OPINION: समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए इसी तरह सोचती है मध्य प्रदेश सरकार
MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने शासकीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बहुत बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारियों के महंगाई भत्ते में चार प्रतिशत की वृद्धि का फैसला करके लाखों लोगों के जीवन को और खुशहाल बनाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है।
सबसे बड़ी बात ये है कि एमपी सरकार ने महंगाई भत्ते बढ़ाने के फैसले को जुलाई महीने से ही प्रभावी कर दिया है। मतलब, आने वाली सैलरी से ही कर्मचारियों और पेंशनधारियों को इस फैसले का लाभ मिलने लगेगा, सरकार ने उन्हें इंतजार करने के लिए नहीं छोड़ा है।

शासकीय कर्मचारियों और पेंशनधारियों को दी बड़ी राहत
मध्य प्रदेश शासन ने महंगाई भत्ते पर जो कदम उठाया है, उसके बाद महंगाई भत्ता बढ़कर 46 प्रतिशत हो जाएगा। यह बढ़ोतरी चौथे और पांचवें वेतनमान में कार्यरत राज्य सरकार के कर्मचारियों, उपक्रमों, निगमों, मंडलों एवं प्रतिनियुक्ति वाले पदों के साथ ही अनुदान प्राप्त संस्थाओं पर भी समानुपातिक रूप से लागू होगी।

शासकीय कर्मचारियों के साथ खड़ी है मोहन यादव सरकार
यही नहीं राज्य के पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत में वृद्धि के संबंध में छत्तीसगढ़ शासन से सहमति प्राप्त कर आदेश जारी करने के लिए भी शासन ने वित्त विभाग को अधिकृत किया है। अगर छत्तीसगढ़ सरकार से यह अनुमति मिल जाती है तो राज्य पर चालू वित्त वर्ष में 222 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा, लेकिन कर्माचरियों के जीवन को बेहतर बनाने की बात है तो राज्य सरकार इसके लिए भी तैयार है।

भर्तियों में बैकलॉग को खत्म करने के लिए भी दूरगामी पहल
एक तरफ एमपी सरकार ने मौजूदा शासकीय कर्मियों को महंगाई भत्ते का तोहफा दिया है तो दूसरी तरफ बैकलॉग पदों को भरने के लिए बहुत ही दूरगामी कदम उठाने का फैसला किया है। मोहन यादव सरकार ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के बैकलॉग पदों को भरने की समय-सीमा एक साल बढ़ा दी है।

दलित, आदिवासी और ओबीसी के कल्याण के लिए मुस्तैद एमपी सरकार
दरअसल, प्रदेश में 17 हजार बैकलॉग पदों में से अभी मात्र 7 हजार पद ही भरे जा सके हैं। यानी जो 10 हजार पद खाली रह गए हैं, उन्हें बढ़ाई गई समय-सीमा के अंदर भरना जरूरी है।

मतलब, ये है कि मोहन यादव सरकार इन वर्गों को शासकीय सेवा में उनका उचित स्थान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और उसमें किसी भी तरह की कोताही नहीं चाहती।
इन निर्णयों ने यह दिखाया है कि एक ओर मध्य प्रदेश सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के जीवन को बेहतर से बेहतर बनाने के लिए संकल्पित है तो उन वर्गों को शासन में योगदान देने का अवसर उपलब्ध करवाने के लिए भी हर समय तैयार बैठी है, जो किसी न किसी रूप में उपेक्षा के शिकार बताए जाते हैं।













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