TMC में 'दादा vs भतीजा' जंग तेज! कल्याण बनर्जी के आरोपों पर Abhishek Banerjee ने तोड़ी चुप्पी, आखिर क्या कहा?
Abhishek Banerjee Responses Kalyan Banerjee: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर की अंदरूनी कलह और 'ममता बनाम अभिषेक' की जंग अब खुलकर सड़क पर आ गई है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद और दिग्गज वकील कल्याण बनर्जी द्वारा लगाए गए 'अहंकारी' होने के गंभीर आरोपों पर आखिरकार टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है।
शुक्रवार, 12 जून को देर शाम पत्रकारों से बातचीत करते हुए अभिषेक बनर्जी ने बेहद नपे-तुले और शांत अंदाज में पलटवार किया, जिससे स्पष्ट है कि पार्टी इस समय दो धड़ों में पूरी तरह बंट चुकी है।

अभिषेक बनर्जी ने कल्याण बनर्जी के बयानों पर सीधे तौर पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा-"कल्याण बनर्जी उम्र में मुझसे काफी बड़े हैं। उन्होंने मुझे बचपन से देखा है और उन्हें अपने विचार व्यक्त करने का पूरा अधिकार है। मैं उनके खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोलूंगा।"
कल्याण बनर्जी ने दीदी को दिया अल्टिमेटम: 'या तो अभिषेक रहेंगे या मैं'
दरअसल, यह पूरा विवाद टीएमसी के भीतर चल रहे 'साइनगेट' (Signgate) घोटाले और अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को लेकर शुरू हुआ है। 69 वर्षीय कल्याण बनर्जी ने पार्टी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन के सामने सीधे तौर पर ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दे दिया है।
कल्याण बनर्जी ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा-"मैंने डेरेक से साफ कह दिया है कि अब ममता बनर्जी को फैसला करना होगा पार्टी में या तो वह (अभिषेक बनर्जी) रहेंगे या फिर मैं। यह बहुत ज्यादा अहंकार है। देखिए इस अहंकार ने पार्टी का क्या हाल कर दिया है। मैंने हमेशा कहा है कि मैं आपको (अभिषेक को) अपना नेता तभी मानूंगा जब आप त्रिपुरा या गोवा में पार्टी को चुनाव जिताकर दिखाएंगे।"
कल्याण बनर्जी ने कानूनी मोर्चे पर भी अपनी उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, मैं विधानसभा के मामले को संभाल रहा था, लेकिन अचानक उन्होंने मेरी जगह अयान भट्टाचार्य नाम के किसी वकील को भेज दिया। मेरे पास 45 साल का वकालत का अनुभव है, वे मेरे साथ डस्टबिन जैसा व्यवहार नहीं कर सकते। TMC के कई नेताओं का आरोप है कि पार्टी अब 'ममता मॉडल' को छोड़कर जबरन 'डायमंड हार्बर मॉडल' (अभिषेक बनर्जी का संसदीय क्षेत्र और उनकी रणनीतियां) पर चल रही है, जिससे पुराने और वरिष्ठ नेता खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।
क्या है 'साइनगेट' (Signgate) विवाद, जिसने बढ़ाई कलह?
पार्टी के भीतर विद्रोह की मुख्य वजह 'साइनगेट' विवाद है। दरअसल, पश्चिम बंगाल सीआईडी (CID) एक बेहद संवेदनशील मामले की जांच कर रही है, जिसमें आरोप है कि टीएमसी के कई विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर करके आधिकारिक दस्तावेज पश्चिम बंगाल विधानसभा में सौंपे गए थे। इस विवाद के चलते पार्टी अपने दो विधायकों को पहले ही निष्कासित कर चुकी है, और कई बड़े नेता जांच के दायरे में हैं। इस विवाद के बाद कई विधायकों और सांसदों द्वारा पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं।
ममता बनर्जी पर टिकीं सबकी नजरें
टीएमसी के भीतर पुराने बनाम नए नेताओं की यह जंग अब चरम पर पहुंच चुकी है। एक तरफ जहां अभिषेक बनर्जी का युवा धड़ा संगठन पर कब्जा करना चाहता है, वहीं ममता के वफादार पुराने नेता इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं। इस अंदरूनी आग को बुझाने का पूरा दारोमदार अब खुद ममता बनर्जी पर है, जिन्होंने फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है।














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