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गाजा का दाना-पानी बंद, पानी की तरह बरसा रहे बम... इजराइल जो कर रहा है, क्या वो वार क्राइम कहलाएगा?

Israel-Palestine War: इजराइल ने 24 घंटे के अंदर उत्तरी गाजा में रहने वाले लोगों को शहर को खाली करने की चेतावनी दी है और उन्हें दक्षिणी गाजा में जाने के लिए कहा है। इजराइली सेना की इस चेतावनी को यूनाइटेड नेशंस के प्रवक्ता ने पुष्टि की है। उत्तरी गाजा पट्टी में करीब 11 लाख लोग रहते हैं और अगर वो दक्षिणी गाजा जाते हैं, तो फिर ये स्थिति त्रासदीपूर्ण हो सकती है।

लिहाजा, इजराइल का ये ऑपरेशन बेहद जटिल अंतर्राष्ट्रीय कानून के अंतर्गत आता है, जो दूसरे विश्वयुद्ध के बाद उभरी है।

Israel-Palestine War

कौन से कानून संघर्ष को नियंत्रित करते हैं?

अंतर्राष्ट्रीय युद्ध की स्थिति इंटरनेशन कानून के अंतर्गत 1949 जिनेवा कन्वेंशन के अधीन आते हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों द्वारा अनुमोदित किया गया है और अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध न्यायाधिकरणों के फैसलों द्वारा पूरक किया गया है।

संधियों की एक श्रृंखला, सामूहिक रूप से "सशस्त्र संघर्ष के कानून" या "अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी कानून" के रूप में जानी जाने वाली प्रणाली में नागरिकों, सैनिकों और युद्धबंदियों के साथ कैसा सलूक किया जा सकता है, उसे नियंत्रित करती है। यह सरकारी बलों और हमास आतंकवादियों सहित संगठित सशस्त्र समूहों पर भी लागू होता है।

यानि, हमास इस युद्ध को कैसे लड़ता है और इजराइली सैनिकों की क्या प्रतिक्रिया होती है, ये अंतर्राष्ट्रीय कानून के अधीन आते हैं।

अगर इजराइल पर हमास के हमले के दौरान किए गये अपराध और इजराइल के जवाबी हमले के दौरान किए गये अपराधों को देश के अंदर कानून के दायरे में नहीं लाया जाता है, तो फिर हेग स्थिति इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) सिर्फ इकलौता वैश्विक कानूनी अंग है, जहां इन युद्ध अपराधों के खिलाफ सुनवाई हो सकती है।

घरेलू कोर्ट का दायरा सीमित होता है, लिहाजा घरेलू कोर्ट बड़े स्तर पर फैसला लेने में सक्षम नहीं होती हैं।

वहीं, ICC का 'रोम संविधि' उसे अपने सदस्य देशों के क्षेत्र में या उनके नागरिकों द्वारा कथित अपराधों की जांच करने का कानूनी अधिकार देती है, जब कोर्ट को लगता है, कि घरेलू अधिकारी आरोपी व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना चाहती या फिर कार्रवाई करने में असमर्थ हैं।

मंगलवार को, आईसीसी के अभियोजक के कार्यालय ने पुष्टि की है, कि उसका आदेश मौजूदा संघर्ष में किए गए संभावित अपराधों पर लागू होता है और उसने कहा, कि वह युद्ध अपराधों से संबंधित जानकारियां जुटा रहा है।

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इजराइल-हमास युद्ध में कहां है ICC?

इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC), दुनिया का स्थायी युद्ध अपराध न्यायाधिकरण है, जिसकी स्थापना साल 2002 में हेग में की गई थी। इसके 123 सदस्य देशों में या इसके नागरिकों द्वारा किए गए युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार पर इसका अधिकार क्षेत्र बनता है।

लेकिन, दुनिया की कई बड़ी शक्तियां, जैसे चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, भारत और मिस्र इस कोर्ट के सदस्य ही नहीं हैं। लिहाजा, इंटरनेशनल कोर्ट ज्यादातर मौकों पर असहाय हो जाता है। जैसा हमने यूक्रेन युद्ध के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर देखा है।

आईसीसी ने पुतिन को युद्ध अपराध का आरोपी बनाया है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी का आदेश जारी किया है, लेकिन रूस ने आईसीसी के आदेश को यह कहकर खारिज कर दिया, कि रूस आईसीसी का सदस्य नहीं है।

लेकिन, आईसीसी, फ़िलिस्तीन को एक सदस्य राज्य के रूप में मान्यता देता है, जबकि इज़राइल, अदालत के अधिकार क्षेत्र को अस्वीकार करता है और औपचारिक रूप से इसके साथ शामिल नहीं होता है।

वहीं, सीमित बजट और सीमित कर्मचारियों के साथ, आईसीसी प्रॉसीक्यूटर पहले से ही यूक्रेन और अफगानिस्तान से लेकर सूडान और म्यांमार तक 17 मामलों की जांच कर रहे हैं। आईसीसी बजट ने 2023 के लिए फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में जांच के लिए सिर्फ एक मिलियन यूरो ($1.06 मिलियन) से कम आवंटित किया है, लिहाजा और बजट की मांग की जा रही है।

इसके अलावा, आईसीसी पहले से ही 2021 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में किए गए युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों की जांच कर रही है। लेकिन, अभी तक कोई गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं की किया गया है।

प्रॉसीक्यूटर्स ने कहा है, कि 2021 में यह मानने का उचित आधार था, कि इजरायली सैनिकों, हमास आतंकवादियों और अन्य सशस्त्र फिलिस्तीनी समूहों सहित सभी पक्षों ने मानवाधिकार का उल्लंघन किया था।

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कौन से काम युद्ध अपराध कानून का उल्लंघन करते हैं?

न्यूयॉर्क स्थित ह्यूमन राइट्स वॉच ने संभावित युद्ध अपराधों के रूप में नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाना, अंधाधुंध रॉकेट हमले और फिलिस्तीनी सशस्त्र समूहों द्वारा नागरिकों को बंधक बनाना, साथ ही गाजा में इजरायली जवाबी हमलों का हवाला दिया है, जिसमें सैकड़ों फिलिस्तीनी मारे गए हैं। यानि, हमास के साथ साथ इजराइल की जवाबी कार्रवाई भी युद्ध अपराध के अंतर्गत आता है।

ह्यूमन राइट्स वॉच के इज़राइल और फ़िलिस्तीन निदेशक उमर शाकिर ने कहा, कि "नागरिकों की जानबूझकर हत्याएं, बंधक बनाना और सामूहिक सज़ा देना जघन्य अपराध हैं, जिनका कोई औचित्य नहीं है।"

उन्होंने कहा, कि जिनेवा कन्वेंशन के तहत आम लोगों को बंधक बनाना, उनकी हत्या करना, उन्हें यातना देना साफ तौर पर प्रतिबंधित है, लिहाजा हमास ने जो किया है, वो युद्ध अपराध में आता है, जबकि इज़राइल की प्रतिक्रिया भी युद्ध अपराधों की जांच के अधीन भी हो सकती है।

आपको बता दें, कि इजराइली रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने 21 लाख लोगों के घर गाजा पट्टी तक भोजन और ईंधन को पहुंचने से रोकने के लिए कड़ी नाकाबंदी की घोषणा की है, जिसकी संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मानवाधिकार समूहों ने आलोचना की है।

गैलेंट ने हमास को "धरती से मिटा देने" की भी कसम खाई है और कहा है, कि इजरायल फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह को नष्ट करने के लिए जमीनी आक्रमण शुरू करेगा।

क्या जिनेवा कन्वेंशन लागू होते हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को कहा, कि इजरायल को 'जवाब देने का अधिकार' है। उन्होंने और इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आपस में बात की है, कि "कैसे अमेरिका और इजराइल जैसे देशों में लोकतंत्र और मजबूत होते हैं, जब हम लोकतंत्र के अधीन रहकर कानून के मुताबिक काम करते हैं।"

लेकिन, गाजा पट्टी की घेराबंदी इजराइल का युद्ध अपराध माना जा सकता है, यदि इस दौरान आम नागरिकों को निशाना बनाया जाता है। लेकिन, अगर इजराइल सिर्फ हमास को निशाना बनाता है, तो फिर ये युद्ध अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा।

लेकिन, एक्सपर्ट्स का मानना है, युद्ध अपराध को साबित करना अत्यंत मुश्किल होता है, क्योंकि कोई भी देश अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते हैं। इजराइल के हमले में मारा गया शख्स हमास का है या फिर कोई आम नागरिक, इसे कौन और कैसे साबित करेगा?

इसके अलावा, वो हमला इजराइल ने ही किया है, ये कैसे साबित होगा और अगर साबित भी होता है, तो फिर इजराइल के इस दावे को कैसे काउंटर किया जाएगा, कि उसने ये हमला 'जवाब देने के अधिकार' के तहत किया है?

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