जिनके लिए लिखे लव लेटर, जूनागढ़ में उसी पत्नी को भूले शिवराज! 1KM बाद याद आईं, जानें कहां बैठी मिलीं?
Shivraj Singh Chouhan News: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार (19 जुलाई) को गुजरात के जूनागढ़ में अपनी जल्दबाजी के कारण सुर्खियों में आ गए। 22 गाड़ियों का काफिला लेकर वह पत्नी साधना सिंह को भूलकर राजकोट के लिए निकल पड़े। करीब 1 किलोमीटर दूर पहुंचने के बाद उन्हें याद आया कि पत्नी साथ नहीं हैं। इसके बाद काफिला यू-टर्न लेकर मूंगफली शोध केंद्र के प्रतीक्षालय में लौटे, जहां साधना सिंह उनका इंतजार कर रही थीं। इस मजेदार घटना ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी।
आपको बता दें कि, यह वहीं, साधना सिंह (Sadhna Singh Chouhan) हैं, जिनको देखकर शिवराज सिंह चौहान ने अपने 'आजीवन कुंवारे' रहने की प्रतिज्ञा को तोड़ दिया था। सूत्र बताते हैं कि कई प्रेम खत भी लिखे थे। आइए जानते हैं विस्तार से पूरा किस्सा...

क्या थी जल्दबाजी की वजह?
शिवराज सिंह चौहान अपनी पत्नी साधना सिंह के साथ गुजरात के धार्मिक और सरकारी दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में दर्शन किए, गिर नेशनल पार्क में शेरों को देखा, और जूनागढ़ के मानेकवाड़ा गांव में मूंगफली शोध केंद्र में किसानों व 'लखपति दीदी' योजना की महिलाओं से मुलाकात की। शनिवार को उनका शेड्यूल टाइट था, क्योंकि उन्हें रात 8 बजे राजकोट से फ्लाइट पकड़नी थी। खराब सड़कों और समय की कमी के कारण वह हड़बड़ी में थे।
मूंगफली शोध केंद्र के कार्यक्रम में शिवराज बार-बार घड़ी देख रहे थे। उन्होंने माइक पर कहा, "राजकोट का रास्ता खराब है, अगली बार फुर्सत से आऊंगा।" भाषण को छोटा कर वह तेजी से काफिले के साथ निकल गए। उस समय साधना सिंह गिरनार दर्शन के बाद प्रतीक्षालय में लौट चुकी थीं।
यू-टर्न की कहानी
काफिला जैसे ही 1 किलोमीटर दूर पहुंचा, शिवराज को अहसास हुआ कि उनकी पत्नी साथ नहीं हैं। उन्होंने तुरंत फोन पर संपर्क किया और पुष्टि हुई कि साधना प्रतीक्षालय में बैठी हैं। इसके बाद पूरा काफिला वापस लौटा, और साधना को लेकर राजकोट के लिए रवाना हुआ। यह घटना स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।
गुजरात दौरे की खासियतें
- सोमनाथ दर्शन: शिवराज और साधना ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुजारी ने उनका तिलक किया, और दंपति ने वहां तस्वीरें भी खिंचवाईं।
- गिर नेशनल पार्क: शिवराज ने दूरबीन से गिर के शेरों का दीदार किया और पार्क में अपने सरकारी काम भी निपटाए।
- किसानों से मुलाकात: मानेकवाड़ा गांव में शिवराज ने मूंगफली की खेती करने वाले किसानों से बात की। उन्होंने आधुनिक निराई-गुड़ाई मशीन को खुद चलाकर देखा और इसके फायदे समझे।
शिवराज ने एक्स पर लिखा, 'मूंगफली शोध केंद्र में किसानों से मुलाकात की। आधुनिक मशीनों से खरपतवार हटाना आसान हो गया है, जिससे मजदूरी की लागत घटती है और फसल की पैदावार बढ़ती है। यह खेती को आसान और किसानों की आय बढ़ाने में मददगार है।'
सोशल मीडिया पर हल्का-फुल्का हंगामा
इस घटना ने सोशल मीडिया पर हंसी-मजाक का माहौल बना दिया। एक यूजर ने लिखा, 'शिवराज जी को मध्य प्रदेश के 'मामा' से अब 'भूलक्कड़ मामा' कहना पड़ेगा!' एक अन्य ने मजाक में कहा, 'साधना जी को प्रतीक्षालय में छोड़कर काफिला निकल गया, लेकिन शिवराज जी का यू-टर्न दिल जीत ले गया।' कुछ यूजर्स ने उनकी व्यस्तता को सराहा, लेकिन साथ ही इस भूल को लेकर हल्की-फुल्की चुटकी भी ली।
साधना सिंह का रोल
साधना सिंह, शिवराज की पत्नी, अक्सर उनके साथ सार्वजनिक और धार्मिक दौरों पर नजर आती हैं। वह सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहती हैं और मध्य प्रदेश में उनकी सादगी और शिवराज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की छवि मशहूर है। इस घटना में उनकी शांत और धैर्यपूर्ण प्रतिक्रिया ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
शिवराज का व्यस्त शेड्यूल
शिवराज सिंह चौहान, जो मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री हैं, अपने व्यस्त शेड्यूल और जन-केंद्रित कामों के लिए जाने जाते हैं। इस दौरे में भी उन्होंने कृषि तकनीक, महिला सशक्तिकरण, और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। लेकिन यह छोटी-सी भूल उनकी मानवीय और सादगी भरी छवि को और उजागर करती है।
यह घटना भले ही हल्की-फुल्की लगे, लेकिन यह शिवराज सिंह चौहान की व्यस्तता और उनके काम के प्रति समर्पण को दर्शाती है। साधना सिंह के साथ उनका यह गुजरात दौरा धार्मिक और सरकारी दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था। अब सबकी नजरें उनके अगले दौरे पर हैं, और उम्मीद है कि इस बार वह कोई भूल नहीं करेंगे!
क्या है शिवराज का लव लेटर किस्सा?
आपको बता दें कि, शिवराज सिंह चौहान की 6 मई 1992 को साधना सिंह से शादी हुई थी। खास बात यह है कि शिवराज, शादी के लिए कतई तैयार नहीं थे। उन्होंने बचपन से ही राजनीति में जीवन बिताने की ठान ली थी। 1972 में 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' (RSS) से जुड़ने के बाद यह विचार उनका और प्रबल हो गया। माता-पिता को अपने आजीवन कुंवारे रहने का फैसला सुनाया।
इसी बीच, शिवराज के घर वालों ने कई दफा शादी के लिए उनका मन बदलना का प्रयास किया। आखिर कार गोदिंया के मतानी परिवार की बेटी साधना को देखने के लिए शिवराज तैयार हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि साधना को देखते ही शिवराज अपनी 'आजीवन' कुंवारे रहने की प्रतिज्ञा को भूल बैठे। इसके बाद, शिवराज ने साधना का दिल जीतने के लिए कई प्रेम खत लिखे थे।
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