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'कितनी भी सिक्योरिटी बढ़ा लो, कातिल हमेशा...', Farooq Abdullah से अमित शाह ने फोन पर क्या बातचीच की?

Farooq Abdullah Attack: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला पर 11 मार्च की देर रात जानलेवा हमला होने से राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में हड़कंप मच गया। यह घटना उस समय हुई जब फारूक अब्दुल्ला जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में एक शादी समारोह में शामिल हुए थे। अचानक चली गोलियों से अफरा-तफरी मच गई, लेकिन सुरक्षा कर्मियों की कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया और डॉक्टर अब्दुल्ला बाल-बाल बच गए।

घटना के बाद देश के गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत फारूक अब्दुल्ला से फोन पर बात कर हालचाल जाना और पूरे मामले की जांच कराने का भरोसा दिया। फारूक अब्दुल्ला ने भी अमित शाह को घटना के बारे में पूरी जानकारी दी। मीडिया से बात करते हुए 12 मार्च को प्रेस कॉन्फ्रेंस में फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कितनी भी सुरक्षा हो, कातिल को हमेशा बढ़त मिलती है। डॉ. अब्दुल्ला ने बताया कि अमित शाह ने उन्हें आश्वस्त किया है कि इस हमले की पूरी जांच होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Farooq Abdullah Attack

फारूक अब्दुल्ला बोले- कितनी भी सुरक्षा हो, कातिल को हमेशा बढ़त मिलती है

हमले के बाद मीडिया से बातचीत में फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि आज के दौर में सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद खतरे पूरी तरह खत्म नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि चाहे सुरक्षा कितनी भी बढ़ा दी जाए, हमलावर को हमेशा एक तरह की बढ़त मिल जाती है।

उनका कहना था कि आज दुनिया ऐसे दौर से गुजर रही है जहां आतंकवाद और नफरत का माहौल बढ़ रहा है और इसे पूरी तरह नियंत्रित करना आसान नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वह हमलावर की मंशा के बारे में कुछ नहीं जानते और बिना पूरी जांच के इसे सुरक्षा में चूक कहना जल्दबाजी होगी।

हमले के बाद फारूक अब्दुल्ला ने अपनी सुरक्षा में तैनात कमांडो और पुलिसकर्मियों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि एनएसजी और स्थानीय पुलिस के जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें सुरक्षित निकाला।

उनका कहना था कि जब फायरिंग हुई तो पहले उन्हें लगा कि पटाखा फूटा है। लेकिन तुरंत सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें कार में बैठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। बाद में पता चला कि एक व्यक्ति ने पिस्तौल से दो गोलियां चलाई थीं।

फारूक अब्दुल्ला बोले-मुझे नहीं पता हमलावर कमल का इरादा क्या था?

फारूक अब्दुल्ला बोले,

"मुझे नहीं पता कि उसका (आरोपी कमल का) इरादा क्या था। यह कहना कि यह सिक्योरिटी में चूक थी, एक बड़ा बयान होगा। इस शादी में कई बड़ी हस्तियां मौजूद थीं, लेकिन कोई पुलिस वाला मौजूद नहीं था। अल्लाह की कृपा से, मेरी सिक्योरिटी मेरे साथ थी, और मेरी जान बच गई। मुझे (केंद्रीय गृह मंत्री का) फोन आया, जिन्होंने मेरा हालचाल पूछा और भरोसा दिलाया कि वे मामले की जांच करेंगे। जांच होनी चाहिए। ऐसी चीजें तब होती रहती हैं जब अब नफरत का माहौल है। कोई भी धर्म नफरत करना नहीं सिखाता, सिर्फ प्यार करना सिखाता है।"

फारूक अब्दुल्ला बोले- नफरत का माहौल खतरनाक

घटना के बाद फारूक अब्दुल्ला ने समाज में बढ़ती नफरत को भी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी धर्म नफरत नहीं सिखाता, बल्कि प्यार और भाईचारे का संदेश देता है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों को देखना चाहिए कि क्या वास्तव में हालात सुधरे हैं। साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के वादे को भी याद दिलाया।

शादी समारोह में अचानक फारूक अब्दुल्ला पर फायरिंग (Farooq Abdullah attack)

यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश स्थित रॉयल पार्क में हुई, जहां एक शादी समारोह आयोजित था। समारोह में कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां मौजूद थीं। बताया गया कि जब फारूक अब्दुल्ला कार्यक्रम से निकल रहे थे, तभी अचानक एक व्यक्ति ने पिस्तौल निकालकर फायरिंग कर दी।

मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों और कमांडो ने तुरंत हमलावर को काबू कर लिया। गोलीबारी के दौरान का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें कुछ लोग हमलावर को पकड़कर मारते-पीटते दिखाई दे रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक मौके पर तैनात कमांडो और पुलिस ने बेहद तेजी से प्रतिक्रिया दी, जिससे किसी बड़े नुकसान को टाल दिया गया।

कौन है आरोपी कमल सिंह जामवाल? (Accused Kamal Singh Jamwal)

पुलिस ने जिस आरोपी को गिरफ्तार किया है उसका नाम कमल सिंह जामवाल बताया जा रहा है। वह जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी है और उसकी उम्र करीब 63 साल बताई जा रही है।

जांच में सामने आया है कि आरोपी के पास लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह नशे में भी था। पुलिस पूछताछ में उसने चौंकाने वाला खुलासा किया।

आरोपी ने बताया कि वह पिछले 20 साल से फारूक अब्दुल्ला को मारने की योजना बना रहा था। उसका कहना था कि यह उसका निजी एजेंडा था और वह लंबे समय से इस मौके का इंतजार कर रहा था। बताया जाता है कि जम्मू के पुराने शहर में उसकी कई दुकानें हैं और वह उन्हीं से मिलने वाले किराए से अपना गुजारा करता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल (Security lapse)

इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्योंकि फारूक अब्दुल्ला को Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली है।ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक निजी समारोह में जहां वीवीआईपी मौजूद थे, वहां कोई व्यक्ति हथियार लेकर अंदर कैसे पहुंच गया। क्या प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर या कड़ी जांच नहीं थी?

जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हमलावर ने सुरक्षा घेरे में किसी कमजोरी का फायदा उठाया।

गवाहों ने क्या बताया?

समारोह में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह नेशनल कॉन्फ्रेंस के लीगल सेल अध्यक्ष की बेटी की शादी का कार्यक्रम था। एक गवाह के मुताबिक जब फारूक अब्दुल्ला बाहर निकल रहे थे, तभी एक व्यक्ति अचानक उनके पीछे आया और पिस्तौल तान दी। सुरक्षा कर्मियों ने उसे हटाया और इसी दौरान गोली ऊपर की ओर चली गई। हालांकि कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि मौके पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी खामियां मौजूद हैं। हालांकि फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि हमले के बावजूद फारूक अब्दुल्ला पूरी तरह सुरक्षित हैं और आरोपी पुलिस हिरासत में है।

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