राजस्थान सरकार का जनता को बड़ा तोहफा, विधानसभा में पेश किया 'स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार' विधेयक
राजस्थान सरकार ने 'स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार' विधेयक का प्रस्ताव रखा है। धिनियम का मसौदा तैयार है और सरकार ने 24 मार्च तक मसौदे पर सुझाव मांगे हैं।
जयपुर, 20 मार्च। राजस्थान सरकार ने 'स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार' विधेयक का प्रस्ताव रखा है। धिनियम का मसौदा तैयार है और सरकार ने 24 मार्च तक मसौदे पर सुझाव मांगे हैं। राजस्थान में अब से किसी भी अस्पताल में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं से इनकार करने पर 10,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। हाल ही में प्रस्तावित 'स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार अधिनियम' में प्रावधान किया गया है।

मरीजों के अधिकारों को सुनिश्चित करेगा बिल
इस मसौदे में मरीजों, उनके अटेंडेंट्स और हेल्थकेयर प्रवाइडर्स के अधिकारों को परिभाषित किया गया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2021 के बजट में घोषणा की थी कि प्रदेश में सभी को स्वास्थ्य का अधिकार प्रदान किया जाएगा। यह अधिनियम निवासियों और स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं और सरकार के दायित्वों के कई अधिकार और कर्तव्य प्रदान करता है। यह रियायती दरों पर भूमि आवंटन के माध्यम से स्थापित सरकारी अस्पतालों और निजी अस्पतालों में मुफ्त स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार देता है।
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भुगतान न कर पाने की स्थिति में शव ले जाने का अधिकार
यह अधिनियम प्रत्येक स्वास्थ्य देखभाल सुविधा से भुगतान न हो पाने के बावजूद मृतक के परिवार के सदस्यों को शव प्राप्त करने का अधिकार भी देता है। इस अधिनियम ने सरकार के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक उपयुक्त राज्य बजट प्रदान करना और अधिनियमन के छह महीने के भीतर स्वास्थ्य के लिए मानव संसाधन नीति को विकसित और संस्थागत बनाना अनिवार्य बना दिया है। अधिनियम के अधिनियमन की निगरानी एक राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण, राज्य कार्यकारी समिति और जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'इसका उद्देश्य हेल्थ सिस्टम में पारदर्शिता के साथ-साथ मरीजों का सस्ता इलाज सुनिश्चित करना है।'












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