गरीब महिला के घर की जमीन जब उगलने लगी नोटों की गड्डियां, लग गया 1 करोड़ 35 लाख रुपए का ढेर

महिला के घर की हालत देखकर कोई भी भरोसा नहीं कर सकता था, कि पुलिस के पहुँचने के पहले वह गरीब नहीं, करोड़पति है। यह महिला भी नहीं जानती थी। पुलिस के पहुँचने पर जब खुदाई शुरू हुई जमीन में दो बड़े बैग गड़े थे। उनको खोला गया तो,

बालाघाट, 27 जुलाई: हजार, दो हजार, लाख नहीं...पूरे एक करोड़ पैंतीस लाख रुपए...एमपी के बालाघाट में एक घर की जमीन में गड़े हुए निकले। इतनी बड़ी रकम को दो बैग में भरकर जमीन में गाड़ा गया था। इस बात का पता लगते ही पुलिस जब यहाँ पहुंची तो घर में मौजूद महिला के पसीने छूट गए। दरअसल इसकी कहानी ही कुछ ऐसी है कि इतनी बड़ी रकम को छुपाने इस महिला के घर को चुना गया। यह सब डबल मनी की लालच देकर भोले-भाले लोगों से पैसे एंठने के आरोप में पकड़े गए आरोपियों ने किया था।

बालाघाट में इस गरीब महिला के घर मिले नोट

बालाघाट में इस गरीब महिला के घर मिले नोट

लोगों के घरों में गड़ाधन-खजाने की चर्चा खूब होती रही है, लेकिन मप्र के बालाघाट के नंबरटोला गांव में निशा बाई के घर जब खुदाई शुरू हुई तो नोटों गड्डियों का ढेर लग गया। निशाबाई बहुत गरीब है और यहाँ-वहां छोटा काम करके वह अपना घर चलाती है। जिंदगी में उसने इतनी रकम आज तक नहीं देखी थी। लेकिन जब इस घर के छोटे से कमरे में पुलिस ने धावा बोला तो उसके पसीनें छूट गए। क्योकि उसके घर में महेश तिड़के नाम के शख्स ने दो भरे बैग जमीन में गाड़ दिए थे। महेश ने गरीब निशाबाई को कुछ पैसों का लालच दिया और बैग घर में गड़े होने का राज किसी को भी बताने से मना किया था।

इस घर में ऐसे पहुंची पुलिस

इस घर में ऐसे पहुंची पुलिस

दरअसल पिछले दिनों बालाघाट में एक कंपनी बनाकर कम वक्त में पैसे डबल करने का लालच देने वाला गिरोह बेनकाब हुआ था। कंपनी के चंगुल में फंसे कई भोले-भाले लोगों ने CM हेल्प लाइन में शिकायत की थी। जिसके बाद गिरोह के मास्टर माइंड में शामिल अजय तिड़के समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। मामले की जारी तफ्तीश में पुलिस को निशाबाई का घर पता चला।

जमीन में नोट गड़े होने का ऐसे लगा पता

जमीन में नोट गड़े होने का ऐसे लगा पता

दरअसल लोगों की खून-पसीने की गाड़ी कमाई निवेश करवाकर डबल-ट्रिपल करने का दावा करने वाला गिरोह पकड़ा गया था। मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकरायने, हेमराज आमाडारे और अजय तिड़के जब पुलिस गिरफ्त में आए तो इनके कारनामों की कुंडली राजधानी दिल्ली तक पहुंची। चूँकि बालाघाट जिला नक्सल प्रभावित एरिया में आता है, लिहाजा आरोपियों से पहले बरामद हुए दस करोड़ रुपए के आधार पर सरकार ने आरोपियों के तार नक्सलियों से जुड़े होने की आशंका जाहिर की। जिन्हें फंडिग करने के आरोप भी लग रहे थे। इसी आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया और मुखबिर से खबर लगते ही गरीब महिला के घर धावा बोल दिया।

जब जमीन उगलने लगी नोटों की गड्डियां

जब जमीन उगलने लगी नोटों की गड्डियां

महिला के घर की हालत देखकर कोई भी भरोसा नहीं कर सकता था, कि पुलिस के पहुँचने के पहले वह गरीब नहीं, करोड़पति है। यह महिला भी नहीं जानती थी। पुलिस के पहुँचने पर जब खुदाई शुरू हुई जमीन में दो बड़े बैग गड़े थे। उनको खोला गया तो, महिला के साथ पुलिस की भी आँखे फटी रह गई। बैग से नोटों की गड्डियां निकलती जा रही थी और नोटों का ढेर लग गया। उनको इकठ्ठा करके जब गिना गया पूरी रकम एक करोड़ पैंतीस लाख रुपए निकली।

पहले बरामद हुए थे 10 करोड़, गिनने में लग गए थे दो दिन

पहले बरामद हुए थे 10 करोड़, गिनने में लग गए थे दो दिन

इससे पहले जब पुलिस ने डबल मनी करने वाली गैंग का भंडाफोड़ किया था, तो गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर दो अलग-अलग जगहों से दस करोड़ रुपए बरामद किए थे। इतना कैश गिनने में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और पुलिस कर्मियों के पसीने छूट गए थे। नोटों की गड्डियों के साथ रकम इतनी थी, कि नोट गिनने की मशीनों ने तक जबाब दे दिया था। कार्रवाई न रुके इसके लिए आसपास के जिलों से तक नोट गिनने की मशीन बुलाना पड़ी थी।

पुलिस के शिकंजे में अब महिला

पुलिस के शिकंजे में अब महिला

गरीब महिला निशाबाई को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। केंद्र सरकार से मिली चिट्ठी और शक के आधार पर गहराई से इन्वेस्टिगेशन जारी है। उस सच्चाई का आगे भी पता लगाया जाएगा कि डबल मनी गैंग क्या वाकई नक्सलियों के लिए फंडिग का काम कर रही थी या नहीं? बालाघाट एसपी सौरभ सुमन का मानना है कि एमपी में इस तरह का यह अनोखा मामला है, जब गिरफ्तार हुए 11 आरोपियों के बाद इतनी बड़ी रकम इस तरह से छिपी हुई मिली। पुलिस उम्मीद जता रही है कि आगे इस मामले में और भी कई बड़े खुलासे हो सकते है।

नक्सली होने के सबूत न मिलने पर मिली जमानत

नक्सली होने के सबूत न मिलने पर मिली जमानत

एक तरफ जहाँ निशाबाई के घर से जमीन में गड़ी रकम मिली तो उसके अगले दिन ही ठगी के मामले में गिरफ्तार 9 आरोपियों को मप्र हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। आरोपियों की जमानत याचिका पर सरकार की ओर से अब तक की जांच में जो रिपोर्ट पेश की गई, उसमें बताया गया कि आरोपियों के नक्सली होने के कोई सबूत उनके पास नहीं है। साथ ही मामले की चार्जशीट भी पेश कर दी गई। इस मामले में मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकरायने समेत सह आरोपी प्रदीप कंकरायने,तामेश मंसूर,राकेश मंसूर,दूसरे आरोपी हेमराज आमाडारे सह आरोपी मनोज सोनेकर,ललित कुमार,रामचंद्र कालबेले,राहुल बापुरे को जमानत मिली है।

क्या ठगी का जंक्शन बना एमपी का बालाघाट?

क्या ठगी का जंक्शन बना एमपी का बालाघाट?

जून 2021 में एमपी के बालाघाट में ही 20 करोड़ रुपए के फ्रॉड का भंडाफोड़ हुआ था। उस वक्त पकडे गए बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क के तार देश के 18 राज्यों से जुड़े होना पाए गए थे। मनी लॉन्ड्रिग, फर्जी कॉल के जरिये बैंक खाते से पैसे गायब करना और नामी ऑनलाइन कमर्शियल कंपनियों से मोबाइल मंगाकर करोड़ों रुपए की धांधली की गई थी। इस साइबर क्राइम में पुलिस ने उस वक्त 300 से ज्यादा मोबाइल हैंडसेट, लाखों की नकदी और 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जिसमें दो आरोपी बालाघाट के शामिल थे।

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