Rajasthan: Jyoti Mirdha के बीजेपी ज्वाइन करते ही ट्विटर पर क्यों ट्रेंड होने लगा 'नागौर का शेर बेनीवाल'?
कांग्रेस नेता Jyoti Mirdha और Hanuman Beniwal दोनों Twitter पर ट्रेंड कर रहे हैं। ज्योति मिर्धा के BJP में शामिल होने का सबसे ज्यादा असर Nagaur के मौजूदा MP हनुमान बेनीवाल पर पड़ा है।
Jyoti Mirdha vs Hanuman Beniwal: राजस्थान कांग्रेस नेता डॉ. ज्योति मिर्धा ने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करके नागौर संसदीय सीट के सियासी समीकरण बदल दिए हैं। यही वजह है कि नागौर की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा व वर्तमान सांसद हनुमान बेनीवाल दोनों ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं।
राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे नाथूराम मिर्धा की पोती ज्योति मिर्धा के सोमवार सुबह दिल्ली मुख्यालय में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद ट्विटर (एक्स) पर #ज्योति मिर्धा, #हनुमान बेनीवाल और #नागौर_का_शेर_बेनीवाल जैसे हैशटैग टॉप ट्रेंड में शामिल रहे। बता दें कि शाम तक ज्योति मिर्धा हैशटैग के साथ 6607, हनुमान बेनीवाल हैशटेग के साथ 2440 और नागौर का शेर बेनीवाल हैशटैग के साथ 2137 से ज्यादा ट्वीट किए गए हैं।

भाजपा को समर्थन देकर एमपी बने थे बेनीवाल
ज्योति मिर्धा के हाथ का साथ छोड़ भाजपा में शामिल होने से राजस्थान कांग्रेस को तो झटका लगा है, मगर सबसे ज्यादा असर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) सुप्रीमो नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल पर पड़ा है। राजनीति के जानकार इसकी वजह लोकसभा चुनाव 2019 में हनुमान बेनीवाल का आरएलपी-भाजपा के गठबंधन से सांसद बनना मान रहे हैं।
ज्योति मिर्धा हनुमान बेनीवाल आमने-सामने
दरअसल, ज्योति मिर्धा व हनुमान बेनीवाल दोनों दिग्गज जाट नेता हैं। लोकसभा चुनाव 2019 में नागौर सीट पर मिर्धा व बेनीवाल आमने-सामने थे। कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा 1 लाख 81 हजार 260 वोटों से चुनाव हार गई थीं। ज्योति मिर्धा की 2014 के बाद यह लगातार दूसरी हार थी जबकि हनुमान बेनीवाल पहली बार सांसद बने थे। साल 2009 में नागौर से कांग्रेस की सांसद बनी ज्योति मिर्धा को साल 2014 व 2019 में हार का सामना करना पड़ा था।

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नागौर से भापजा प्रत्याशी कौन होगा?
ज्योति मिर्धा के भाजपा ज्वाइन करने के बाद संभावना जताई जा रही है कि लोकसभा चुनाव 2024 में नागौर संसदीय सीट से पार्टी उनको उम्मीदवार बना सकती है। अगर ऐसा होता है तो फिर हर किसी की नजर हनुमान बेनीवाल के अगले कदम पर होगी। वो आरएलपी प्रत्याशी के तौर अकेले चुनाव लड़ेंगे या फिर कोई और रास्ता चुनेंगे? वहीं, कांग्रेस के सामने भी नागौर सीट के लिए प्रत्याशी चयन की चुनौती रहेगी।
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