महाराष्ट्र में कांग्रेस, NCP और VBA को बड़ा झटका, 19 सरपंच केसीआर की BRS में शामिल
तेलंगाना में सत्ताधारी के चंद्रशेखर राव की पार्टी भारत राष्ट्र समिति ने महाराष्ट्र में धमाल मचा दिया है। बीआरएस ने एक ही झटके में अन्य दलों के 19 मौजूदा सरपंचों को पार्टी में शामिल करा लिया है। सरपंचों के अलावा अन्य दलों के कुछ और नेता बीआरएस में शामिल हुए हैं। ये पार्टियां हैं- कांग्रेस, एनसीपी, वंचित बहुजन अघाड़ी, शिवसेना और शेतकारी संगठन।
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के कम से कम 19 सरपंचों (ग्राम प्रधानों) ने अपनी पार्टियों को छोड़कर केसीआर की अगुवाई वाली भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) का हाथ पकड़ लिया है। मंगलवार को केसीआर की पार्टी के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी है।

कांग्रेस पार्टी को सबसे तगड़ा झटका
महाराष्ट्र में बीआरएस के किसान सेल के प्रमुख माणिक कदम ने ये भी जानकारी दी है कि सबसे ज्यादा कांग्रेस के सरपंच उनकी पार्टी में शामिल हुए हैं। ये सारे सरपंच वे हैं, जिनका कार्यकाल अगले 18 महीनों बाद खत्म होने वाला है। बीआरएस में शामिल होने वाले 19 में से 12 सरपंच अकेल कांग्रेस पार्टी के हैं।
तीन पूर्व सरपंचों ने भी अपनी पार्टी को किया निराश
इनके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 6 और प्रकाश अंबेडकर की अगुवाई वाले वंचित बहुजन अघाड़ी के 1 सरपंच हैं। कदम ने जो सूची साझा की है, उसके मुताबिक तीन पूर्व सरपंचों ने भी अपने पुराने दलों को छोड़कर हैदराबाद की पार्टी दामन थामा है। इनमें दो शिवसेना और एक शेतकारी संगठन के हैं, जो बीआरएस में शामिल हुए हैं।
पार्टी की सदस्य संख्या बढ़ाने के लिए अभियान चलाएगी बीआरएस
महाराष्ट्र में भारत राष्ट्र समिति के विस्तार के बार में केसीआर की पार्टी के नेता ने कहा, 'पार्टी ने अबतक 14.10 लाख कार्यकर्ताओं की डिटेल रजिस्टर की है, जो पार्टी से और सदस्यों को जोड़ने के लिए एक अभियान लॉन्च करेंगे।' उन्होंने बताया कि 'हमने उस खास क्षेत्र में हमारे सदस्यों की संख्या के आधार पर चुनाव क्षेत्रों की ग्रेडिंग शुरू कर दी है।'
महाराष्ट्र में विपक्ष के लिए बीआरएस ने बढ़ाई चिंता
कदम ने कहा है कि पश्चिम महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के लिए क्रमश: पुणे और औरंगाबाद में बीआरएस के दफ्तर पार्टी के क्षेत्रीय कार्यालय के तौर पर काम करेंगे, जहां से जल्द ही कार्य शुरू हो जाएंगे। लेकिन, महाराष्ट्र के लिए बीआरएस जैसी नई-नवेली पार्टी ने जिस तरह से राज्य में विपक्षी दलों के नेताओं को अपने पाले में किया है, वह पहले से ही मुश्किलों में घिरे विपक्ष के लिए सही संदेश नहीं है।
गौरतलब है कि भारत राष्ट्र समिति का नाम कुछ समय पहले ही राष्ट्रीय पार्टी के रूप में विस्तार के इरादे से तेलंगाना राष्ट्र समिति से बदलकर रखा गया है। अलग तेलंगाना राज्य के गठन के बाद से इसी पार्टी की वहां पर सरकार है और केसीआर राज्य के सीएम हैं। अब यह पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रभाव बढ़ाने के अभियान में जुटी है और कुछ समय पहले ही पार्टी का राजधानी दिल्ली में भी एक दफ्तर खोला गया है।
गौरतलब है कि बीआरएस 26 विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसकी नीति आमतौर पर विपक्षी दलों के समर्थन वाली ही रही है। अनेकों मुद्दों पर यह बीजेपी-विरोधी विपक्ष के साथ एकजुटता प्रदर्शित कर रही है।












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