राजस्थान: सतीश पूनिया को उपनेता प्रतिपक्ष बनाए जाने से समर्थकों में नाराजगी, समर्थकों को इस पद की थी उम्मीद
राजस्थान में बीजेपी ने पार्टी नेता राजेंद्र राठौड़ को नेता प्रतिपक्ष और सतीश पूनिया को उपनेता प्रतिपक्ष बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी है। सतीश पूनिया को उपनेता प्रतिपक्ष बनाए जाने से उनके समर्थकों में नाराजगी है।

राजस्थान में भाजपा की विधायक दल की बैठक में रविवार को पार्टी नेता राजेंद्र राठौड़ को नेता प्रतिपक्ष और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को उपनेता प्रतिपक्ष चुन लिया गया है। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया को पार्टी का उपनेता प्रतिपक्ष बनाए जाने से पूनिया समर्थकों में निराशा है। चर्चा है कि सतीश पूनिया के समर्थकों को पूरी उम्मीद थी कि प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद पार्टी पूनिया को नेता प्रतिपक्ष के पद पर नियुक्ति देगी। लेकिन पार्टी ने उन्हें उपनेता प्रतिपक्ष बनाया है। सतीश पूनिया भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में पार्टी मजबूत होकर भी उभरी है। सतीश पूनिया भाजपा में प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे। सतीश पूनिया और उनके समर्थकों ने अनेक अवसरों पर उन्हें किसान पुत्र बताते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी भी की थी। लेकिन पार्टी के इस फैसले के बाद सतीश पूनिया की सीएम पद को लेकर दावेदारी खटाई में पड़ गई है। इससे पूनिया और उनके समर्थकों में निराशा और नाराजगी है।

भाजपा का राजपूत समाज पर भरोसा बरकरार
भाजपा ने राजेंद्र राठौड़ को नेता प्रतिपक्ष बनाकर संदेश दे दिया है कि प्रदेश के राजपूत समुदाय पर पार्टी को अब भी भरोसा है। राजनीति के जानकारों की मानें तो प्रदेश में राजपूत समाज लंबे समय से भाजपा को समर्थन करता आया है। ऐसे में पार्टी ने एक बार फिर राजपूत समाज के नेता राजेंद्र राठौड़ को नेता प्रतिपक्ष बनाकर राजपूत समाज पर भरोसा जताया है। वहीं जाट समुदाय से आने वाले बड़े घराने कांग्रेस समर्थित होने और इस समुदाय का झुकाव हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी पर होने से इस पद के लिए सतीश पूनिया की दावेदारी कमजोर साबित हो गई। उन्हें उपनेता प्रतिपक्ष के पद पर ही संतोष करना पड़ा।
सतीश पूनिया के बयान से झलकी नाराजगी
उपनेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद सतीश पूनिया ने कहा कि उपनेता का पद संवैधानिक दर्जा नहीं होता। लेकिन सब लोग काम कर चुके हैं। पार्टी झाडू पोंछे के लिए भी कहेगी तो करूंगा। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। चर्चा है कि सतीश पूनिया ने यह बयान दबाव में पार्टी पर व्यंग्य कसते हुए दिया है। जानकारों की मानें तो उपनेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के बाद सतीश पूनिया का कद प्रदेश की सियासत में राजेंद्र राठौड़ से भी कमजोर हो गैया है। सतीश पूनिया खुद इससे संतुष्ट नहीं है। लेकिन पार्टी के फैसले के आगे उनको संतोष करना पड़ा। उधर सतीश पूनिया को उपनेता प्रतिपक्ष बनाने पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की भी नाराजगी की चर्चा है।












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