maharajganj: कुत्ते के मुंह में नवजात का शव देखकर मची भगदड़, महिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही
उत्तर प्रदेश के महराजगंज ज़िले से महिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। सोमवार देर रात अस्पताल में मौजूद तीमारदारों ने कुछ ऐसा देखा जिसे देख कर उनके होश उड़ गए। उन्होंने देखा की शौचालय की तरफ से एक कुत्ता नवजात बच्चे का शव अपने मुँह में दबाकर भाग रहा है। यह देख अस्पताल में हड़कंप मच गया। शोर मचाकर कुत्ते को भगाया गया और नवजात के शव को छुड़वाया। वही अस्पताल प्रशासन इस मामले पर एक अलग ही कहानी बता रहा है।

डस्टबिन से शव को लेकर भागा कुत्ता
बता दें कि जनपद महराजगंज में जिला संयुक्त चिकित्सालय के बगल में स्थित जिला महिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और संवेदनहीनता एक बार फिर सामने आई है। नवजात का शव शौचालय के डस्टबिन में किसी ने फेंक दिया था, इसी दौरान शव को लेकर कुत्ता भागने लगा।
दरअसल, घटना सोमवार देर रात की है। अस्पताल के बरामदे में मरीजों के परिजन बैठे हुए थे। इसी बीच इमरजेंसी वार्ड के शौचालय की ओर से एक कुत्ता निकला जो अपने मुंह में नवजात का शव दबाए हुए था। मरीज के परिजनों ने शोर मचाया तो कुत्ता शव को छोड़कर भाग गया। जांच करने पर पता चला कि शौचालय के डस्टबिन में नवजात का शव किसी ने फेंक दिया था।

'शव किसका है यह जांच का विषय'
जब इस बारे में अस्पताल प्रशासन से सवाल किया गया तो मौके पर पहुंचे मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ एके द्विवेदी ने ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड, स्वास्थ्य कर्मियों और सफाई कर्मचारियों से पूछताछ की लेकिन कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में सोमवार को चार प्रसव हुए थे, इनमें से दो नवजात मृत पैदा हुए थे। दोनों के स्वजन शव को अपने अपने साथ लेकर चले गए थे। ऐसे में यह शव किसका है यह जांच का विषय है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खांगाली जा रही है । फुटेज में कुछ युवक व एक महिला संदिग्ध दिख रहे हैं उनके पहचान की कोशिश की जा रही है।

सरकार को देना होगा ध्यान
दरअसल यह पहला मामला नहीं है जिसमे इस तरह की लापरवाही की गई है। इससे पहले भी प्रदेश में आए दिन कई वीडियोस सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं। जिनमे स्वास्थ्य विभाग की मौजूदा स्तिथि की पोल खुलती नजर आती है। कभी मोरचरी में कुत्तों द्वारा शव को खाए जाने का मामला सामने आता रहा है तो कभी शवों को ले जाने के लिए एम्बुलेंस ही नहीं होती है, पर हर बार अस्पताल सुधार करने की जगह उलटे सीधे कारण गिनाकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। अब इस लापरवाही पर अस्पताल प्रशासन किसी भी तरह की जांच की बात कर ले लेकिन यह तो स्पष्ट हो गया है कि जिला महिला अस्पताल लापरवाही और संवेदनहीनता के बुरे दौर से गुजर रहा है। ऐसे में जांच के बाद किस तरह की कार्यवाई होती है यह देखने वाली बात होगी।












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