UP Nikay Chunav: क्या समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए BSP ने खेला ये बड़ा दांव?
बसपा की चीफ मायावती के मुस्लिम कार्ड के पीछे सोची समझी रणनीति काम कर रही है। बसपा ने मुस्लिम कार्ड के तहत जिन उम्मीदवारों को टिकट दिया है उनमें अधिकांश ऐसे शामिल हैं जो हाल ही में सपा छोड़कर बसपा में आए हैं।

BSP Chief Mayawati: उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि बसपा की चीफ मायावती ने दस सीटों के लिए मेयर की जो लिस्ट जारी की है कि उसमें अधिकांश नाम ऐसे हैं जो हाल ही में सपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए हैं। मायावती अभी तक आठ सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार का ऐलान कर चुकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो सपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए इन चेहरों के सहारे बीएसपी जीत की कवायद में जुटी है। बसपा की कोशिश सपा के नेताओं को अपने पाले में लाकर उनके वोट बैंक को बसपा के साथ जोड़ने की है।
बसपा के ज्यादातर दावेदारों का सपा से कनेक्शन
दरअसल, अलीगढ़ में बसपा के मेयर पद के दावेदार सलमान शाहिद ने पिछले दिनों सपा छोड़ दी थी और बसपा में शामिल होने के दिन ही उन्हें उम्मीदवार घोषित किया गया था। बसपा ने मुस्लिम वोटों को सपा से वापस अपनी ओर मोड़ने की सोची-समझी रणनीति पर चलते हुए शाहिद को अपने पाले में ले लिया और उन्हें पार्टी में शामिल होने का इनाम भी दिया। हालांकि सपा ने अलीगढ़ में दो बार के विधायक हाजी ज़मीर उल्लाह खान को अपना मेयर उम्मीदवार घोषित किया है।
मुस्लिम वोटों को समेटने के लिए बसपा की रणनीति
बसपा के उम्मीदवार की वजह से इस सीट पर मुस्लिम वोटों का विभाजन होगा, जिससे अखिलेश यादव की पार्टी की संभावनाएं कमजोर होंगी। बसपा ने 2017 में हुए पिछले शहरी स्थानीय निकाय चुनाव में अलीगढ़ मेयर सीट पर जीत हासिल की थी। मोहम्मद फुरकान पार्टी के उम्मीदवार थे। 1995 के बाद से अलीगढ़ में पिछले पांच स्थानीय चुनावों में, बसपा एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने 2017 में बीजेपी की जीत के रथ को रोकने में कामयाबी हासिल की है।
प्रयागराज और फिरोजाबाद के उम्मीदवारों का भी सपा से टच
बीएसपी ने मेयर चुनाव के पहले चरण के लिए जिन दो मुस्लिम उम्मीदवारों की घोषणा की है उनमें प्रयागराज से सईद अहमद और फिरोजाबाद से रुखसाना बेगम का नाम शामिल है। इन दोनों उम्मीदवारों का भी समाजवादी पार्टी से अच्छा कनेक्शन रहा है। सईद फूलपुर से सपा के पूर्व विधायक हैं जो हाल ही में बसपा में शामिल हुए हैं और रुखसाना सपा के पूर्व नेता महबूब अजीज की पत्नी हैं जो हाल ही में बसपा में शामिल हुए थे। इसी तरह, पार्टी के सहारनपुर मेयर पद के उम्मीदवार खदीजा मसूद इमरान मसूद के परिवार से हैं, जिन्होंने पिछले साल अक्टूबर में सपा छोड़ दी थी और बसपा में शामिल हो गए थे।
चुनावी मैदान में आने की बजाए पर्दे के पीछे रहेंगी मायावती
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती यूपी में मई में होने वाले शहरी स्थानीय निकाय (ULB) के चुनावों में अपनी पार्टी के लिए प्रचार करने की बजाए पर्दे के पीछे से अपने नेताओं और कैडर में जेाश भरने का काम करेंगी। इसीलिए प्रचार की जिम्मेदारी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल और हर मंडल में पार्टी के समन्वयकों के साथ-साथ जिलाध्यक्षों और आगे नीचे सेक्टर समन्वयकों को सौंपी गई है। विश्वनाथ पाल के उपर पार्टी को निकाय चुनाव में जीत दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी है।
पिछले निकाय चुनाव में भी मायावती ने नहीं किया था प्रचार
मायावती ने 2017 के यूएलबी चुनावों के लिए भी प्रचार नहीं किया था। हालांकि तब बसपा 22 साल के अंतराल के बाद 2017 का चुनाव अपने पार्टी सिंबल पर लड़ रही थी। बसपा पिछले साल जून की शुरुआत में ही यूपी यूएलबी चुनावों की तैयारी कर रही थी। इसको लेकर पार्टी ने संभावित उम्मीदवारों को स्कैन करना शुरू किया और स्थानीय स्तर पर अपना आधार बढ़ाने के लिए सदस्यता अभियान शुरू किया था। इस अभियान का कितना फायदा पार्टी को मिलेगा यह देखना भी दिलचस्प होगा।












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