Jarmundi Chunav 2024: जरमुंडी विधानसभा सीट पर इंडी गठबंधन या BJP, किसका पलड़ा भारी, जानें सियासी समीकरण
Jarmundi Vidhan Sabha Chunav 2024: झारखंड के दुमका जिले की जरमुंडी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र एक सामान्य सीट है। जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र न केवल चुनावी दृष्टिकोण से अहम है बल्कि ये सांस्कृतिक महत्व की वजह से भी चर्चाओं में रहता है क्योंकि यहीं बाबा बासुकीनाथ का मंदिर भी पड़ता है।
जरमुंडी सीट पर साल 2000 तक हर बार अपना विधायक बदलता रहता था। लेकिन देवेन्द्र कुंवर, हरिनारायण राय और बादल पत्रलेख इस सीट से लगातार विधायक रह चुके हैं। 2019 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर महागठबंधन (अब इंडी गठबंधन) की ओर से कांग्रेस नेता बादल पत्रलेख ने जीत दर्ज की थी। भाजपा नेता देवेन्द्र कुंवर दूसरे नंबर के नेता थे। आइए जानें इस बार के चुनाव में किसका पलड़ा भारी है?

Jarmundi Assembly Election 2024: जरमुंडी विधानसभा सीट के सियासी समीकरण?
जरमुंडी विधानसभा सीट पर इस बार भाजपा और इंडी गठबंधन में मुकाबला होने की उम्मीद है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने दावा किया है कि मधुपुर और जरमुंडी सीटों पर भी भाजपा जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा है कि जरमुंडी सीट पर इस बार भाजपा की प्रबल जीत होगी। असल में जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से जुड़ा है और गोड्डा में इस बार निशिकांत दुबे लोकसभा चुनावों में भारी जीत दर्ज की है।
गोड्डा लोकसभा चुनाव में जरमुंडी क्षेत्र की जनता ने भाजपा के निशिकांत दुबे को अच्छा-खासा वोट दिया था। निशिकांत दुबे की इलाके में बढ़ती लोकप्रियता ने दो बार लगतार इस सीट पर जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस विधायक बादल पत्रलेख की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
Jarmundi Seat: जरमुंडी विधानसभा सीट पर कौन सी पार्टी किसे देगी टिकट?
सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि लोकसभा चुनाव में जरमुंडी में भाजपा को मिली बढ़त की वजह से इंडी गठबंधन मुश्किल में है। हेमंत सोरेन ने दोबारा सीएम बनने के बाद उन्होंने बादल पत्रलेख को कृषि मंत्री के पद से हटा दिया था। अब ऐसे में कहा जा रहा है कि कांग्रेस और जेएमएम बादल पत्रलेख को टिकट देगी या नहीं, इसपर अभी सवालिया-निशान है।
हालांकि भाजपा ने पिछली बार देवेन्द्र कुंवर को चुनावी मैदान में उतारा था। हालांकि इस बार भाजपा की ओर टिकट के दावेदारों की लंबी लिस्ट है। इस लिस्ट में देवेन्द्र कुंवर, पूर्व राज्यसभा सांसद अभय कांत प्रसाद, भाजपा के प्रदेश सचिव रविकांत मिश्र उर्फ मुन्ना मिश्र, समाजसेवी सीताराम पाठक और जिलाध्यक्ष गौरव कांत प्रसाद समेत कुछ नाम चर्चा में हैं। अब देखने वाली बात ये होगी कि इस बार वो किसे जरमुंडी के रण में उतारेंगे।
जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र में किसका प्रभाव ज्यादा?
जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों के मुताबिक इस इलाके में आदिवासियों की आबादी 20 प्रतिशत है। वहीं मुस्लिम 5 फीसदी, दलित 4 फीसदी, कोयरी 4 और भूमिहार और ब्राह्मण 8-8 फीसदी हैं। वहीं अन्य पिछड़ी जातियों की आबादी लगभग 26 फीसदी है।












Click it and Unblock the Notifications