MP News: कांग्रेस ने मोहन यादव सरकार पर कर्ज लेने को लेकर बोला हमला: कमलनाथ और जीतू पटवारी का बयान
MP Politics News: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 6,000 करोड़ रुपए के नए कर्ज लेने के निर्णय पर कांग्रेस ने तगड़ा हमला बोला है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के आयोजन से ठीक पहले राज्य सरकार का कर्ज लेने का यह फैसला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस पर गहरी चिंता जताई और आरोप लगाया कि राज्य सरकार लगातार कर्ज लेकर प्रदेश को आर्थिक संकट की ओर धकेल रही है।

कमलनाथ ने कहा: "कर्ज के दलदल में डूबता मध्य प्रदेश"
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि, "मध्य प्रदेश दिन पर दिन कर्ज के दलदल में डूबता जा रहा है। प्रदेश के ऊपर अब तक 4.10 लाख करोड़ रुपए का कर्ज हो चुका है और अब खबर आ रही है कि सरकार 18 फरवरी को 6,000 करोड़ रुपए का कर्ज और लेने वाली है।" कमलनाथ ने इस मुद्दे पर अपनी गहरी चिंता जताते हुए आगे कहा, "भाेपाल में हो रहे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के प्रचार-प्रसार के बीच, कर्ज लेने का यह नया कदम प्रदेश के वित्तीय संकट को और बढ़ा देगा।"
उन्होंने प्रदेश सरकार की कर्ज नीति को लेकर तीखा हमला करते हुए कहा, "भाेपाल में कर्ज लेकर प्रचार-प्रसार करने के बजाय, सरकार को अपनी खर्चीली योजनाओं और इवेंटबाजी पर रोक लगानी चाहिए।" इसके साथ ही उन्होंने कर्ज के बदले पब्लिक प्रॉपर्टी बेचने या लीज़ पर देने के सरकार के प्रयासों की भी आलोचना की और इसे प्रदेश के भविष्य के लिए खतरनाक बताया।
जीतू पटवारी ने कहा: "कर्ज से नहीं, झूठे प्रचार से नहीं मिलेगा निवेश"
वहीं, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, "यह महज एक झूठा प्रचार है। राज्य सरकार पहले ही भारी कर्ज में डूबी हुई है, और इस कर्ज के बोझ को और बढ़ाना प्रदेश के लिए हानिकारक साबित होगा।" जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार मध्य प्रदेश की जनता को निवेश के नाम पर गुमराह कर रही है, जबकि वास्तव में प्रदेश की स्थिति और ज्यादा खराब हो रही है।
समाजिक कुप्रबंधन का आरोप
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इवेंटबाजी और फिजूलखर्ची में कोई कमी नहीं कर रही है, जबकि राज्य की आर्थिक स्थिति पहले से ही नाजुक है। उन्होंने कहा, "प्रदेश की जनता इस आर्थिक कुप्रबंधन के लिए सरकार को कभी माफ नहीं करेगी।" कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस तरह के कर्ज का लगातार लिया जाना राज्य की विकास की गति को धीमा कर सकता है, और इससे सामाजिक और आर्थिक असंतुलन पैदा हो सकता है।
निवेश के नाम पर कर्ज का ढोंग
कमलनाथ और पटवारी दोनों ने मिलकर आरोप लगाया कि निवेश और विकास के नाम पर कर्ज की यह नीति केवल एक ढोंग है। उनके अनुसार, सरकार द्वारा उठाए गए इस कर्ज के पीछे कोई ठोस नीति या योजना नहीं है, बल्कि यह केवल निवेशकों को आकर्षित करने के लिए दिखावा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्ज के इस बढ़ते बोझ के बावजूद सरकार राज्य में कोई ठोस विकास कार्य नहीं कर रही है।
आने वाले समय में वित्तीय संकट का खतरा
कमलनाथ ने आगे कहा, "प्रदेश सरकार की कर्ज लेने की इस नीति से राज्य बड़े राजकोषीय संकट की ओर बढ़ रहा है।" उनका कहना है कि कर्ज का यह बढ़ता बोझ अंततः प्रदेश के विकास और प्रशासनिक कार्यों पर भारी पड़ेगा। साथ ही, उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से जवाब भी मांगा और पूछा कि क्या सरकार का इरादा केवल निवेश की बातों में ही फंस कर प्रदेश की वित्तीय सेहत को नुकसान पहुंचाना है?
इस बीच, यह घटनाक्रम राज्य के कर्ज और वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाता है और यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। आने वाले दिनों में यह सवाल और भी तीव्र हो सकता है कि क्या प्रदेश सरकार का यह कर्ज बढ़ाने का कदम प्रदेश की जनता के लिए फायदेमंद साबित होगा या नहीं।
प्रदेश की आर्थिक स्थिति और कुप्रबंधन पर कमलनाथ का हमला
कमलनाथ ने कहा, "अगर प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को सही दिशा में चलाया जाए तो निश्चित रूप से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। बेरोजगारी की समस्या का समाधान किया जाए और उद्योग-व्यापार को सकारात्मक माहौल दिया जाए, तो प्रदेश की आर्थिक गतिविधि में वृद्धि हो सकती है।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि, "प्रदेश की खराब कानून व्यवस्था और सरकार की नीतियों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है।" कमलनाथ ने यह भी कहा, "सबसे दुख की बात यह है कि लगातार कर्ज लेने के बावजूद मध्य प्रदेश सरकार इवेंट बाजी और फिजूलखर्ची में कोई कमी नहीं कर रही है। प्रदेश की जनता इस आर्थिक कुप्रबंधन के लिए इन्हें कभी माफ नहीं करेगी।"
पटवारी का आरोप: "कर्जदार प्रदेश को और कर्जदार बनाने का प्रयास"
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सरकार के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। पटवारी ने एक्स पर लिखते हुए कहा, "जैसा कि उम्मीद थी, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से ठीक पहले डॉ. मोहन यादव सरकार एक बार फिर 6000 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने जा रही है। झूठे निवेश के प्रचार के लिए की जा रही यह मशक्कत न केवल एमपी बीजेपी के झूठ को बेनकाब करेगी, बल्कि कर्जदार प्रदेश को और ज्यादा कर्जदार बना देगी।"
पटवारी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार "झूठे प्रचार और निवेश के नाम पर प्रदेश को और कर्ज में डुबोने का काम कर रही है।"
प्रदेश का बढ़ता कर्ज और वित्तीय संकट
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, सरकार का यह कदम प्रदेश की आर्थिक स्थिति को और गंभीर बना सकता है। कमलनाथ ने कर्ज के बढ़ते बोझ को लेकर चिंता जताते हुए कहा, "प्रदेश सरकार की कर्ज लेने की नीति से राज्य अब बड़े राजकोषीय संकट की ओर बढ़ रहा है।" उनका मानना है कि कर्ज की नीति और वित्तीय अनुशासन की कमी प्रदेश की भविष्यवाणी के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट पर कांग्रेस का तंज
कांग्रेस ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को लेकर भी सरकार के झूठे प्रचार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि समिट का आयोजन तो निवेश को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है, लेकिन राज्य सरकार की आर्थिक नीतियां और कर्ज की बढ़ती लकीर इससे प्रदेश को सिर्फ और ज्यादा कर्जदार बना सकती हैं।












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