Jabalpur-Gondia ब्रॉडगेज पर सियासत, आडवाणी-जोशी के बहाने पूर्व मंत्री का छलका दर्द, शरद यादव को भी भुलाया
लोगों की यादों में बसी जबलपुर-गोंदिया नैरोगेज रेल लाइन अब ब्रॉडगेज हो गई और दोनों शहरों के बीच ट्रेन भी दौड़ने लगी। इस कामयाबी के पीछे रहे चहरों को ट्रेन उद्घाटन के वक्त भुला दिया गया। जिस पर सियासत शुरू हो गई हैं।

Politics on Jabalpur-Gondia broad gauge: जबलपुर-गोंदिया ब्रॉडगेज पर नई ट्रेन शुरू होने के बावजूद सियासत नहीं थम रही हैं। ट्रेन को हरी झंडी दिखाने से महरूम कई नेता खरी-खरी सुना रहे है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. शरद यादव को भुला दिया गया, तो वहीं पूर्व राज्य मंत्री हरेन्द्रजीत बब्बू ने भी कटाक्ष किया।

महाकौशल के विकास के लिहाज से ब्रॉडगेज में परिवर्तित हुई जबलपुर-गोंदिया नैरोगेज रेल लाइन मील के पत्थर से कम नहीं हैं। ट्रैक का काम पूरा होने के बाद दोनों शहरों के बीच पहली नई पैसेंजर ट्रेन चल पड़ी। बीजेपी सांसद राकेश सिंह और कई नेताओं ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

ट्रेन तो दौड़ने लगी और आने वाले वक्त में साउथ समेत महाराष्ट्र की सीधी रेल कनेक्टविटी आसान हो जाएगी। लेकिन इस ट्रैक की सौगात पर सियासत गर्म हैं। ट्रेन को हरी झंडी दिखाने वाले सांसद राकेश सिंह और पार्टी को उनके ही अपने घेरते नजर आ रहे हैं। आरोपों की बौछार हो रही हैं।

बीजेपी से पूर्व राज्य मंत्री हरेन्द्रजीत सिंह 'बब्बू' का भी दर्द छलका। 'बब्बू' बोले कि वे सिख कौम से आते है और अब उनके माथे पर हारे हुए नेता का ठप्पा लग गया है। पार्टी में आडवानी, मुरली मनोहर जोशी का जिक्र करते हुए अपना हाल भी बयां किया।

ब्रॉडगेज लाइन के लिए शुरू हुए आंदोलन में बब्बू की भी भूमिका रही। उन्होंने पैदल मार्च किया था। उनके अलावा देवगौड़ा सरकार के वक्त शरद यादव के प्रयासों को भुलाने के भी आरोप लग रहे हैं। ट्रेन उद्घाटन के वक्त इस ट्रैक के लिए कोशिश करने वाले नेताओं को बुलाया तक नहीं गया।

छात्र राजनीति के वक्त से शरद यादव जुड़े रहे जबलपुर के सीनियर जर्नलिस्ट रवीन्द्र दुबे और काशीनाथ शर्मा कहते है कि पश्चिम मध्य रेल जोन की जबलपुर को सौगात शरद यादव की बदौलत ही मिली थी। जोन के शिलान्यास के वक्त पूर्व रेल मंत्री रामविलास पासवान ने ब्रॉडगेज की घोषणा हुई थी।

रवीन्द दुबे कहते है कि सत्तारूढ़ दल और ट्रेन को हरी झंडी दिखाने वाले नेता ओछी राजनीति का प्रतीक हैं। श्रेय लेने की होड़ में ये लोग अपना पुराना वक्त भले ही भूल गए, लेकिन रेल कनेक्टविटी के लिए शरद यादव द्वारा महाकौशल के लिए जो प्रयास किए उसकी बराबरी कभी नहीं कर पाएंगे।














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