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भगवान भोलेनाथ की 76 फुट ऊँची मूर्ति का अद्‌भुत रहस्य, जब शिल्पकार ने बनाने से कर दिया था मना

भगवान शंकर की स्तुति के माह सावन में शिव भक्त,भक्ति में सराबोर है। अलग स्वरुप मे 76 फीट ऊँचे विशालकाय आकर की शिव मूर्ति, मप्र के जबलपुर में स्थापित है। जहाँ भगवान शंकर खुले आसमान के नीचे बाघ त्वचा पर बैठे दिखाई देते है
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जबलपुर, 14 जुलाई: श्रावण मास यानि सावन का महीना शुरू हो गया है। सृष्टि के सृजनकर्ता भगवान भोलेनाथ की आराधना में शिव भक्त डूबे हुए है। मध्यप्रदेश की संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर शहर की कचनार सिटी में 76 फीट ऊँची मूर्ति विराजमान है। दूर से देखकर ऐसा लगता है कि जैसे शिवजी की यह मूर्ति आसमान को छू रही है। अलग मुद्रा में विराजित भगवान शंकर के नीचे गुफा है, जिसमें 12 ज्योतिर्लिंग के एक ही जगह पर दर्शन मिलते है।

बाघ की त्वचा पर विराजित अद्भुत है यह मूर्ति

बाघ की त्वचा पर विराजित अद्भुत है यह मूर्ति

भगवान शंकर की स्तुति के माह सावन में शिव भक्त, भक्ति में सराबोर है। अलग स्वरुप और 76 फीट ऊँचे विशालकाय आकर की यह शिव मूर्ति, मप्र के जबलपुर में स्थापित है। जहाँ भगवान शंकर खुले आसमान के नीचे बाघ की त्वचा पर बैठे दिखाई देते है। उनके हाथ में डमरू लगा त्रिशूल, गर्दन में विषैला सांप, सिर पर लिपटी जटाएं देखकर भक्ति की अलग अनुभूति होती है। शहर के जिस हिस्से में यह मंदिर स्थापित है, आज बड़े धार्मिक पर्यटन स्थल का रूप ले लिया है।

पहला ऐसा शिव मंदिर जहाँ 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन

पहला ऐसा शिव मंदिर जहाँ 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन

इस मंदिर की कई खासियत है, जिसकी वजह से शिव भक्त यहाँ अपने आप खिंचे चले आते है। भगवान भोलेनाथ की महिमा अपरंपार है। कहते है कि भारत के 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन से शिव भक्त की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में ये ज्योतिर्लिंग है, लेकिन जबलपुर में ये ऐसा शिवालय है जहाँ एक साथ 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मिलते हैं। भगवान शिव की मूर्ति के नीचे गुफा है, जहाँ सभी ज्योतिर्लिंग स्वरुप मूर्तियाँ स्थापित की गई है। इस वजह से इस मंदिर की विशेषता और बढ़ जाती है।

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बिल्डर को बेंगलुरु से मिली मूर्ति स्थापित करने की प्रेरणा

बिल्डर को बेंगलुरु से मिली मूर्ति स्थापित करने की प्रेरणा

दरअसल शहर के अरुण तिवारी नाम के बिल्डर ने इस मंदिर की नींव रखी थी। कचनार सिटी का प्रोजेक्ट उनके द्वारा ही शुरू किया गया था। उस वक्त शहर का नया हिस्सा विजयनगर के बसने की शुरुआत थी। बस रहा था। ढाई दशक पहले 1996 में अरुण तिवारी बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन देखने बेंगलुरु गए थे। वहां उन्होंने 41 फीट ऊँची भोलेनाथ की आकर्षक मूर्ति देखी। मूर्ति की भाव-भंगिमा और कला अरुण के मन में बस गई। वापस जबलपुर लौटकर अरुण ने अपने प्रोजेक्ट में करीब एक एकड़ की जगह मंदिर के लिए रखी। जिसमें बेंगलूर से भी ऊँची 76 फीट विशालकाय भगवान शिव की मूर्ति स्थापित करने का संकल्प लिया।

जब शिल्पकार ने मूर्ति बनाने से कर दिया मना

जब शिल्पकार ने मूर्ति बनाने से कर दिया मना

जबलपुर के विजयनगर स्थित कचनार सिटी में साल 2000 में बिल्डर अरुण तिवारी ने अपने प्रोजेक्ट की शुरुआत इस मंदिर से ही की। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती शिल्पकार का पता लगाना था, जो इतनी विशालकाय मूर्ति बनाने के लिए राजी हो सके। किसी तरह बेंगलुरु सिटी से 300 किलोमीटर दूर शिमोगा में शिल्पकार का पता तो चल गया, लेकिन वह उत्तर भारत की ओर ऐसी मूर्ति निर्माण के लिए तैयार नहीं हुआ। जब कई मिन्नतें की गई तो वह अपनी शर्तों पर 76 फीट ऊँची मूर्ति बनाने तैयार हुआ। श्रीधर नाम का शिल्पकार अपने साथ करीब 15 मजदूरों को लेकर शहर पहुंचा, फिर 2003 में मूर्ति का निर्माण शुरू हुआ। तीन सालों के कठिन परिश्रम से शिल्पकार श्रीधर ने इस भव्य मूर्ति का निर्माण कर दिया। उस शिल्पकार ने देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी 12 मूर्ति बनाने का गौरव भी हासिल किया है।

सावन और महाशिवरात्रि में लगता है यहाँ मेला

सावन और महाशिवरात्रि में लगता है यहाँ मेला

साल 2006 में मूर्ति निर्माण का कार्य पूरा होने के बाद आज इस जगह ने धार्मिक पर्यटन का स्वरूप ले लिया है। हरियाली से घिरे परिसर में खुले आसमान के नीचे विराजे भगवान शिव के दर्शन के लिए भक्तों का यहाँ जमावड़ा लगा रहता है। विशेष तौर पर सावन के पूरे माह और महाशिवरात्रि पर यहाँ शिव-भक्ति का अलग ही नजारा देखने को मिलता है। आखिरी सावन सोमवार और शिवरात्रि पर भरने वाले यहाँ के मेले में इतनी भीड़ उमड़ती है, कि आपको यहाँ पैर रखने जगह न मिले। कई खूबियों को समेटे यह जगह फिल्म शूटिंग का स्पॉट भी बन गया है।

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English summary
The secret of the 76 feet high idol of Lord Bholenath, know how the idol was built to such a height
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