प्रधानमंत्री बनना तय, फिर भी पाकिस्तान नहीं लौट रहे नवाज शरीफ, क्या भाई शहबाज से है धोखे का डर?

Pakistan News: शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सुरक्षित पाकिस्तान वापसी के लिए कई कानून बदल डाले हैं। हालांकि, शहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो की पार्टियों का समर्थन हासिल होने और सरकारी मशीनरी के तमाम समर्थन के बाद भी, फिलहाल नवाज शरीफ की वापसी पर सस्पेंस बना हुआ है।

लेकिन, शहबाज चाहते हैं, उनके बड़े भाई नवाज शरीफ वापस पाकिस्तान लौटें और बिलावस भुट्टो के पिता आसिफ अली जरदारी खुद दुबई में नवाज शरीफ से मिले हैं और उसके बाद से ही अटकलें लगाई जा रही हैं, नवाज शरीफ जल्द ही लाहौर के लिए विमान में बैठ सकते हैं। कथित तौर पर, दोनों नेताओं ने अगले आम चुनाव के तौर-तरीकों और अपने राजनीतिक भविष्य पर चर्चा करने के लिए दुबई में सीक्रेट मीटिंग की है।

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पाकिस्तान लौटना चाहते हैं नवाज शरीफ?

इमरान खान अब पाकिस्तान की पॉलिटिक्स में अपना वजूद खो चुके हैं और सेना ने उनकी औकात खत्म कर दी है। इमरान खान के साथ अब गिने-चुने नेता ही हैं, जिनके बदौलत वो सिर्फ जीतने का दंभ भर सकते हैं, असल में जीत नहीं सकते हैं।

पाकिस्तान की सेना की डर से ना तो इमरान खान के साथ उनके कार्यकर्ता बचे हैं और नाही कोई बड़े नेता। फिलहाल इमरान खान के पास पाकिस्तान में दो ही काम हैं। पहला हर दूसरे दिन अदालतों के चक्कर काटना और दूसरा, अलग अलग विदेशी चैनलों को इंटरव्यू देना। सेना के कहने पर पाकिस्तानी मीडिया में इमरान खान पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब वो ना तो किसी चैनल पर दिख सकते हैं और ना ही अखबार में। कुछ बड़े पत्रकार जरूर अपने लेखों में इमरान खान का जिक्र करते हैं, जिसमें यही लिखा रहता है, कि इमरान अब अतीत हो चुके हैं।

दूसरी तरफ, आसिफ अली जरदारी से मुलाकात के बाद अटकलें लगाई जा रही थीं, कि नवाज शरीफ जल्द लौट सकते हैं, लेकिन वापसी कब होगी, फिलहाल अनिश्चित है।

वास्तव में नवाज शरीफ का प्लान क्या है, ये पता नहीं चल पाया है, क्योंकि वो चौथी बार पाकिस्तान पर शासन करने की इच्छा तो जता चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान लौटने में उनकी इतनी कम रुचि क्यों है?

पीएमएल-एन के भीतर कई लोग हैं, जो मानते हैं कि लंदन में नवाज शरीफ के लंबे प्रवास ने पार्टी की संभावनाओं को बहुत नुकसान पहुंचाया है। वहीं, अपने 'सर्वोच्च नेता' के बिना, पीएमएल-एन ने उनके प्रति वफादार लोगों और उन लोगों के बीच काफी आंतरिक तनाव का अनुभव किया है, जिनके हित उनके छोटे भाई शहबाज शरीफ के साथ ज्यादा मेल खाते हैं।

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भाई शहबाज से धोखे का डर?

नवाज शरीफ की गैर-हाजिरी में शहबाज शरीफ ने पार्टी को चलाया है और जाहिर है, पार्टी के अंदर शहबाज समर्थकों की संख्या बढ़ी है। सरकार में भी शहबाज के करीबी ज्यादा हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ये कारण ऐसे नहीं हैं, जिनकी वजह से नवाज शरीफ पाकिस्तान नहीं लौट रहे।

दूसरी तरफ, ऐसी अफवाहें और अटकलें हैं, कि पाकिस्तान लौटने से पहले नवाज शरीफ अपनी छवि को साफ सुथरा करने पर जोर दे रहे हैं और वह चाहते हैं, कि उनके लौटने से पहले उनके ख़िलाफ़ सभी लंबित कानूनी चुनौतियाँ ख़ारिज कर दी जाएं या उन्हें निष्प्रभावी कर दिया जाए।

शहबाज शरीफ की सरकार निश्चित रूप से उस दिशा में काम कर रही है, जवाबदेही कानूनों के साथ छेड़छाड़ कर रही है और पिछले फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट के साथ टकरा रही है।

लेकिन, सवाल ये हैं, कि कागज पर भले ही नवाज शरीफ के नाम से सारे दाग साफ कर दिए जाएं, लेकिन क्या जनता के मन में नवाज शरीफ को लेकर जो भरा है, को वो हट पाएगा? नवाज शरीफ ने लंदन में रहने के दौरान पाकिस्तानी जनता से जुड़ने की कोई कोशिश नहीं की है, लिहाजा अगर वो लौटते हैं, तो पाकिस्तान में उनका लिटमस टेस्ट हो सकता है।

इमरान खान को रास्ते से हटाया जा चुका है और पाकिस्तान की दोनों बड़ी और मुख्य पार्टियां, पीएमएल-एन और बिलावल भुट्टो की पीपीपी का आपस में गठबंधन है, लिहाजा अब नवाज शरीफ मानकर चल रहे हैं, कि पाकिस्तान का अगल प्रधानमंत्री उनका बनना तय है, लेकिन सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या नवाज शरीफ, पाकिस्तानी अवाम के बीच अपना करिश्मा दोहरा पाएंगे।

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