पत्नी ने जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे पति को दिलवाई 15 दिन की पैरोल, बोली-'बच्चा पैदा करना है'
जोधपुर, 8 अप्रैल। उम्रकैद की सजा काट कर एक कैदी को उसकी पत्नी संतान उत्पत्ति के लिए 15 दिन की पैरोल दिलवाई है। कैदी अभी अजमेर जेल में बंद है। उसकी पत्नी ने अजमेर जिला कलेक्टर को अर्जी देकर बताया कि वह चाहती है कि संतान उत्पत्ति के लिए उसके पति को 15 दिन की पैरोल दी जाए। इस अर्जी पर कलेक्टर ने कोई जवाब नहीं दिया तो महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जोधपुर स्थित राजस्थान होईकोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता व फरजंद अली की खंडपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए 15 दिन की पैरोल मंजूर कर दी।

6 फरवरी 19 को उम्रकैद की सजा से दंडित किया था
बता दें कि रबारियों की ढाणी भीलवाड़ा का 34 वर्षीय नंदलाल को एडीजे कोर्ट ने भीलवाड़ा ने 6 फरवरी 19 को उम्रकैद की सजा से दंडित किया था, तब से वह अजमेर की जेल में बंद है। 18 मई 2021 को उसे 20 दिन की पैरोल मिली थी। वह निर्धारित तिथि को लौट आया था।

अजमेर कलेक्टर पैरोल कमेटी के चेयरमैन
उसकी पत्नी ने अजमेर कलेक्टर, जो कि पैरोल कमेटी के चेयरमैन भी हैं, उन्हें अर्जी दी। उसे शादी से कोई दिक्कत नहीं हैं, लेकिन उसके कोई संतान नहीं है। इसलिए संतान उत्पत्ति के लिए उसके पति को 15 दिन की पैरोले दी जाए। अजमेर जिला कलेक्टर ने अर्जी पर कोई कार्रवाई नहीं की तो नंदलाल की पत्नी होईकोर्ट पहुंच गई और यही गुहार लगाई।

न्यायिक घोषणाओं के माध्यम से मान्यता दी गई
कोर्ट ने दोनों पक्ष सुनने के बाद कहा कि यह विवादित नहीं है कि कैदी की शादी प्रार्थी के साथ हुई है। वंश के संरक्षण के उददेश्य से संतान होने को धार्मिक दर्शन, भारतीय संस्कृति और विभिन्न न्यायिक घोषणाओं के माध्यम से मान्यता दी गई है।

16 संस्कारों में से पहला
कोर्ट ने कहा कि अगर हम मामले को धार्मिक पहलू से देखें तो हिंदू दर्शन के अनुसार गर्भधान यानी गर्भ का धन प्राप्त करना 16 संस्कारों में से पहला है।












Click it and Unblock the Notifications