Zohran Mamdani की जीत पर अमेरिका में इस्लामोफोबिया, ट्रंप समर्थकों ने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को पहनाया बुर्का
Zohran Mamdani: न्यूयॉर्क सिटी के डेमोक्रेटिक मेयर प्राइमरी में 33 वर्षीय भारतीय मूल के मुस्लिम नेता जोहरान ममदानी की संभावित जीत के बाद अमेरिका में दक्षिणपंथी गुटों और MAGA (Make America Great Again) समर्थकों की ओर से इस्लामोफोबिक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।
ममदानी को अभी आधिकारिक रूप से विजेता घोषित नहीं किया गया है, लेकिन उनकी बढ़त इतनी निर्णायक है कि उनके प्रतिद्वंद्वी, EX गवर्नर एंड्रयू कुओमो, ने रातोंरात अपनी हार स्वीकार कर ली।

ममदानी की जीत के बाद सोशल मीडिया पर नफरत और धार्मिक भेदभाव से भरे पोस्ट्स देखने को मिले। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई MAGA समर्थकों ने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की एडिट की हुई तस्वीरें साझा कीं, जिसमें वह काले बुर्का में दिखाई गई हैं।
स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को बुर्का पहनाने वाली तस्वीरें वायरल
ममदानी की मुस्लिम पहचान को निशाना बनाते हुए सोशल मीडिया पर स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की एडिट की गई तस्वीरें वायरल की जा रही हैं, जिनमें उसे काले बुर्का में दिखाया गया है। यह तस्वीरें सीधे तौर पर यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि ममदानी जैसे नेता अमेरिका की मूल पहचान और स्वतंत्रता के प्रतीक के लिए खतरा हैं।
अमेरिकी रिपब्लिकन नेता मार्जरी टेलर ग्रीन ने इस एडिट की गई तस्वीर को साझा किया, जो अब तक हजारों बार रीपोस्ट की जा चुकी है। MAGA समर्थक डॉन कीथ ने भी यही तस्वीर "Congratulations New York" जैसे व्यंग्यात्मक कैप्शन के साथ पोस्ट की।
"Never Forget" कैप्शन के साथ शेयर की गईं तस्वीरें
ममदानी की कुर्ता-पायजामा पहने तस्वीरों को भी सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया गया। उन्हें "Never Forget" कैप्शन के साथ शेयर किया गया - जो कि आमतौर पर 9/11 आतंकी हमलों के संदर्भ में उपयोग होता है।
इस प्रकार के पोस्ट ममदानी को सीधे तौर पर एक धार्मिक चरमपंथी छवि में प्रस्तुत करने का प्रयास हैं, जबकि उनका राजनीतिक कार्य पूरी तरह लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और मानवाधिकार समर्थक रहा है।
ममदानी की मुखर आलोचना: ट्रंप, नेतन्याहू और फिलिस्तीन मुद्दा
जोहरान ममदानी ने अतीत में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन राजनीति की कड़ी आलोचना की है। वे फिलिस्तीन के पक्ष में खुलकर बोलते रहे हैं, और उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों की बार-बार निंदा की है। यही कारण है कि अमेरिकी दक्षिणपंथी समूहों ने उन्हें राजनीतिक और वैचारिक दुश्मन के तौर पर देखना शुरू कर दिया है।
अमेरिका के स्वतंत्रता और लोकतंत्र का प्रतीक मानी जाने वाली स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को फ्रांस ने 1886 में अमेरिका को भेंट किया था। इसे फ्रांसीसी मूर्तिकार फ्रेडरिक ऑगस्ट बार्थोल्दी ने डिज़ाइन किया था और इसकी धातु संरचना गुस्ताव एफिल ने तैयार की थी। यह मूर्ति आज़ादी, समानता और अप्रवासियों के लिए उम्मीद का प्रतीक मानी जाती है।
लेकिन Smithsonian Magazine की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की शुरुआती कल्पना एक मुस्लिम महिला के रूप में की गई थी। मूलतः इसे मिस्र की एक ग्रामीण महिला के रूप में डिज़ाइन किया गया था, जिसे Industrial Age के लिए Colossus of Rhodes की तरह स्थापित किया जाना था।
इस ऐतिहासिक तथ्य को जानकर यह स्पष्ट होता है कि बुर्का पहनाई गई स्टैच्यू की तस्वीरें सिर्फ राजनीतिक प्रोपेगेंडा हैं, जिनका उद्देश्य धार्मिक भेदभाव और विभाजन को बढ़ावा देना है।
अमेरिका में बढ़ती धर्म के आधार पर राजनीति
जोहरान ममदानी जैसे युवा, अप्रवासी पृष्ठभूमि वाले नेता अमेरिका में विविधता और समावेश के प्रतीक बनते जा रहे हैं। उनकी उपस्थिति इस बात की गवाही है कि अमेरिका में अब सिर्फ पारंपरिक, गोरे, ईसाई नेतृत्व का एकाधिकार नहीं रहा। हालांकि, उनकी यह प्रगति अमेरिका के कुछ तबकों को असहज कर रही है, जो आज भी अमेरिका को एकरंगी पहचान के साथ देखना चाहते हैं।
जोहरान ममदानी की बढ़त अमेरिकी लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है - जहां धर्म या नस्ल नहीं, बल्कि विचार और कार्य निर्णायक होते हैं। लेकिन MAGA समर्थकों की प्रतिक्रिया यह भी दर्शाती है कि धार्मिक भेदभाव और इस्लामोफोबिया अभी भी अमेरिकी राजनीति में गहराई से मौजूद हैं।
फिलहाल, देश और दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जोहरान ममदानी इतिहास रचते हुए न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम मेयर बनेंगे।












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