एशियन यूनिकॉर्न...सिर्फ एक बार दिखा है रहस्यमयी मायावी गेंडा, इस बार नहीं मिला तो हो जाएगा विलुप्त
अपने लंबे सींग और सफेद चेहरे के निशान के साथ, साओला उत्तरी अफ्रीका के मृग जैसा दिखता है, लेकिन यह जंगली मवेशियों की तरह ही जंगलों में रहता है। साओला को आखिरी बार साल 1992 में सिर्फ एक बार देखा गया है।
हनोई, जनवरी 09: दुनिया के सबसे दुर्लभ जानवर एशियन यूनिकॉर्न की खोज के लिए वैज्ञानिक पूरी ताकत झोंक चुके हैं, लेकिन कहीं भी एशियन यूनिकॉर्न वैज्ञानिकों को मिल नहीं रहा है। आखिरी बार एशियन यूनिकॉर्न को साल 1992 में देखा गया था और ऐसी आशंका लगाई जा रही है, कि क्या एशियन यूनिकॉर्न कहीं धरती से विलुप्त तो नहीं हो गया है?

हिरण जैसा दिखता है एशियन यूनिकॉर्न
हिरण जैसा दिखने वाला एशियन यूनिकॉर्न, जिसे 'मायावी गेंडा' भी कहा जाता है, उसकी काफी तेजी से तलाश शुरू हो गई है, ताकि इसे विलुप्त होने से बचाया जा सके। ये एक एशियाई गेंडा होता है, जिसे वैज्ञानिक साओला भी कहते हैं, वो वियतनाम और लाओस के पहाड़ों में मूल रूप से रहने वाला है लेकिन IUCN रेड लिस्ट के अनुसार यह 'गंभीर रूप से संकटग्रस्त' स्थिति में पहुंच चुका है और अगर इसे खोजने में कामयाबी हासिल नहीं की गई, तो ये विलुप्त हो सकता है।

1992 में दिखा था आखिरी बार
अपने लंबे सींग और सफेद चेहरे के निशान के साथ, साओला उत्तरी अफ्रीका के मृग जैसा दिखता है, लेकिन यह जंगली मवेशियों की तरह ही जंगलों में रहता है। साओला को आखिरी बार साल 1992 में वियतनाम के वू क्वांग नेचर रिजर्व में, लाओस के साथ सीमा के पास, जानवरों के अवशेषों के आधार पर विज्ञान के लिए नई प्रजाति के रूप में खोजा गया था। लेकिन किसी भी जीवविज्ञानी ने कभी जंगली में साओला के देखने की पुष्टि नहीं की है। लिहाजा अब, विस्कॉन्सिन स्थित एनजीओ साओला फाउंडेशन ने विशेषज्ञ कुत्तों की मदद से साओला के निशान का पता लगाने की कोशिश शुरू की है और इसके लिए एक्सपर्ट कुत्तों को प्रशिक्षण दी जा रही है।

क्या विलुप्त हो चुका है एशियाई गेंडा
'साओला फाउंडेशन के अध्यक्ष विलियम रोबिचौड ने ब्रिटिश अखबार गार्जियन को बताया कि, हम साओला को संरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं और ये जानवर इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण मौके पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि, 'हम जानते हैं कि इस शानदार जानवर को कैसे खोजा और बचाया जाए, जो शायद 80 लाख वर्षों से पृथ्वी पर है।' उन्होंने कहा कि, 'दुनिया को एक साथ आने और इस दुर्लभ जानवर को खोजने की जरूरत है।'' वहीं, जानवरों की संरक्षण करने वाली संस्था डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अनुसार, साओला को दो समानांतर सींगों से पहचाना जाता है, जिनकी लंबाई 20 इंच तक पहुंच सकती है और नर और मादा के तौर पर ये पाए जाते हैं।

कैसा दिखता है साओला?
साओला के चेहरे पर सफेद निशान और थूथन पर बड़ी मैक्सिलरी ग्रंथियां होती हैं, जिनका उपयोग वो अपने इलाकों का निर्धारण करने, उन्हें चिन्हित करने और अपने साथियों को आकर्षित करने के लिए करता है। वे केवल वियतनाम और लाओस के अन्नामाइट पर्वत में पाए जाते हैं। एज ऑफ एक्जिस्टेंस के अनुसार, इस प्रजाति (स्यूडोरिक्स नेगेटिनहेंसिस) को दक्षिण पूर्व एशिया में सबसे अधिक खतरे वाले स्तनधारियों में से एक माना जाता है। साओला फाउंडेशन की नई पहल के हिस्से के रूप में, जंगली में पाए जाने वाले किसी भी नमूने, जैसे कि फर या गोबर से होने का संदेह है, ऑनसाइट डीएनए परीक्षण किट का अध्ययन किया जाएगा। यदि किट एक घंटे के भीतर सकारात्मक परिणाम देती है, तो विशेषज्ञ नमूने के स्थान के पास जंगल में साओला की खोज शुरू कर देंगे। और अगर इस जानवर को खोज लिया जाता है, तो फिर इन्हें सरकार की तरफ से संरक्षित किया जाएगा और इनका प्रजनन करवाया जाएगा।

50-100 संख्या में होने का अनुमान
विशेषज्ञों का कहना है कि, इस वक्त साओला की संख्या करीब 50 से 100 के बीच होनी चाहिए। हालांकि, साओला फाउंडेशन साओला की संख्या 50 से कम मानता है। वहीं, चिड़ियाघरों में कोई साओला नहीं है और उन्हें कैद में कैसे रखा जाए, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है, इसलिए यदि यह प्रजाति जंगलों में मर जाती है, या फिर दूसरे जानवरों द्वारा मार दी जाती है, तो यह विलुप्त हो जाएगी।

सामान्य गैडों से अलग होते हैं एशियन यूनिकॉर्न
पौराणिक गेंडा के एक सींग के विपरीत, एशियन यूनिकॉर्न के पास दो सींग होते हैं और उसके बावजूद, साओला इतने गुप्त और इतने कम ही देखे गए हैं कि उनकी तुलना गेंडा से की गई है। मई 1992 में उत्तर-मध्य वियतनाम में इस प्रजाति की खोज की गई थी जब डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वियतनाम की वन नियंत्रण एजेंसी की एक संयुक्त टीम को एक शिकारी के घर में असामान्य रूप से लंबे, सीधे सींग वाली खोपड़ी मिली थीं।

300 कैमरों से दुर्लभ जानवर की खोज
एशियन यूनिकॉर्न की खोज के लिए वियतनाम की जंगलों में कम से कम 300 से ज्यादा कैमरे लगाए गये हैं और अलग अलग टीमों ने लगातार इसकी खोज की है, लेकिन एसडब्ल्यूजी को अभी तक यह जानवर नहीं मिला है। आपको बता दें कि, लाओस में खौं जे नोंगमा राष्ट्रीय संरक्षित क्षेत्र में 300 कैमरे लगाकर करीब 11 मील के दायरे में इस जानवर की खोज की गई थी, लेकिन लाखों तस्वीरों में भी यह कहीं नहीं दिखा। वहीं, साल 2020 में आईयूसीएन ने इस रहस्यमयी दुर्लभ जीव की खोज के लिए पूरी दुनिया से आह्वान किया है।












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