Kuno National Park के चीतों की बढ़ी चिंता , 'उदय' की मौत चीतों को कराएगी शिफ्ट! बाड़े में पहुंचा 'पवन'
कूनो नेशनल पार्क से कुछ चीतों को शिफ्ट करने अब पार्क प्रबंधन ने केंद्रीय वन मंत्रालय और टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को चिट्ठी लिखी हैं।

Kuno National Park: कूनो नेशनल पार्क में चीतों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही हैं। ओबान 'पवन' चीता ने पार्क प्रबंधन की जहां नाक में दम कर दिया, तो वहीं 27 दिन में दो चीतों की मौत ने चीता विशषज्ञों के होश उड़ा दिए हैं।
ख़ास बात यह है कि नामीबिया और साउथ अफ्रीका से चीतों की खेप लाने के पहले एक्शन प्लान तैयार हुआ था। जिसमें बताया गया था कि कूनो में अधिकतम 22 चीते रह सकते हैं। हालांकि उसमें इस बात का भी जिक्र था कि जरुरत पड़ने पर उन्हें शिफ्ट करना पड़ सकता हैं।

वर्तमान में दो चीतों की मौत के बाद अब 18 चीते बचे हैं। लेकिन जिस तरह साशा और उदय चीता की मौत हुई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, उसके बाद फारेस्ट डिपार्टमेंट आगे कोई और बड़ी रिस्क लेना नहीं चाहता। पीसीसीएफ जेएस चौहान ने केंद्रीय वन मंत्रालय और टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को पत्र लिखा है।
जिसमें बताया गया है कि चीता एक्शन प्लान के हिसाब से कुछ चीतों को चिन्हित जगहों पर शिफ्ट किया जाना जरुरी है। सूत्रों के मुताबिक पत्र में उन परिस्थितियों का जिक्र नहीं है, जो यहां के चीतों को विचिलित कर रही हैं या फिर भौगोलिक परिस्थितियों में वह ढल नहीं पा रहे।
क्यों हुआ कार्डियोआर्डेनरी फेल्योर?
व्यस्क चीता 'उदय' की मौत ने सभी के कान खड़े कर दिए है। पीएम रिपोर्ट में वन प्राणी विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किए गए 'उदय' के शव के पोस्टमार्टम में कार्डियोआर्डेनरी फेल्योर बताया गया। विदेश से स्वस्थ आए चीतों को भला ऐसा क्या हुआ कि वह यहां बीमार पड़ गए?
ओबान 'पवन' की भागम-भाग भी सिर दर्द
दूसरी मुसीबत पार्क से भाग रहे चीता 'पवन' की भी है। वह तीन बार भागा और वन विभाग की टीम को छकाता रहा। लेकिन अब उसे वापस बाड़े में छोड़ दिया गया हैं। दो मादा चीतों के इर्द-गिर्द ही अब पवन रहेगा। उसकी हरकत पर नजर रखने अलग से एक टीम भी तैनात की गई हैं।
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