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Jharkhand Election 2024: यशवंत सिन्हा की नई 'अटल' पार्टी और बगावत का रास्ता, कैसे BJP की बढ़ाएगा मुश्किलें?

Jharkhand Assembly Elections 2024: झारखंड में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। यशवंत सिन्हा ने 'अटल विचार मंच' (Atal Vichar Manch) नाम से एक नई राजनीतिक पार्टी बनाई है। उनकी पार्टी अब विधानसभा चुनाव में जोर-शोर से हिस्सा लेने की तैयारी में है।

यशवंत सिन्हा ने यह भी साफ कर दिया है कि वह खुद झारखंड विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा, जो अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी थे, ने अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाकर झारखंड चुनाव में भाडपा के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी करेंगे। यशवंत सिन्हा ने घोषणा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी आगामी राज्य विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

Jharkhand Assembly Elections 2024

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यशवंत सिन्हा ने कहा कि उनकी पार्टी स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की विचारधाराओं का पालन करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की विचारधाराओं से भटक गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल उठता है कि आखिर यशवंत सिन्हा की इस नई पार्टी से आने वाले चुनाव में भाजपा को कितना नुकसान पहुंचेगा?

भाजपा वो पार्टी नहीं है, जो पहले थी: यशवंत सिन्हा

राजनीतिक पार्टी 'अटल विचार मंच' की शुरुआत झारखंड के हजारीबाग में 15 सितंबर 2024 को की गई। अगस्त में हजारीबाग के अटल सेवा केंद्र में एक बैठक के दौरान नई पार्टी बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई थी। यशवंक सिन्हा ने कहा कि चूंकि यह एक राजनीतिक दल है, इसलिए यह स्पष्ट है कि अटल विचार मंच सभी चुनाव लड़ेगा।

यशवंत सिन्हा ने कहा, ''अटल विचार मंच (पूर्व प्रधानमंत्री) अटल बिहारी वाजपेयी की विचारधाराओं पर आधारित एक राजनीतिक पार्टी है जिसकी आज देश को जरूरत है। चूंकि यह एक राजनीतिक पार्टी है, इसलिए यह स्पष्ट है कि हम सभी चुनाव लड़ेंगे।''

यशवंत सिन्हा ने कहा कि जरूरत पड़ने पर समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ गठबंधन किया जा सकता है। भाजपा की आलोचना करते हुए सिन्हा ने कहा कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और अपने पुराने सहयोगियों की अनदेखी कर रही है। भाजपा वो पार्टी नहीं है, जो पहले थी।

यशवंत सिन्हा ने भाजपा पर जन मुद्दों की कमी और चुनाव जीतने के लिए सिर्फ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर निर्भर रहने का आरोप लगाया।

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हिमंता बिस्वा सरमा पर क्यों भड़के यशवंत सिन्हा?

यशवंत सिन्हा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की हालिया टिप्पणियों की आलोचना की है। उन्होंने राज्य सरकार से कार्रवाई करने की भी मांग की है। यशवंत सिन्हा ने कहा कि अटल मंच के सदस्यों को राष्ट्रीयता और अखंडता के लिए अटल के सिद्धांतों को बढ़ावा देना चाहिए।

उन्होंने भाजपा पर चुनावों के लिए वास्तविक सार्वजनिक मुद्दों की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास चुनाव के लिए कोई जन मुद्दा नहीं है। भाजपा जीत हासिल करने के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है।

यशवंत सिन्हा ने झारखंड में भाजपा की रणनीति पर चिंता व्यक्त की और पार्टी पर चुनाव से पहले सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया। उनका मानना ​​है कि ऐसी रणनीतियां सामाजिक शांति और एकता के लिए हानिकारक हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा वास्तविक सार्वजनिक चिंताओं को संबोधित करने की तुलना में चुनावी लाभ पर अधिक ध्यान केंद्रित करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा झारखंड में चुनाव से पहले राज्य का सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने में लगी है।

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यशवंत सिन्हा ने कहा- वर्तमान की भाजपा की विचारधारा वाजपेयी वाली नहीं

यशवंत सिन्हा ने मौजूदा भाजपा विचारधारा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धांतों से अलग है। यशवंत सिन्हा ने कहा कि अभी की भाजपा की विचारधार अटल वाजपेयी से मेल नहीं खाता है। जैसे कांग्रेस ने महात्मा गांधी को भुला दिया है उसी तरह भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी को भुला दिया है।

यशवंत सिन्हा ने बताया मोदी और अटल में क्या अंतर है?

यशवंत सिन्हा ने कहा कि सिर्फ वाजपेयी को भारत रत्न देने से उनकी विरासत के प्रति वास्तविक सम्मान नहीं हो जाता। हाल ही में जमशेदपुर में दिए गए भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस, आरजेडी और जेएमएम को झारखंड का "दुश्मन" बताया।

यशवंत सिन्हा पीएम मोदी के शब्दों के इस चयन की आलोचना करते हुए कहा कि पीएम मोदी दुश्मन की जगह प्रतिद्वंदी शब्द का इस्तेमाल कर सकते थे। इस तरह के शब्दों का चयन लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। टल जी ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी के लिए दुश्मन शब्द का इस्तेमाल कभी नहीं किया था। यही अटल जी और नरेंद्र मोदी में अंतर है।

यशवंत सिन्हा भाजपा के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

यशवंत सिन्हा झारखंड में भाजपा के लिए एक चुनौती बन सकते हैं। उनके राजनीतिक अनुभव और प्रभाव को देखते हुए कहा जा रहा है कि वह चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़े कर सकते हैं। यशवंत सिन्हा का राजनीतिक करियर दशकों पुराना है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिससे उनकी राजनीतिक समझ और प्रभाव काफी मजबूत है। उनके अनुभव का लाभ विपक्षी दल उठा सकते हैं, जिससे भाजपा को झारखंड में नुकसान हो सकता है।

यशवंत सिन्हा की छवि एक सुलझे हुए नेता की है, जो जनता के मुद्दों को समझते हैं। उनका झारखंड में प्रभावी होना भाजपा के लिए चिंता का विषय हो सकता है। यशवंत सिन्हा की उपस्थिति विपक्षी दलों के लिए एक सुनहरा अवसर हो सकती है। उनके साथ जुड़कर विपक्षी दल अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं। इससे भाजपा को झारखंड में अपनी पकड़ बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है।

झारखंड की राजनीति में यशवंत सिन्हा का योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है। उनकी रणनीतियों और विचारारा से विपक्षी दलों को मजबूती मिल सकती है, भाजपा को नुकसान पहुंच सकता है।

अटल विचार मंच ने 2,000 नए सदस्यों का स्वागत भी किया। इस कार्यक्रम में अटल मंच के लिए सदस्यता अभियान की शुरुआत भी की गई। इस अवसर पर यशवंत सिन्हा व्यक्तिगत रूप से सदस्य के रूप में शामिल हुए। अभियान के समन्वयक ने बताया कि पहले दिन लगभग दो हजार लोग इसमें शामिल हुए, जिससे सदस्यों की संख्या में तेजी से वृद्धि होने की उम्मीद है।

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