Malviya Nagar Fire: 'आग में 21 लोगों को जलते देख रहा था, डर के मारे भागा', होटल मालिक लवकेश बजाज का कबूलनामा
Delhi Malviya Nagar Fire: दिल्ली के मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में 3 जून 2026 की सुबह एक भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को गमगीन कर दिया। फ्लोरिश स्टे बेड एंड ब्रेकफास्ट (Flourish Stay B&B) में लगी आग ने मात्र कुछ घंटों में 21 निर्दोष लोगों की जान ले ली। इनमें 12-18 विदेशी नागरिक शामिल थे, जबकि कई भारतीय परिवार भी इस हादसे की चपेट में आए। एक ही परिवार के आठ सदस्यों की मौत इस त्रासदी को और भी दिल दहला देने वाली बना रही है।
यह सिर्फ एक आग का हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही, अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने और प्रशासनिक नाकामी की कहानी है। होटल मालिक लवकेश बजाज (Lavkesh Bajaj) का कबूलनामा और घटनास्थल से भागने का खुलासा इस पूरे प्रकरण को और भी खौफनाक बनाता है।

Delhi Malviya Nagar Fire Lavkesh Bajaj Confession: 'आग में लोगों को जलते देखा, डर के मारे भाग गया'
पुलिस पूछताछ में लवकेश बजाज ने चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि जब 6 मंजिला इमारत में आग की लपटें उठ रही थीं और लोग बचने की कोशिश कर रहे थे, तब वह घटनास्थल से गाड़ी लेकर निकल गए। बजाज ने बताया कि वह डर के मारे भाग गए और न तो मदद की कोशिश की, न ही दमकल विभाग को तुरंत सूचना दी।
घटना के कुछ घंटों बाद पुलिस ने उन्हें सकेत से गिरफ्तार कर लिया। आज (4 जून) उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस 5 दिन की रिमांड की मांग करेगी। पुलिस उनके सभी दावों की जांच कर रही है।
बजाज ने 2022 में इस इमारत को अहलूवालिया परिवार से खरीदा था। उस समय यहां खादी की दुकान चलती थी और इमारत पहले से जर्जर हालत में थी। उन्होंने बीएनबी योजना के तहत लाइसेंस लिया, लेकिन नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं।
अवैध संचालन और सुरक्षा चूकें
- कमरों की संख्या: योजना के तहत सिर्फ 6 डबल बेड वाले कमरे की अनुमति थी, लेकिन होटल में 25 कमरे चलाए जा रहे थे, जिनमें तहखाने के कमरे भी शामिल थे।
- एग्जिट और वेंटिलेशन: इमारत में सिर्फ एक ही संकीर्ण प्रवेश-निकास रास्ता था। खिड़कियां सील बंद थीं और मुख्य दरवाजा सेंसर से संचालित होता था, जिससे आग लगने पर भागना मुश्किल हो गया।
- फायर सेफ्टी: कोई फायर एनओसी नहीं ली गई थी। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की प्रारंभिक जानकारी है। MCD ने होटल का निरीक्षण किया था, लेकिन स्पष्ट उल्लंघनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- मैनेजमेंट: बजाज अकेले मालिक हैं, लेकिन पूरे प्रबंधन की जिम्मेदारी जय मिश्रा को सौंपी गई थी। सभी लाइसेंस जय मिश्रा के नाम पर थे। पुलिस अब जय मिश्रा की तलाश कर रही है।
इनक्रेडिबल इंडिया बीएंडबी फ्रेमवर्क (2007) के नियमों के मुताबिक मालिक का निवास अनिवार्य था, परिसर पूरी तरह आवासीय होना चाहिए था और अग्नि सुरक्षा, वेंटिलेशन जैसे मानक जरूरी थे। इन सभी का उल्लंघन हुआ।
Delhi Malviya Nagar Fire Timeline: मालवीय नगर अग्निकांड की टाइमलाइन
सुबह करीब 8:30-8:50 बजे तहखाने (बेसमेंट) में आग लगी, जो तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गई। उस समय ज्यादातर मेहमान सो रहे थे या नाश्ता कर रहे थे। 17 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। 58 से ज्यादा लोगों को बचाया गया और मैक्स अस्पताल समेत विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। 21 लोगों को मृत घोषित किया गया।स्थानीय लोगों ने बहादुरी दिखाई। एक गद्दे की दुकान के मालिक आरमान ने गद्दे बिछाकर कूदने वालों को बचाने में मदद की।
पीड़ित कौन थे? एक परिवार की दर्दनाक मौत
इस हादसे में सबसे दिल दहला देने वाली घटना गुरुग्राम के सेक्टर 46 निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल के परिवार की है। वे अपने 80 वर्षीय बीमार पिता राधे श्याम अग्रवाल (मैक्स अस्पताल में भर्ती) से मिलने आए थे।
परिवार में शामिल:
- विवेक अग्रवाल (47)
- पत्नी तरजानी अग्रवाल
- दो बेटियां - जिविशा और वार्या (पर्ल)
- अन्य रिश्तेदार - प्रेमलता, कमला गोयल, झूमरी लाल गोयल, अशोक गोयल आदि।
परिवार ने दो कमरे बुक किए थे। नाश्ते के समय आग लग गई। विवेक के पिता अब परिवार के इकलौते जीवित सदस्य बचे हैं। कुल 9 भारतीय और 12 विदेशी (अफ्रीकी देशों, बांग्लादेश आदि से) मारे गए। कई विदेशी मरीजों के साथ आए थे।
मुआवजों की लहर, मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
- दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता: पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मृतकों के परिवार को 10 लाख रुपये और घायलों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की। सरकार पूर्ण सहयोग का आश्वासन दे रही है।
- उपराज्यपाल: मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये एक्स-ग्रेशिया की घोषणा।
- MCD और प्रशासन: मालवीय नगर में 18 संदिग्ध अवैध प्रॉपर्टी चिन्हित की गई हैं। पूरे इलाके में छापेमारी और कार्रवाई शुरू। बीएंडबी पॉलिसी पर सवाल उठे हैं, कुछ रिपोर्ट्स में इसे स्क्रैप करने की बात भी कही जा रही है।
पिछले सबक क्यों नहीं सीखे गए?
दिल्ली में यह पहला मामला नहीं है। उपहार सिनेमा आग (1997), अन्य होटल और मॉल की घटनाएं याद दिलाती हैं कि सुरक्षा मानकों पर अमल क्यों नहीं होता। घनी आबादी वाले इलाकों में अवैध निर्माण, बिना NOC के कमर्शियल यूज और भ्रष्टाचार की मिलीभगत आम समस्या बनी हुई है।
जांच और आगे की कार्रवाई
पुलिस गैर इरादतन हत्या (culpable homicide not amounting to murder) का केस दर्ज कर जांच कर रही है। फायर NOC, बिल्डिंग मैप, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी, MCD की भूमिका सब जांच के दायरे में हैं। LG और CM स्तर पर उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं। अवैध होटलों पर छापे मारे जा रहे हैं।
जवाबदेही तय हो
मालवीय नगर अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का प्रतीक है। लवकेश बजाज जैसे मालिकों की लापरवाही और प्रशासन की आंख मूंद लेने की नीति ने 21 जिंदगियां छीन लीं। अब जरूरी है सख्त कानूनी कार्रवाई, सभी दोषियों पर सजा और पूरे शहर में बीएंडबी, होटल, गेस्ट हाउस की व्यापक जांच।
पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। घायलों का उचित इलाज और आर्थिक मदद के साथ-साथ भावनात्मक सहारा भी जरूरी है। दिल्ली जैसे महानगर में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए ठोस नीतिगत बदलाव और सख्त निगरानी की मांग की जा रही है।













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