Hindi vs Marathi language row: हिंदी-मराठी विवाद पर महायुति में टेंशन, शिंदे ने अपनी ही सरकार को दिखाई आंख
Hindi vs Marathi language row: महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर राजनीति अब तेज होती दिख रही है। राज ठाकरे एक बार फिर हिंदी विरोध के बहाने अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर बीजेपी अपने हिंदी हार्ट लैंड समर्थकों की नाराजगी मोल नहीं ले सकती है। इधर महायुति में भी भाषा विवाद पर तकरार बढ़ती दिख रही है। एकनाथ शिंदे की पार्टी अपनी ही सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रही है। मीरा भायंदर पुलिस ने मंगलवार की सुबह ही प्रदर्शन कर रहे एमएनएस (MNS) कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है।
देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री प्रताप सरनाइक ने मनसे कार्यकर्ताओं पर की गई सख्ती पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के प्रदर्शन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। यहां मराठी भाषा के सम्मान के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सख्ती की जा रही है। उन्होंने कहा कि आखिर मराठी लोगों को मार्च के लिए अनुमति नहीं देने के पीछे क्या आधार है। महाराष्ट्र में त्रिभाषा फॉर्मूले को लागू नहीं किए जाने के फैसले के बाद भी तनाव कम होता नहीं दिख रहा है।

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Hindi vs Marathi: शिंदे को अपनी जमीन खिसकने का डर
मराठी बनाम हिंदी विवाद में एकनाथ शिंदे को अपनी जमीन खिसकने का डर सताने लगा है। शिवसेना का आधार हमेशा मराठी अस्मिता और भाषा रही है। अब इस मुद्दे पर जिस तरीके से राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एकजुट हुए हैं उससे एकनाथ शिंदे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शिंदे खुद को बाला साहेब ठाकरे के असली उत्तराधिकारी के तौर पर पेश करते रहे हैं और उन्होंने हिंदुत्व और मराठी अस्मिता की विरासत को सही अर्थों में आगे ले जाने का दावा करते हुए पार्टी अलग की थी।
अगर ठाकरे बंधु साथ आते हैं, तो सबसे पहले एकनाथ शिंदे के वोट बैंक में ही सेंध लगेगी। यही वजह है कि उनकी पार्टी इस विवाद में अब अपने गठबंधन के खिलाफ जाकर भी जनाधार बचाने की कोशिश में जुट गई है।महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी बनाम हिंदी का मुद्दा कोई पहली बार जोर नहीं पकड़ रहा है। शिवसेना के उभार के पीछे मराठी अस्मिता एक अहम फैक्टर रहा है। एक बार फिर यह मुद्दा राजनीति में तूल पकड़ रहा है।
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