Pakistani terrorists: 2024 में जम्मू-कश्मीर में मारे गए 60% आतंकी पाकिस्तानी, स्थानीय भर्ती के ना बराबर
Pakistani terrorists: आर्थिक मोर्च पर फेल होने के बाद बावजूद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की सेना आतंकवादी गतिविधियों को सपोर्ट करने से बाज नहीं आ रही है। आतंकियों को समर्थन पाक सेना का लगातार जारी है। इस बीच अब भारतीय सेना के अधिकारियों के अनुसार 2024 में जम्मू-कश्मीर में मारे गए 60 फीसदी आतंकवादी पाकिस्तान से थे।
इन पाकिस्तान समर्थित समूहों के लिए स्थानीय भर्ती यानी जम्मू-कश्मीर के लोग बहुत कम है। रिपोर्ट के मुताबिक इस साल केवल चार स्थानीय लोग ही इसमें शामिल हुए हैं। सेना के अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को यह जानकारी साझा की।

आतंकवादियों की स्थानीय भर्ती भी बहुत कम
सेना के अधिकारियों ने एएनआई को बताया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी समूहों में आतंकवादियों की स्थानीय भर्ती भी बहुत कम है, क्योंकि इस साल केवल चार स्थानीय लोग इन समूहों में शामिल हुए हैं।सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में लगभग 75 आतंकवादियों को सफलतापूर्वक मार गिराया है। इसमें जम्मू क्षेत्र और कश्मीर घाटी में अभियान और नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों के दौरान मुठभेड़ शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न मुठभेड़ों और अभियानों में, सुरक्षा बल जम्मू क्षेत्र और कश्मीर घाटी सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 75 आतंकवादियों को खत्म करने में सक्षम रहे हैं, जिसमें नियंत्रण रेखा पर आतंकवादियों द्वारा घुसपैठ के प्रयासों के दौरान होने वाली गोलीबारी में शामिल है।
वैश्विक आतंकवाद में पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान को लंबे समय से दुनिया भर में आतंकवाद के एक बड़े निर्यातक के रूप में पहचाना जाता रहा है, खासकर भारत को निशाना बनाकर। पिछले साल से इस्लामाबाद ने जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों को तेज कर दिया है। हालांकि, सेना की बढ़ी हुई तैनाती ने राजौरी, पुंछ, डोडा, किश्तवाड़, कठुआ और रियासी जैसे जिलों में पाकिस्तानी आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाया है।
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चीन सीमा पर तैनात राष्ट्रीय राइफल्स की वर्दीधारी सेना की वापसी से सुरक्षा में कमी आई। इस कमी को इन इलाकों में स्थिरता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती से पूरा किया गया।
आतंकवादियों के खात्मे पर फोकस
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचेंद्र कुमार आतंकवादियों के सफाए को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका ध्यान व्हाइट नाइट कोर की निगरानी वाले क्षेत्रों पर है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आतंकवादी खतरों को प्रभावी ढंग से बेअसर किया जाए।
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सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे ये प्रयास जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। स्थानीय भर्ती और बाहरी खतरों दोनों से निपटकर, वे आतंकवाद के खिलाफ क्षेत्र की सुरक्षा करना जारी रखते हैं।












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