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Pakistan Terror Attacks: 1566 हमले, हजार मौतें, तालिबान ने कैसे पाकिस्तान को आतंक की आग में साल भर जलाया?

Pakistan Terror Attacks: पेशावर में एक सैनिक स्कूल पर हुए भीषण आतंकवादी हमले के अब 10 साल से ज्यादा वक्त बीत चुके हैं, जब तहरीक-ए-तालिबान (TTP) के आतंकवादियों ने कहर बरपाया था और 150 से ज्यादा बच्चों और स्कूल के कर्मचारियों की हत्या कर दी थी।

पाकिस्तान के लोग भले ही वो आतंकवादी हमला नहीं भूले हों, लेकिन पाकिस्तान ने इन 10 सालों में भी आतंकवादियों के बीच फर्क करना नहीं सीखा है। पाकिस्तान की सरकार और पाकिस्तान के संस्थान, अभी भी आतंकवादियों को पालते हैं, ताकि दूसरे देशों, खासकर भारत को नुकसान हो, लेकिन हकीकत ये है, कि खुद पाकिस्तान ही आतंकवाद की आग में जलता है।

Pakistan Terror Attacks

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पेशावर स्कूल हमले में अजून खान के बेटे की मौत हो गई थी और वो कहते हैं, वे अभी भी स्कूल के गेट के बाहर रो देते हैं और उस क्रूर दिन को आज भी नहीं भूले हैं।

पेशावर स्कूल हमले से पाकिस्तान में क्या बदला?

पेशावर में स्कूल पर हुए क्रूर हमले ने पाकिस्तान में आतंकवाद विरोधी रणनीति और अफगानिस्तान के पास देश के पूर्व कबायली इलाकों में एक विशाल सैन्य अभियान चलाने के लिए मजबूर किया। हालांकि, पाकिस्तान का आतंकविरोधी अभियानों की वजह से शुरूआती सालों में आतंकी हमलों में भारी कमी जरूर आई, लेकिन पिछले कुछ सालों में फिर से आतंकवादी घटनाएं बढ़ने लगी हैं।

पाकिस्तान में साल 2013 में जहां 1717 आतंकी हमलों में 2451 लोग मारे गये थे, वहीं 2020 में सिर्फ 146 आतंकी हमले हुए, जिनमें 220 लोग मारे गये।

लेकिन कड़ी मेहनत से हासिल की गई उपलब्धियां अब खतरे में हैं। पिछले कुछ वर्षों में, उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुछ हिस्सों में पाकिस्तानी तालिबान और अन्य इस्लामी आतंकवादी समूहों की तरफ से हिंसा में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञ, आतंकी हमलों में हुए इस इजाफे को अगस्त 2021 में पड़ोसी देश अफगानिस्तान में अफगान तालिबान के सत्ता पर कब्जा होने को देते हैं।

पिछले हफ्ते पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने बताया, कि पिछले 10 महीनों में देश भर में 1566 आतंकवादी हमलों में 924 लोग मारे गए हैं, जिनमें नागरिक और सेना के जवान, दोनों शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया, कि इस दौरान 341 आतंकवादी मारे गए हैं।

दक्षिण वजीरिस्तान क्षेत्र के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, कि शनिवार की सुबह उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में इस्लामी आतंकवादियों की तरफ से किए गए हमले में सोलह सैनिक मारे गए।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), जिसे पाकिस्तान तालिबान के नाम से भी जाना जाता है, उसने हमले की जिम्मेदारी ली है।

विशेषज्ञों और सुरक्षा अधिकारियों ने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की कोशिशों में बाधा डालने वाली कई चुनौतियों की पहचान की है, जिनमें राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर शासन, घटता हुआ सार्वजनिक समर्थन, आर्थिक बाधाएं और अफगानिस्तान में 20 साल के युद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिका की आतंकवाद विरोधी सहायता में कमी है।

इसके अलावा, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान के अंदर अफगानिस्तान युद्ध के दौरान जो जिहाद का जहर लोगों के मन में भरा गया, वो अब जहर बन चुका है और आतंकवादियों को स्थानीय स्तर पर काफी समर्थन मिलता है।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई क्यों हार रहा पाकिस्तान?

इस्लामाबाद में सुरक्षा थिंक टैंक पाक इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के डायरेक्टर मुहम्मद आमिर राणा ने कहा, "सबसे बड़ी चुनौती ऐसे विशाल क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए पैसों की कमी और जनशक्ति को जुटाना है।"

विशेषज्ञों का कहना है, कि पाकिस्तान के लिए समस्या का स्रोत सीमा पार अफगानिस्तान में है। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान प्रशासन, टीटीपी के आतंकवादियों को शरण देने के आरोपों से इनकार करता है। लेकिन यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस के वरिष्ठ विशेषज्ञ असफंदयार मीर ने कहा, कि टीटीपी को "अफगानिस्तान में एक सुरक्षित पनाहगाह" दी गई है, जिसने इसे "लचीला और घातक" बनने में मदद की है।

पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने निजी तौर पर माना है, कि उन्होंने गलत अनुमान लगाया था, कि अफगानिस्तान के नए तालिबान शासक टीटीपी को रोकने में उनकी मदद करेंगे। अधिकारियों ने अनुमान लगाया था, कि तालिबान के नेता, अमेरिका के नेतृत्व वाले युद्ध के दौरान पाकिस्तान द्वारा उन्हें दिए गए गुप्त समर्थन के बदले में टीटीपी पर अंकुश लगाने में मदद करेंगे।

लेकिन, इस्लामाबाद में एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इसके बजाय, काबुल में तालिबान ने टीटीपी को संसाधन और एडवांस अमेरिकी हथियार और उपकरण प्रदान किए हैं, जिन्हें अमेरिका समर्थित अफगान सरकार के पतन के बाद जब्त कर लिया गया था। ऐसे हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ किए जाते हैं।

टीटीपी ने पाकिस्तान के अंदर हमलों की एक लहर शुरू कर दी है, जिसका मकसद पाकिस्तान की सरकार को उखाड़ फेंकना है और सख्त, शरिया आधारित शासन की स्थापना करना है। इनमें जनवरी 2023 में पेशावर की एक मस्जिद में आत्मघाती बम विस्फोट भी शामिल था, जिसमें 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे। पाकिस्तानी सुरक्षा बल बलूचिस्तान में जातीय अलगाववादी समूहों के साथ संघर्ष में भी उलझे हुए हैं, जो अफगानिस्तान और ईरान की सीमा से लगा एक शुष्क प्रांत है, और चीनी संचालित बंदरगाह ग्वादर का घर है और ये इलाका भी काफी खतरनाक बन चुका है।

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