क्या भारत को मिलेगा कच्चाथीवू? जानिए किसने और क्यों इसे श्रीलंका को किया था गिफ्ट?
Will India get Kachchatheevu back: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कनाडा के बाद श्रीलंका की विदेश यात्रा पर पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भव्य स्वागत किया। पीएम मोदी के श्रीलंका में पहुंचते ही कच्चाथीवू का विवाद फिर ताजा हो गया है और इसे लेकर भारत की उम्मीदें बढ़ गई हैं
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस अवसर का लाभ उठाने हुए प्रधानमंत्री मोदी से श्रीलंका के राष्ट्रपति के साथ विवादास्पद मुद्दे पर बात कर इसे सुलझाने का आग्रह किया है। आइए जानते हैं क्या है ये विवाद और किसने और क्यों इसे श्रीलंका को सौंप दिया था?

किसने कच्चाथीवु श्रीलंका को सौंपा था?
बता दें, कच्चातीवु एक द्वीप है जो दशकों से भारत और श्रीलंका के बीच विवाद का विषय रहा है। इसे 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने इसे श्रीलंका को सौंप दिया था।
श्रीलंका को दिए जानें से क्या हो रहा नुकसान?
ये मुद्दा 1974 में इस द्वीप को श्रीलंका को उपहार में दिए जाने के बाद से ही बना हुआ है। इंदिरा गांधी प्रशासन द्वारा द्वीप को श्रीलंका को सौंपने के फैसले का स्थानीय मछुआरा समुदायों पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इस क्षेत्र में श्रीलंकाई नौसेना की मौजूदगी और गतिविधियों ने भारतीय मछुआरों के लिए मछली पकड़ना चुनौतीपूर्ण और कभी-कभी जोखिम भरा काम बना दिया है।
मछुवारे खुद को इस अंतरराष्ट्रीय असहमति के बीच में फंसा हुआ पाते हैं। विवाद की जड़ पाक जलडमरूमध्य में स्थित कच्चातीवु द्वीप की रणनीतिक स्थिति में है, जो भारत और श्रीलंका को अलग करता है।
तमिलनाडु सीएम ने उठाई मांग
एमके स्टालिन ने कहा है कि कच्चाथीवु को श्रीलंका को सौंपे जाने से तमिलनाडु के मछुआरों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि श्रीलंकाई नौसेना भारतीय मछुआरों को हिरासत में ले रही है और उनकी नावों को जब्त कर रही है, जिससे उनकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका में अपनी चर्चाओं के दौरान इस मुद्दे को प्राथमिकता दें, और तमिलनाडु के मछुआरों के कल्याण के लिए इस मामले के महत्वपूर्ण महत्व पर जोर दें।
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क्या भारत को वापस मिलेगा कच्चाथीवु?
डीएमके नेता ने अपील की है कि मछुआरों के हितों और आजीविका की रक्षा करे, यह सुनिश्चित करे कि वे गिरफ़्तारी के डर के बिना सुरक्षित रूप से मछली पकड़ सकें। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री द्वारा उनके मुद्दों की वकालत करने से, उम्मीद है कि एक कूटनीतिक सफलता मिलेगी जो अंततः मछुआरों और उनके परिवारों के लिए शांति और सुरक्षा ला सकती है।












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