झारखंड चुनाव: वोटबैंक के लिए कितने खतरनाक मंसूबे पाल रही कांग्रेस? घुसपैठियों के सामने भी गिड़गिड़ाने को तैयार
Jharkhand Chunav 2024: झारखंड विधानसभा चुनावों में इस बार सबसे बड़ा मुद्दा ''घुसपैठियों'' का है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार ''बांग्लादेशी घुसपैठ'' का मुद्दा उठा रही है। भाजपा का कहना है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) वोटबैंक के तौर पर इस्तेमाल करती है।
भाजपा के इस दावे को बल तब मिला जब हाल ही में एक चुनावी रैली में कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने कहा कि वो घुसपैठियों को भी ₹450 में गैस सिलेंडर देंगे। ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस और जेएमएम झारखंड में घुसपैठियों को अपनी वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बना चुकी है?

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गुलाम अहमद मीर के बयान ने इस मुद्दे को और भी स्पष्ट रूप से उजागर किया। मीर ने वादा किया है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो घुसपैठियों को ₹450 में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। इस वादे ने न केवल आदिवासी और स्थानीय समुदायों को चिंता में डाल दिया है, बल्कि राज्य की राजनीति को भी गंभीर सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। लोगों के मन में अब ये सवाल है कि कांग्रेस वोटबैंक के लिए कितने खतरनाक मंसूबे पाल रही है।
कांग्रेस की ये स्थिति सिर्फ झारखंड में ही नहीं बल्कि वोटबैंक के लिए कांग्रेस महाराष्ट्र में भी उलेमा बोर्ड की ब्लैकमेलिंग टैक्टिक्स का खुलेआम समर्थन कर रही है। उलेमा बोर्ड ने कई मांग रखी है, जिसमें 2012 से 2024 तक के दंगाइयों को रिहा करने की भी मांग है और कांग्रेस ने इसपर भी सहमति जताई है।
दूसरी ओर कर्नाटक में सरकारी ठेकों में मुसलमानों के लिए चार फीसदी आरक्षण का मुद्दा भी विवादों में है। रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार मुसलमानों को सरकारी निर्माण (सिविल) ठेकों में आरक्षण देने पर विचार कर रही है।
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कांग्रेस का घुसपैठियों को वोटबैंक बनाना: राजनीति का घटिया खेल
गुलाम अहमद मीर ने चुनावी रैली में कहा, "हमने वादा किया है कि अगर हमारी सरकार बनती है तो हम 1 दिसंबर से 450 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराएंगे। यह आम जनता के लिए होगा...चाहे वे हिंदू हों, मुसलमान हों, घुसपैठिए हों, यह झारखंड के सभी नागरिकों को दिया जाएगा, किसी अन्य कारण पर बिल्कुल भी विचार नहीं किया जाएगा।''
झारखंड में कांग्रेस पार्टी का घुसपैठियों के प्रति इस तरह का रवैया न केवल राज्य के मूल निवासियों के हितों के खिलाफ है, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के भी खिलाफ है। कांग्रेस के नेताओं का यह कदम यह दिखाता है कि उन्हें झारखंड में सत्ता पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, चाहे फिर वोट के लिए उन्हें घुसपैठियों के सामने झुकना ही क्यों ना पड़े या फिर स्थानीय जनता की भावनाओं और अधिकार छीन ही क्यों ना जाए?
झारखंड की आदिवासी और मूल निवासी जनता का अधिकार इस राज्य के संसाधनों पर है और इन संसाधनों का लाभ सबसे पहले उन्हीं को मिलना चाहिए। कांग्रेस द्वारा घुसपैठियों को सहारा देना और उन्हें भेदभावपूर्ण तरीके से लाभ देना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि यह झारखंड के सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाता है। आदिवासी समुदायों की अपनी पहचान और संस्कृति है और ऐसे वादों से उन्हें नुकसान होता है क्योंकि यह गैरकानूनी घुसपैठियों के जरिए उनकी जमीन और संसाधनों पर दबाव डालता है।
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गुलाम अहमद मीर का गैस सिलेंडर का वादा: एक लोक-लुभावन चाल
गुलाम अहमद मीर का यह वादा कि घुसपैठियों को ₹450 में गैस सिलेंडर दिया जाएगा, एक और राजनीतिक लोक-लुभावन वादा या फिर कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। कांग्रेस यह वादा न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला है, बल्कि यह यह भी दिखाता है कि कांग्रेस की प्राथमिकता वोटों की राजनीति है, न कि राज्य की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने की।
घुसपैठियों को गैस सिलेंडर की सस्ती कीमत पर उपलब्धता की बात करना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या यह वादा झारखंड के गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए किया गया है, या फिर यह उन लोगों को रिझाने की एक कोशिश है जो अवैध रूप से राज्य में बसे हुए हैं। इससे यह साफ होता है कि कांग्रेस की राजनीति केवल वोट बैंक की राजनीति बनकर रह गई है, जिसमें न तो राज्य के हितों की चिंता है और न ही जनहित की।
झारखंड की सामाजिक संरचना पर खतरा
झारखंड में घुसपैठियों की समस्या एक संवेदनशील मुद्दा है और इस पर कांग्रेस पार्टी का रवैया न केवल कानून और व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि राज्य के आदिवासी और स्थानीय समुदायों की पहचान और संस्कृति के लिए भी खतरा है। अगर घुसपैठियों को इस तरह का समर्थन मिलता है तो यह राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना को बर्बाद कर सकता है। यह तात्कालिक तौर पर कांग्रेस के लिए लाभकारी हो सकता है लेकिन यह झारखंड के विकास और समृद्धि के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
महाराष्ट्र में भी वोटबैंक के लिए कांग्रेस ने उलेमा की मांगों पर जताई सहमती!
महाराष्ट्र में विधानसभा के मद्देनजर ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल ने महाराष्ट्र में 14 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इसकी कुछ मांगें जिन्ना के 14 सूत्रीय प्रस्ताव से मेल खाती है। उलेमा काउंसिल वक्फ बिल का विरोध किया, नौकरियों और शिक्षा में मुस्लिमों के लिए 10% आरक्षण की मांगा, महाराष्ट्र के 48 जिलों में मस्जिदों, कब्रिस्तानों और दरगाहों की जब्त की गई जमीन का सर्वेक्षण की मांग, ; महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के विकास के लिए 1,000 करोड़ रुपये की मांग, 2012 से 2024 तक दंगों के सिलसिले में कैद मुस्लिमों को रिहा करने और मौलाना सलमान अजहरी को जेल से रिहा करने की मांग की है।
उनकी मांग ये भी है कि महाराष्ट्र में मस्जिदों के इमामों और मौलानाओं को हर महीने 15,000 रुपये पेंशन दी जाए, इस विधानसभा चुनाव में मुस्लिम समुदाय के 50 उम्मीदवारों को टिकट दिया जाए, राज्य वक्फ बोर्ड में 500 कर्मचारियों की भर्ती की जाए, पुलिस भर्ती में मुस्लिम युवाओं को प्राथमिकता दी जाए और राज्य वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर से अतिक्रमण हटाने के लिए विधानसभा में एक कानून पारित किया जाए।
उलेमा बोर्ड ने कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले को अपनी मांगों से भरी चिट्ठी सौंपी है। उसके बाद उनके द्वारा कहा गया है कि उनको एमवीए के समर्थन मिला है। देवेन्द्र फडणवीस ने कहा है कि कांग्रेस द्वारा उलेमा की मांगों को स्वीकार करना, विशेषकर वह मांग जिसमें उन्होंने 2012 से 2024 तक के दंगाइयों को रिहा करने पर सहमति जताई है, खतरनाक है। इसमें सबसे हैरानी वाली बात ये है कि वोटों के लिए उलेमा बोर्ड की इस ब्लैकमेलिंग टैक्टिक्स को कांग्रेस ने खुले दिल से स्वीकार किया है।
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