MP News: दमोह में अंडे का ठेला लगाने वाले युवक को कैसे मिला 6 करोड़ का GST नोटिस, जानिए हैरान करने वाली कहानी
MP Damoh News: मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक युवक की जिंदगी उस समय पूरी तरह बदल गई, जब उसे 6 करोड़ रुपये के जीएसटी बकाया का नोटिस प्राप्त हुआ। यह नोटिस उसे एक ऐसे समय में मिला जब वह अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी में व्यस्त था, अंडे का ठेला लगाकर अपने परिवार का पेट पाल रहा था।
दमोह के पथरिया क्षेत्र में रहने वाले प्रिंस सुमन के लिए यह नोटिस एक बड़े झटके से कम नहीं था। जीएसटी विभाग ने उसे दिल्ली में रजिस्टर्ड एक कंपनी का मालिक बताकर 50 करोड़ रुपये के कारोबार पर 6 करोड़ रुपये का बकाया जीएसटी जमा करने का आदेश दिया। लेकिन प्रिंस का कहना है कि न तो उसने कभी दिल्ली का रुख किया और न ही उसने कभी किसी बड़ी कंपनी के संचालन में हिस्सा लिया। ऐसे में उसके नाम पर इतनी बड़ी कंपनी का कैसे रजिस्ट्रेशन हो गया?

अंडे का ठेला और 6 करोड़ का नोटिस: अजनबी मामला
प्रिंस सुमन, जो दमोह के पथरिया के वार्ड नंबर 14 में अपने परिवार के साथ रहता है, हर दिन अंडे का ठेला लगाकर अपने घर का खर्च चलाता है। उसके पिता श्रीधर सुमन एक छोटी किराना दुकान चलाते हैं। प्रिंस का जीवन बहुत साधारण था। लेकिन 18 मार्च 2025 को उसके घर एक रजिस्टर्ड डाक आई, जिसने उसकी पूरी दुनिया पलट दी। डाक में जो वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग का नोटिस था, वह प्रिंस के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं था।
इस नोटिस में उसे दिल्ली के स्टेट जोन 3 (वार्ड 33) में एक कंपनी रजिस्टर्ड करने का आरोप लगाया गया था, जिसे "प्रिंस इंटरप्राइजेज" नाम दिया गया था। बताया गया था कि इस कंपनी ने 2022-23 में 50 करोड़ रुपये का कारोबार किया, और जीएसटी का भुगतान नहीं किया है।
प्रिंस ने हैरान होकर कहा, "मैंने तो कभी दिल्ली का रुख ही नहीं किया। मैंने 2023 में इंदौर में कुछ वक्त मजदूरी की थी, लेकिन तब भी मैंने अपने पैन कार्ड और आधार कार्ड किसी को नहीं दिया। मैं तो पथरिया में अंडे का ठेला लगाकर परिवार का पालन-पोषण करता हूं। हमारे पास 50 करोड़ रुपये का कारोबार करने का तो सवाल ही नहीं है।" इस तरह की बात सुनकर उसका परिवार भी आश्चर्यचकित है। प्रिंस के पिता श्रीधर सुमन ने कहा, "हम तो मेहनत-मजदूरी करके बच्चों का पेट पालते हैं, लेकिन हमें समझ में नहीं आ रहा कि हमारे नाम पर यह फ्रॉड कैसे हुआ। अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो हम आत्महत्या करने के बारे में भी सोच सकते हैं।"
नोटिस असली, लेकिन धोखाधड़ी पक्की
नोटिस को लेकर प्रिंस ने तुरंत स्थानीय वकील अभिलाष खरे से संपर्क किया, जिन्होंने इसकी जांच की। वकील ने बताया कि यह नोटिस असली है, लेकिन यह साफ है कि प्रिंस के दस्तावेजों का दुरुपयोग करके किसी ने दिल्ली में फर्जी कंपनी रजिस्टर करवा दी है। अभिलाष खरे ने कहा, "यह मामला एक सुसंगत धोखाधड़ी का प्रतीक है, और हमने आयकर विभाग को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है। पुलिस को भी शिकायत भेजी है। इस मामले की गहरी जांच होनी चाहिए।"
आयकर विभाग और पुलिस से मदद की गुहार
इस अजीब घटना के बाद प्रिंस और उसके परिवार ने आयकर विभाग और दमोह के पुलिस अधीक्षक से मदद की गुहार लगाई है। प्रिंस ने बताया, "हमने आयकर विभाग और पुलिस एसपी को आवेदन दिया है और अनुरोध किया है कि इस मामले की जल्द से जल्द जांच की जाए। हमें उम्मीद है कि हमें न्याय मिलेगा, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।" परिवार के सदस्य लगातार अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि अगर जल्द समाधान नहीं मिला, तो वे किस दिशा में जाएंगे।
सोशल मीडिया पर चर्चा: सिस्टम की खामियां उजागर
प्रिंस के मामले ने सोशल मीडिया पर भी जोरदार बहस छेड़ी है। कई लोग इस घटना पर हैरान हैं और सिस्टम की खामियों पर सवाल उठा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "यह सिस्टम की नाकामी है। एक गरीब युवक जो अंडे का ठेला लगाता है, कैसे 50 करोड़ की कंपनी चला सकता है? यह साफ धोखाधड़ी है।" एक अन्य यूजर ने कहा, "प्रिंस जैसे लोगों के दस्तावेज चुराकर बड़े फ्रॉड हो रहे हैं, सरकार को इस मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए।"
पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब किसी गरीब व्यक्ति के नाम पर फर्जी कंपनी बनाकर करोड़ों का फ्रॉड किया गया है। इससे पहले 2022 में बिहार के रोहतास जिले में एक मजदूर मनोज यादव को 14 करोड़ रुपये का आयकर नोटिस मिला था। जाँच में यह सामने आया कि साइबर अपराधियों ने उसके पैन कार्ड और आधार कार्ड का दुरुपयोग करके फर्जी खाता खोला था। 2021 में उत्तर प्रदेश के मथुरा में भी एक रिक्शा चालक को 3 करोड़ रुपये का आयकर नोटिस मिला था, जिसमें उसके नाम पर 43 करोड़ रुपये का कारोबार दिखाया गया था। इन मामलों से यह साफ हो गया है कि साइबर अपराधी गरीब लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करके बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी कर रहे हैं।
क्या सिस्टम की खामियां दूर होंगी?
यह मामला कई सवाल खड़े करता है। पहला सवाल यह कि प्रिंस जैसे साधारण व्यक्ति के नाम पर दिल्ली में फर्जी कंपनी कैसे रजिस्टर्ड हो गई? दूसरा सवाल यह कि जीएसटी और आयकर विभाग ने बिना जाँच के इतने बड़े कारोबार को कैसे मंजूरी दे दी? और तीसरा सवाल यह कि इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सिस्टम में क्या सुधार किए जा रहे हैं?
क्या प्रिंस को मिलेगा न्याय?
यह घटना न सिर्फ प्रिंस के जीवन की त्रासदी को बयान करती है, बल्कि यह सिस्टम की खामियों को भी उजागर करती है। अब यह देखना होगा कि आयकर विभाग और पुलिस इस मामले की गहराई से जांच करते हैं और प्रिंस को इस मुसीबत से बाहर निकालने के लिए क्या कदम उठाते हैं। प्रिंस और उसके परिवार की उम्मीदें इस वक्त न्याय की ओर हैं, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या सिस्टम इस तरह के मामलों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा।












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