेंट खेलने के लिए खुद ही सफर और खर्च संभालते थे। कई बार उन्होंने पढ़ाई के लिए रखे पैसों से क्रिकेट का सामान तक खरीदा। परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दें, लेकिन प्रिंस का पूरा फोकस क्रिकेट पर था। पिता ने बताया कि सबसे यादगार पल वह था जब प्रिंस ने खुद फोन करके भारतीय टीम में चयन की खबर दी।

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रस्सी की मार भी नहीं रोक पाई क्रिकेट का जुनून!

प्रिंस के पिता ही नहीं बल्कि उनकी मां भी हमेशा इस बात को लेकर परेशान रहती थीं कि पढ़ाई और भविष्य का क्या होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक दिन इसी चिंता और गुस्से में उन्होंने प्रिंस को रस्सी से तक मार दिया और घर छोड़कर बाहर जाने तक के लिए कह दिया। लेकिन इन सबके बावजूद प्रिंस का क्रिकेट के प्रति जुनून जरा भी कम नहीं हुआ। उन्होंने हर मुश्किल, डांट और दबाव को सहते हुए अपने सपने का पीछा जारी रखा और आखिरकार टीम इंडिया तक पहुंचकर अपने संघर्ष को सफलता में बदल दिया।

प्रिंस को कब और कैसे मिली IPL में एंट्री

दिल्ली प्रीमियर लीग 2024 ने प्रिंस यादव की जिंदगी बदल दी। पुरानी दिल्ली-6 टीम के लिए खेलते हुए उन्होंने टूर्नामेंट की पहली हैट्रिक ली और कुल 13 विकेट झटककर सभी को प्रभावित किया। उनकी इसी शानदार गेंदबाजी का असर नवंबर ऑक्शन में दिखा, जब लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन्हें 30 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया। IPL में मिले मौके को प्रिंस ने दोनों हाथों से भुनाया और अब वही प्रदर्शन उन्हें टीम इंडिया तक ले आया है।

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