Rahul Gandhi In Raebareli: 'मोदी रोएंगे, PM-गृहमंत्री देशद्रोही', राहुल के बिगड़े बोल, BJP ने क्या कहा?
Rahul Gandhi in Raebareli: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में बुधवार (20 मई) को एक जोशीली जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और भाजपा-आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस पर संविधान को कमजोर करने और देश को 'बेचने' का आरोप लगाया। साथ ही आर्थिक संकट की चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में स्थिति बिगड़ने पर मोदी 'रोएंगे' और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करेंगे।
राहुल गांधी वीर पासी की स्मृति में आयोजित 'बहुजन स्वाभिमान सभा' को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने संविधान को 'जनता की आवाज और खून' बताते हुए उसकी रक्षा की अपील की।

'अडानी, अंबानी और अमेरिका के हवाले हिंदुस्तान'
राहुल गांधी ने सभा में कहा, 'जब RSS के कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे तो उनसे साफ-साफ कह देना कि आपके प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और आपकी संस्था (BJP) देशद्रोही हैं। आपने भारत को बेचने का काम किया है। आपने संविधान पर हमला किया है।'
उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी ने देश के आर्थिक सिस्टम को अडानी, अंबानी और अमेरिका के हवाले कर दिया है। आगे राहुल गांधी ने कहा कि अब आर्थिक तूफान आ रहा है। नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार आपको नहीं बचा पाएगी। दो-तीन महीने में आपको पता चल जाएगा।
राहुल ने विगत संकटों का हवाला देते हुए दावा किया, 'जैसे कोविड के समय और नोटबंदी के समय मोदी रोए थे और कहते थे कि मेरी गलती नहीं है, वैसे ही फिर रोएंगे। लेकिन मैं आपको बता रहा हूं कि गलती सिर्फ नरेंद्र मोदी, अमित शाह और RSS की है, क्योंकि इन्होंने संविधान को खत्म करने का काम किया है।
'संविधान बचाओ, RSS के लोग इसे फाड़कर फेंक हैं'
सभा में राहुल गांधी ने संविधान को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा, 'संविधान में आपकी आवाज और आपका खून है। इसकी रक्षा करना आपका कर्तव्य है।' उन्होंने डॉ. बीआर अंबेडकर, महात्मा गांधी, वीर पासी, नारायण गुरु, बसवन्ना, बुद्ध, गुरु नानक और कबीर जैसे विचारकों का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान इन सभी सुधारकों की विचारधारा का प्रतिबिंब है। उन्होंने भीड़ से पूछा, 'आप सब ताली बजा रहे हैं... लेकिन जब आरएसएस के लोग संविधान को फाड़कर फेंक देते हैं तो आप चुप क्यों रहते हैं?
मोदी की विदेश यात्रा पर तंज- 'हमारे PM इटली में टॉफी बांट रहे हैं'
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा (यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) का जिक्र करते हुए तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा- 'आर्थिक तूफान सर पर है और हमारे प्रधानमंत्री इटली में टॉफी बांट रहे हैं।'
सभा में उन्होंने कहा कि मोदी जनता से सोना न खरीदने, विदेश यात्रा न करने और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की अपील करते हैं, लेकिन खुद हजारों करोड़ के विमान से विदेश घूमते हैं। उन्होंने पूछा कि आने वाले समय में किसानों को खाद भी न मिले तो क्या होगा?
'यह नेतृत्व नहीं, नौटंकी है'
राहुल गांधी ने महंगाई, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसान, युवा, महिलाएं, मजदूर और छोटे व्यापारी संकट में हैं, जबकि सरकार 'रील बनाने' और 'ताली बजाने' में व्यस्त है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह नेतृत्व नहीं, नौटंकी है।
भाजपा का पलटवार- 'कांग्रेस की परिवाद की उपज'
भाजपा ने राहुल गांधी के बयानों को 'कांग्रेस की परिवाद की उपज' और 'झूठी राजनीति' बताया। पार्टी ने कहा कि राहुल गांधी विकास, सुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे आरोप लगा रहे हैं। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है, आधारभूत संरचना का विकास हुआ है और संविधान का सम्मान किया जा रहा है।
2024 चुनाव के बाद राहुल 7वीं बार पहुंचे रायबरेली
राहुल गांधी 2024 लोकसभा चुनाव के बाद रायबरेली का यह सातवां दौरा था। वे 19 मई को दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे थे और बुधवार, 20 मई को अमेठी भी गए, जहां संजय गांधी अस्पताल में मरीजों से मुलाकात की। राजनीतिक विश्लेषक इसे 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में देख रहे हैं। राहुल गांधी लगातार संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के मुद्दों को अपनी राजनीति का केंद्र बना रहे हैं। बहुजन और पिछड़े वर्गों को लक्षित करते हुए वे आरएसएस-भाजपा की विचारधारा पर सवाल उठा रहे हैं।
राहुल गांधी का रायबरेली भाषण विपक्ष की रणनीति को दर्शाता है कि संविधान, आर्थिक न्याय और सामाजिक समता के मुद्दों पर हमला। यह 2027 के UP चुनाव और आगे की राष्ट्रीय राजनीति की झलक भी है। भाजपा इसे नकारात्मक राजनीति बताती है, जबकि कांग्रेस इसे 'जनता की आवाज' मानती है।
देश की अर्थव्यवस्था, संवैधानिक मूल्यों और विकास मॉडल पर बहस जारी रहेगी। आम नागरिक के लिए महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्षों के दावों को तथ्यों के आधार पर परखा जाए।













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