2 महीने के बच्चे को लगेगा दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन, कीमत 16 करोड़ रुपए, जानिए क्या है बीमारी
नई दिल्ली। World most expensive injection: एक साल पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि वर्ष 2020 इनता कठिन साल होगा। कोरोना वायरस महामारी के कारण पूरा विश्व लॉकडाउन की वजह से दूसरे देशों से कटा रहा। अभी भी एक से दूसरे देश में यात्रा करना बहुत मुश्किल है। कोरोना वायरस के खिलाफ विश्वभर के वैज्ञानिक वैक्सीन तैयार करने में जुटे हुए हैं, कुछ देशों को इसमें सफलता भी मिली है। हालांकि इसके टीके की कीमत को लेकर अभी भी लोगों में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि कोविड-19 से भी पहले हमारे बीच एक दुर्लभ बीमारी मौजूद है जिसके दवा की एक खुराक 16 करोड़ रुपए की है।

दुनिया की सबसे महंगी दवा
आपको यह जानकर हैरानी जरूर हुई होगी लेकिन ये सच है। इस बीमारी की नाम 'जेनेटिक स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' यानी SMA है, जिसका इलाज दुनिया में सबसे महंगा माना जाता है। इस बीमारी में मरीजों को दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन लगाया जाता है जिसकी कीमत 16 करोड़ रुपए है। बता दें कि SMA से ग्रसित ब्रिटेन के महज 8 हफ्ते के बच्चे को यह इंजेक्शन लागाया जाना है।

इस वजह से जानलेवा है बीमारी
16 करोड़ रुपए के इंजेक्शन के बारे में सुनते ही कई लोगों के जेहन में कैंसर जैसी घातक बीमारी का ख्याल आता है, तो आपको बता दे कि 'जेनेटिक स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' नामक बीमारी कैंसर से बिल्कुल अलग है। SMA बहुत ही दुर्लभ बीमारी है और यह शरीर में एसएमएन-1 जीन की कमी से होती है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों के सीने की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।

ब्रिटेन में सबसे ज्यादा होती है ये बीमारी
SMA बीमारी से ज्यादातर बच्चे पीड़ित होते हैं, अगर समय पर इसका इलाज ना किया गया तो बाद में दिक्कत बढ़ने से मरीजों की मौत भी हो जाती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में इस बीमारी के सबसे ज्यादा मरीज पाए जाते हैं, वहां हर साल पैदा होने वाले बच्चों में करीब 60 बच्चों में SMA बीमारी होती है। हैरान करने वाली बात यह है कि ब्रिटेन में इस बीमारी के मरीज ज्यादा है और वहां पर ही इसकी दवा नहीं बनाई जाती।

अमेरिका, जर्मनी और जापान में होता है उत्पादन
SMA से पीड़ित बच्चों को दिए जाने वाले इंजेक्शन का नाम जोलगेनेस्मा है जिसे ब्रिटेन में मरीजों के इलाज के लिए अमेरिका, जर्मनी और जापान से मंगाया जाता है। इस बीमारी से ग्रसित बच्चों को पूरे जीवन में सिर्फ एक बार ही यह इंजेक्शन दिया जाता है, यही वजह है कि इसकी कीमत इतनी अधिक है। बता दें कि जोलगेनेस्मा उन तीन जीन थैरेपी में से एक है जिसे यूरोप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है।

2017 से पहले नहीं था SMA का इलाज
आपको बता दें कि आज से तीन साल पहले इस बीमारी का इलाज संभव नहीं था लेकिन वर्ष 2017 में काफी रिसर्च और टेस्टिंग के बाद SMA के खिलाफ वैज्ञानिकों को सफलता मिली। इसके बाद से ही जोलगेनेस्मा इंजेक्शन का उत्पादन किया जा रहा है। साल 2017 में दवा के उत्पादन के बाद इसे 15 बच्चों को दिया गया जिसके बाद वह सभी 20 सप्ताह से अधिक समय तक जीवित रहे। बता दें कि ब्रिटेन में अब यह दवा एडवर्ड नाम के बच्चे को दिया जाना है।

इंजेक्शन के पैसों के लिए लोगों से मांगी मदद
16 करोड़ रुपए वाले इंजेक्शन के लिए एडवर्ड के माता-पिता ने क्राउड फंडिंग (मदद के लिए चंदा) शुरू की। अब तक वह 1.17 करोड़ रुपए जुटा चुके हैं लेकिन यह धनराशि अभी भी बहुत कम है। एडवर्ड के माता-पिता ने कहा कि उनके लिए पैसों से ज्यादा जरूरी मासूम की जान है। वह आगे भी लोगों से मदद मांगकर इंजेक्शन के लिए पैसों का इंतजाम करते रहेंगे। उन्होंने ब्रिटेन के लोगों से मदद के लिए ऑनलाइन मुहिम भी शुरू की है।
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