Jammu Kashmir Chunav: उत्तर कश्मीर की 16 सीटों पर कैसे बदला चुनावी समीकरण? राशिद फैक्टर से किसे नुकसान?

Jammu Kashmir Chunav Chunav: कश्मीर में विधानसभा की 47 सीटें हैं और जम्मू में 43. लेकिन, अंतिम चरण में कश्मीर में सिर्फ 16 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होना है और ये सारी उत्तर कश्मीर घाटी की सीटें हैं। जबकि, जम्मू में 24 सीटों पर चुनाव होना है। 1 अक्टूबर के चुनाव से पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन और अवामी इत्तेहाद पार्टी (AIM) के इंजीनियर राशिद की चुनाव किस्मत तय होनी है तो नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के लिए भी बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है।

उत्तर कश्मीर के तीन जिले क्षेत्र की राजनीति की दिशा तय करते हैं। ये हैं बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपुर। इस इलाके में अलगाववादियों का भी दबदबा रहा है तो नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी की भी बड़ी दावेदारी रही है। यही नहीं, पीपुल्स कांफ्रेंस और अवामी इत्तेहाद पार्टी भी यहीं से शुरू हुई हैं और कुपवाड़ा जिला इनका गढ़ रहा है।

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पीडीपी ने यहां लगातार नेशनल कांफ्रेंस को पछाड़ा है
1999 में पीडीपी के गठन से पहले उत्तर कश्मीर अब्दुल्ला परिवार के नेशनल कांफ्रेंस का गढ़ था। लेकिन, मुफ्ती परिवार की पार्टी पीडीपी ने अगले ही चुनाव से नेशनल कांफ्रेंस के गढ़ में ऐसे सेंध लगानी शुरू की जो सिलसिला पिछले विधानसभा चुनावों तक जारी रहा।

2002 में नेशनल कांफ्रेंस को उत्तर कश्मीर में 9 सीटें मिलीं। 2008 में यह संख्या गिरकर सात रह गई और पीडीपी ने 6 सीटें जीतीं। वहीं 2014 के चुनावों में यहां नेशनल कांफ्रेस मात्र तीन सीटें जीत पाया, वहीं पीडीपी की सीटों की संख्या बढ़कर 7 तक पहुंच गई।

कुपवाड़ा में सज्जाद लोन ने भी की राजनीति की शुरुआत
2014 में इस इलाके में एक और बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ था। सज्जाद लोन हुर्रियत छोड़कर मुख्यधारा की राजनीति में आए थे और हंदवाड़ा सीटी जीत ली थी। उनके सहयोगी बशीर अहमद डार को कुपवाड़ा में जीत मिली थी। कुपवाड़ा के इलाके में पीपुल्स कांफ्रेंस की तभी से मजबूत पकड़ रही है।

इस बार लोन यहां की हंदवाड़ा और कुपवाड़ा दोनों सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं और दोनों ही सीटों पर उनका पूरा जोर है।

उत्तर कश्मीर में इंजीनियर राशिद का जनाधार काफी बढ़ा
दूसरी तरफ कुपवाड़ा की लंगेट सीट इंजीनियर राशिद के दबदबे वाला क्षेत्र रहा है। लेकिन, उन्होंने धीरे-धीरे बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपुर जिलों में भी अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। इस वजह से उत्तर कश्मीर के चुनाव में लोन और राशिद दोनों महत्वपूर्ण फैक्टर हैं, लेकिन राशिद का जनाधार काफी बढ़ चुका है।

राशिद की पार्टी उत्तर कश्मीर की 15 सीटों पर लड़ रही चुनाव
कुछ समय पहले तक राशिद की अवामी इत्तेहाद पार्टी की खास चर्चा नहीं थी। लेकिन, इस साल बारामूला लोकसभा के चुनाव ने उनकी पार्टी के बारे में सोच बदल दी। बारामूला में राशिद ने न केवल नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन को बड़े अंतर हरा दिया, बल्कि बारामूला लोकसभा सीट के अंदर आने वाली 18 विधानसभा सीटों में से 15 में उन्हें बढ़त मिली।

राशिद की पार्टी का अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, लेकिन वह कश्मीर में 35 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिसमें उत्तर कश्मीर की 16 में से 15 सीटें शामिल हैं। दूसरी तरफ प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी की भी तीनों ही जिलों में मौजूदगी है और उसका इंजीनियर राशिद की पार्टी के साथ तालमेल भी हुआ है। पांच सीटों पर जमात समर्थित निर्दलीय भी मैदान में हैं।

ऐसे में अगर इंजीनियर राशिद ने अगर जमात की मदद से उत्तर कश्मीर में अपना चुनावी जलवा कायम रखा तो यह नेशनल कांफ्रेंस के साथ-साथ पीडीपी के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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