क्या ये है आंध्र प्रदेश के एलुरु में फैली रहस्यमयी बीमारी की वजह ? अब तक करीब 500 लोग चपेट में
नई दिल्ली- पूरा देश कोरोना वायरस से उबरने की कोशिश में जुटा है, लेकिन आंध्र प्रदेश का एलुरु शहर इसके अलावा एक रहस्यमयी बीमारी से भी जूझ रहा है। इस बीमारी की चपेट में अब तक करीब 500 लोग आ चुके हैं, लेकिन इसके पीछे की वजह क्या है, इसको लेकर कुछ-कुछ संकेत मिलने लगे हैं। माना जा रहा है कि इस बीमारी के पीछे कोई रासायनिक पदार्थ हो सकता है, जो कीटनाशकों में इस्तेमाल होता है। हालांकि, ठोस नतीजे पर पहुंचने से पहले कुछ और लैबोरेटरी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस बीमारी की वजह से एक शख्स दम भी तोड़ चुका है।

ऑर्गेनोक्लोरिन ने मचाया है एलुरु में कहर?
आंध्र प्रदेश के एलुरु में फैली रहस्यमयी बीमारी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी हैरान कर रखा है। लेकिन, कई तरह की टेस्ट रिपोर्ट के शुरुआती विश्लेषण से यह बात लगभग स्थापित होती जा रही है कि इस बीमारी के पीछे ऑर्गेनोक्लोरिन (organochlorine) नाम का पदार्थ हो सकता है। गौरतलब है कि इस रहस्यमयी बीमारी की चपेट में अब तक 500 के करीब लोग आ चुके हैं और 45 साल के एक शख्स की मौत तक हो चुकी है। देश के बड़े वैज्ञानिक संस्थानों के वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने में दिन-रात जुटे हुए हैं कि आखिर इस अनजान बीमारी का रहस्य क्या है और अगर इसके पीछे कोई जहरीला रासायनिक पदार्थ है तो वह एक साथ इतने लोगों के शरीर तक पहुंचा कैसे?

कीटनाशकों और मच्छर मारने में होता है इस्तेमाल
गौरतलब है कि ऑर्गेनोक्लोरिन का इस्तेमाल खेती और मच्छर मारने के काम में होता है। इसके कंपाउंड में डीडीटी भी होता, जो बड़े पैमाने पर मच्छर मारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के एक बड़े अधिकारी ने सोमवार को पीटीआई को बताया कि 'बहुत हद तक हां, लेकिन हम (पुष्टि के लिए) लैबोरेटरी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।' इस रहस्यमयी बीमारी की शुरुआत शुरू में एलुरु शहर में हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे इसने नजदीक के ग्रामीण इलाकों को भी अपने चपेट में ले लिया है। राहत की बात ये है कि ज्यादातर मरीजों को इलाज के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है, कुछ को ही विजयवाड़ा या गुंटूर के बड़े अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है।

रहस्यमयी बीमारी के क्या हैं लक्षण?
डॉक्टरों के मुताबिक इस बीमारी का अटैक मरीजों में मिर्गी, भूलने, घबराहट, उल्टी, सिरदर्द और पीठ दर्द के लक्षणों के साथ होता है। एलुरु के सरकारी अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर एएस राम का कहना है कि, 'कुछ लोग कह रहे हैं कि यह मास हिस्टीरिया है, लेकिन ऐसा नहीं है।' उन्होंने बताया कि 'ज्यादातर मरीज सिर में हल्की चोट या काले आंखों के साथ आते हैं, क्योंकि वह बेहोशी की वजह से अचानक गिर जाते हैं।...........लेकिन एक या दो घंटे के भीतर उनमें से ज्यादातर ठीक हो जाते हैं। ' सोमवार को ड्यूटी के दौरान ही कॉन्स्टेबल किरण कुमार अचानक बेहोश होकर गिर पड़े थे और दो घंटे तक अचेतावस्था में रहे। उन्होंने कहा, 'मेरे सहयोगियों ने मुझे बताया कि मैं कुछ चिल्लाया और गिर पड़ा। सड़क पर गिरने से मेरा दाहिना कंधा जख्मी हो गया।'

इंसान से इंसान में नहीं फैलती ये बीमारी
वैज्ञानिक इस रहस्यमयी बीमारी के पीछे किसी जहरीले पदार्थ के होने की पुख्ता जानकारी जुटाने में लगे हैं, लेकिन स्थानीय लोग कचरे और जंगली सूअर की समस्या की ओर भी इशारा कर रहे हैं। बहरहाल इसकी छानबीन में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल और एम्स के एक्सपर्ट की टीम लगी हुई है। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों ने दावा किया है कि यह बीमारी इंसान से इंसान में नहीं फैल रही है।












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