World Biggest City: दुनिया का सबसे बड़ा शहर बनी इस मुस्लिम देश की राजधानी, टोक्यो को पीछे धकेला
World Biggest City: यूनाइटेड नेशन्स के नए रिसर्च के मुताबिक इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता अब लगभग 42 मिलियन (4.2 करोड़) की आबादी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा शहर बन गई है। करीब 25 साल की धीमी जनसंख्या वृद्धि के बाद जकार्ता आखिरकार टोक्यो को पीछे छोड़ चुका है, जो साल 2000 में दुनिया का सबसे बड़ा शहर था।
ढाका दूसरे नंबर पर, टोक्यो तीसरे पर खिसका
यूएन के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के जनसंख्या प्रभाग ने पाया कि जकार्ता और बांग्लादेश की राजधानी ढाका, जिसकी आबादी लगभग 37 मिलियन (3.7 करोड़) है, अब टोक्यो के 33 मिलियन (3.3 करोड़) से आगे निकल चुके हैं।

ढाका 2050 तक बनेगा विश्व का सबसे बड़ा शहर
यूनाइटेड नेशन्स का अनुमान है कि 2050 तक ढाका दुनिया का सबसे बड़ा शहर बन जाएगा। वहीं, जापान की तेजी से बुजुर्ग होती आबादी के कारण टोक्यो की जनसंख्या अगले 25 सालों में और घटने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के टॉप 10 सबसे बड़े शहरों में से 9 एशिया में हैं, सिर्फ मिस्र का काहिरा ही एकमात्र गैर-एशियाई शहर है।
'जकार्ता पहले से ही टोक्यो से बड़ा था'
जकार्ता स्थित रुजक सेंटर फॉर अर्बन स्टडीज की निदेशक एलिसा सुतनुद्जाया ने कहा कि यह रिपोर्ट शहरी विशेषज्ञों के पहले से मौजूद आकलन की पुष्टि करती है कि ग्रेटर जकार्ता की आबादी कई सालों से टोक्यो से ज्यादा थी। उन्होंने बताया कि विशाल जनसंख्या की वजह से जकार्ता को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, खासकर स्थानीय सरकारों के बीच कमजोर तालमेल के कारण।
ट्रैफ़िक, प्रदूषण और बाढ़- जकार्ता की बड़ी चुनौतियां
जकार्ता के लोग रोज़ाना भारी ट्रैफ़िक जाम, प्रदूषण और बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्याओं से जूझते हैं। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए इंडोनेशिया सरकार ने 2019 में ऐलान किया था कि वह अपनी राजधानी को भीड़भाड़ वाले जावा द्वीप से हटाकर बोर्नियो में शिफ्ट करेगी।
नई राजधानी नुसंतारा की परियोजना में देरी
सरकार नुसंतारा नाम की नई प्रशासनिक राजधानी बनाने में जुटी है, लेकिन यह प्रोजेक्ट तय समय से काफी पीछे चल रहा है। इसके अलावा, बड़े निवेश आकर्षित करना भी सरकार के लिए मुश्किल साबित हो रहा है।
दुनिया तेजी से हो रही शहरी
यूएन की रिपोर्ट बताती है कि 1950 में दुनिया की आबादी का सिर्फ पांचवां हिस्सा शहरों में रहता था। लेकिन 2025 तक यह बढ़कर 45 प्रतिशत हो जाएगा, जब दुनिया की कुल आबादी 8.2 बिलियन होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, 1975 से 2025 के बीच मेगासिटी (10 मिलियन+ आबादी वाले शहर) की संख्या 8 से बढ़कर 33 हो गई है- यानी चार गुना इजाफा।
19 मेगासिटी एशिया में
इन 33 में से 19 मेगासिटी एशिया में स्थित हैं। टोक्यो की आबादी में आगे भी गिरावट के संकेत हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर 2050 तक 10 मिलियन का आंकड़ा पार कर लेगी। इसके साथ ही अदीस अबाबा (इथियोपिया) और भारत के हाजीपुर जैसे शहर भी नई मेगासिटी की सूची में शामिल होंगे।
यूएन ने किस बात पर किया आगाह?
यूएन आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के प्रमुख ली जुनहुआ ने कहा कि "शहरीकरण हमारे समय की एक निर्णायक शक्ति है।" उन्होंने बताया कि अगर शहरों का विकास शामिल, योजनाबद्ध और रणनीतिक तरीके से किया जाए, तो यह जलवायु कार्रवाई, आर्थिक विकास और सामाजिक समानता के लिए बड़े परिवर्तन ला सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि संतुलित विकास के लिए देशों को ऐसी एकीकृत नीतियां बनानी होंगी जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आवास, भूमि उपयोग, गतिशीलता और पब्लिक सर्विसेज को एक साथ जोड़ें।
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