MP: मध्यप्रदेश में IAS अफसरों पर नए नियम: खर्चे से लेकर काम का मांगा ब्यौरा, अधिक लेन-देन का देना होगा हिसाब
एमपी के सभी आईएएस अफसरों को अब 6 माह के मूल वेतन से अधिक किए गए सभी लेन-देन का हिसाब देना होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी IAS अफसरों को लेटर लिखा है।

मध्यप्रदेश में आईएएस अफसरों को सामान्य प्रशासन विभाग ने एक नया फरमान जारी किया है। जिसमें अब प्रदेश के आईएएस (IAS) अफसरों को 6 माह के मूल वेतन से अधिक किए गए सभी लेन-देन का हिसाब देना होगा। बता दे अभी तक आईएएस अफसरों को हर साल अचल संपत्ति की खरीदी-बिक्री की ही जानकारी देनी होती थी, लेकिन अब यह नया प्रावधान सभी अफसरों के लिए अनिवार्य किया गया है।
बता दे मध्य प्रदेश में सामान्य विभाग प्रशासन ने प्रदेश के सभी आईएएस अफसरों को पत्र लिखकर यह जानकारी 31 जनवरी तक देने को कहा है। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों आईएएस अफसरों को अब एक कैलेंडर वर्ष में 6 माह के मूल वेतन से ज्यादा राशि के लेन-देन का हिसाब देना होगा। इसके अलावा शेयर बाजार में वे जो सालाना निवेश करते हैं, सिक्योरिटीज और डिबेंचर खरीदने में वे जो निवेश करते उसकी भी जानकारी उन्हें देना होगी।
सामान्य प्रशासन विभाग ने पत्र में आईएएस अफसरों को लिखा कि म्यूच्यूअल फंड, पब्लिक प्रोविडेंड फंड, राष्ट्रीय बचत पत्र, किसान विकास पत्र, सुकन्या समृद्धि योजना, मासिक आय योजना, बैंक और डाकघरों में फिक्स डिपॉजिट में यदि 6 महीने से ज्यादा के मूल वेतन से अधिक निवेश किया गया है तो उसकी जानकारी भी उन्हें 31 जनवरी तक निर्धारित प्रपत्र में शासन को देना होगी।
अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों के तहत पूर्व से शासन को उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी जैसे दो माह के मूल वेतन से अधिक के अचल संपत्ति के ट्रांजैक्शन की जानकारी के अतिरिक्त यह जानकारी अब आईएएस अफसरों को देना होगा। सभी आईएएस अफसरों को निर्धारित समय अवधि में यह जानकारी देने को कहा गया है।
IAS अफसरों को इस फॉर्मेट में देना होगी जानकारी
इस नए प्रावधान के तहत प्रदेश की आईएएस अफसरों को इस प्रकार से जानकारी देना होगी। अधिकारी का नाम उसका पद, उसका कैडर व किस सेवा से है, कर्मचारी आईडी, कोड नंबर, स्केल पे और वर्तमान वेतन शेयर, डिबेंचर, सिक्योरिटीज और अन्य निवेश के लिए वर्ष में निवेश की जानकारी सेपरेट सीट में देना होगी। यदि निवेश के लिए कोई वित्तीय मदद ली गई है तो उसके बारे में पर्सनल सेविंग डिटेल और अन्य स्त्रोतों से प्राप्त राशि का विवरण भी देना होगा।
सामान्य प्रशासन ने तय की समय सीमा
सामान्य प्रशासन विभाग ने आईएएस अधिकारियों से कहा कि इस समय सीमा में अपनी पीआर में मतांकन स्वमूल्यांकन की कार्रवाई करें। प्रतिवेदक अधिकारी और समीक्षा अधिकारी समय सारणी में मतांकन करें। जो पीआर पर प्रतिवेदक समीक्षक निर्धारित तिथि से पूर्व मतांकन नहीं करेंगे। वहां स्पैरो पोर्टल पर एनआईसी द्वारा केंद्र के समीक्षक स्वीकारकर्ता को ऑटो फॉरवर्ड किया जाएगा।
प्रदेश में आईएएस अफसरों को पीआर ऑनलाइन फाइल करने के लिए शासन ने समय सीमा तय कर दी है। तय समय सीमा के अनुसार पीआर फाइल नहीं होने पर वे अगले स्तर पर ऑटो फॉरवर्ड हो जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने एमपी के सभी आईएएस अधिकारियों को 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 तक की पीआर ई फाइलिंग के लिए प्रपत्र भेजने की समय सीमा तय कर दी है।
अखिल भारतीय कार निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट के नियम 2007 एवं संशोधित नियम 2017 में किए गए प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक साल के कैलेंडर 31 दिसंबर तक की अवधि में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पीआर ऑनलाइन अभिलिखित की जाना जरूरी है।












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