Jharkhand Chunav 2024: मतदान के अलग-अलग समय पर JMM ने जताई आपत्ति, चुनाव आयोग को पत्र लिख की ये मांग
Jharkhand Election 2024: झारखंड विधानसभा चुनावों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर वोटिंग का समय अलग-अलग रखने को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने आपत्ति जताई है। जेएमएम के महासचिव विनोद पांडेय ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग को पत्र लिखा है।
पत्र में कहा गया है कि जारी अधिसूचना के मुताबिक 19-कोडरमा, 20-बरकट्टर 21-बरही 53 मझगांव, 67-सिसई और 81-भवनाथपुर को छोड़कर सभी 76 विधानसभा क्षेत्रों में शहरी मतदान केंद्रों पर मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर सुबह 07.00 बजे से शाम 04:00 बजे तक का समय रखा गया है।

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ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं को मतदान का समय कम मिला: JMM
पत्र में कहा गया है कि इस तरह ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं को मतदान का समय कम आवंटित किया गया है जो चुनाव आयोग द्वारा सबको समान अवसर प्रदान किए जाने के सिद्धांत के प्रतिकूल है। जो वोटर के साथ भेदभाव है।
पत्र में आगे कहा गया है कि पूर्व में राज्य के नक्सल प्रभावित होने के कारण 5-6 चरणों में चुनाव होते थे। लेकिन अब झारखंड को नक्सल मुक्त मानते हुए 02 चरणों में चुनाव हो रहे हैं, तब एक ही विधानसभा क्षेत्र में शहरी/कस्बों के मतदाताओं को सुबह 07.00 बजे शाम से 05.00 बजे तक मतदान का समय तथा ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं को सुबह 07.00 बजे से शाम 05.00 बजे तक का समय देना ग्रामीण मतदाताओं को मताधिकार के समान अवसर से वश्चित करना होगा।
पत्र में लिखा गया है कि शहरी क्षेत्र में छोटी परिधि में ज्यादा लोग वास करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में आवास बिखरे होते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में एक बूथ का निर्माण औसतन 7-8 टोलो/बस्तियों को मिलाकर होता है। ग्रामीण क्षेत्र में आवागमन के समुचित साधन भी उपलब्ध नहीं है। इन परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्र में मतदान का ज्यादा समय उपलब्ध करवाने के विपरित कम समय उपलब्ध करवाना अनुचित प्रतीत होता है।
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समान अवसर नहीं मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में वोटिंग कम होगी
पत्र के आखिर में लिखा गया है,''चुनाव में शहरी/ कस्बा और ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं को समान अवसर नहीं मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में मत का प्रतिशत गिरेगा। झारखंड मुक्ति मोर्चा गांव/गरीब का प्रतिनिधत्व करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बसने वाले मतदाताओं पर इस कदम का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान का प्रतिशत कम हो जायेगा। इससे निश्चित रूप से जिस पार्टी के समर्थक ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं उसको नुकसान उठाना पड़ेगा।''
पत्र के अंत में लिखा गया, ''चुनाव आयोग हमेशा से सबको समान अवसर देने की प्रतिबद्धता को दोहराता है तथा मतदान प्रतिशत बढ़ाने का भी हर संभव प्रयास करता है। लेकिन उक्त निर्णय से मतदाताओं को न तो समान अवसर मिलेगा न ही इस कदम से मतदान का प्रतिशत बढ़ेगा। इसलिए मेरी पार्टी आपसे अनुरोध करती है कि मतदान के समय के अंतर को समाप्त किया जाय ताकि ग्रामीण एवं शहरी मतदाताओं को समान अवसर मिल सके और उनके संवैधानिक अधिकार की रक्षा भी हो सके।''












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