Indian Army ने जब कर दिया था लाहौर पर हमला, जानिए जीतने के बाद भी क्यों हट गई थी पीछे?
15 इन्फैंट्री डिवीजन और 4 माउंटेन डिवीजन के क्षेत्र में भारतीय जवानों ने काफी सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन फिर हमले की रफ्तार कम होती चली गई।
नई दिल्ली, सितंबर 07: दिसंबर 1965, 6 सितंबर को भारतीय सेना ने पाकिस्तान के लाहौर सेक्टर में भीषण हमला शुरू कर दिया, जिससे पाकिस्तानी सेना हैरान हो गई। भारतीय सेना के जवान लाहौर शहर के बाहरी हिस्से में मौजूद थे और तेजी से आगे बढ़ रहे और पाकिस्तान की सेना को समझ नहीं आ रहा था, कि वो आखिर किस तरह से भारतीय जवानों को शहर पर कब्जा करने से रोके। ये कहानी है साल 1965 की, जब पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने की गुस्ताखी की थी और भारतीय जवानों ने पाकिस्तानी सेना का तहस-नहस कर दिया था। पाकिस्तान को जरा भी अंदाजा नहीं था, कि भारत की तरफ से भी हमला किया जाएगा और इंडियन आर्मी लाहौर तक पहुंच जाएगी।

भारत ने क्यों किया लाहौर पर हमला?
पाकिस्तानी सेना अगस्त 1965 से जम्मू-कश्मीर में अघोषित युद्ध छेड़ चुकी थी और एक सितंबर को उसने जम्मू के पास अखनूर सेक्टर में हमला कर दिया। इस सेक्टर में पाकिस्तानी आक्रमण के जवाब में भारतीय सेना ने पंजाब में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर हमला शुरू कर दिया, जिसकी उम्मीद पाकिस्तान की तरफ से कतई नहीं की गई थी। क्योंकि, पाकिस्तान का मानना था, कि भारतीय फौज सिर्फ उन हिस्सों में ही लड़ाई लड़ेगी, जहां से पाकिस्तानी फौज घुस रहे होंगे और पाकिस्तान ने सपने में भी नहीं सोचा था, कि भारत की तरफ से पंजाब बॉर्डर खोल दिया जाएगा। लेकिन, भारत ने पाकिस्तान को बड़ा सरप्राइज दिया। 5 और 6 सितंबर की दरम्यानी रात भारतीय सेना के जवानों ने पंजाब फ्रंट को खोल दिया और एक साथ कई स्थानों पर अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार कर हमला करना शुरू कर दिया। भारतीय जवानों के अचानक आक्रमण करने से पाकिस्तान बुरी तरह से घबरा गया और पाकिस्तानी सेना के ज्यादातर जवान लाहौर शहर से बाहर नहीं निकल रहे थे, जबकि भारतीय सैनिक लाहौर शहर के दरवाजे पर दस्तक दे रहे थे।

लाहौर पर हमला करना क्यों था जरूरी?
तत्कालीन पश्चिमी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरबख्श सिंह के अनुसार, इस आक्रामक की रणनीतिक अवधारणा पाकिस्तानी सेना को इस क्षेत्र में अपनी सेना तैनात करने और अखनूर में अपने हमले की सहायता में उनकी तैनाती को रोकने के लिए मजबूर करना था। भारतीय योजनाओं में पाकिस्तानी क्षेत्र के बड़े हिस्से पर कब्जा करना भी शामिल था जो भविष्य की वार्ता में सौदेबाजी के समय लाभ देगा। लेफ्टिनेंट जनरल हरबख्श सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, इछोगिल नहर पर कब्जा करके महत्वपूर्ण पाकिस्तानी शहर लाहौर के ऊपर इंडियन आर्मी खतरा पैदा करना चाहती थी, ताकि पाकिस्तान को अपनी सैनिकों का एक बड़ा हिस्सा लाहौर बचाने के लिए भेजना पड़े। चूंकी ये लड़ाई पाकिस्तान ने शुरू की थी, लिहाजा भारत के पास प्रतिरोध करने का पूरा अधिकार था और भारतीय सेना कितने भी मोर्चे खोलने के लिए स्वतंत्र थी। भारतीय सेना के 15 इन्फैंट्री डिवीजन ने ग्रैंड ट्रंक रोड पर हमला बोलते हुए वाघा बॉर्डर पर कब्जा करते हुए पाकिस्तानी सैनिकों को अपने काबू में ले लिया और इंडियन आर्मी की एक पैदल सेना लाहौर के बाहरी इलाके बाटापुर तक पहुंच गई।

भारतीय सेना ने क्यों नहीं उठाया फायदा?
15 इन्फैंट्री डिवीजन और 4 माउंटेन डिवीजन के क्षेत्र में भारतीय जवानों ने काफी सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरूआत में काफी तेजी से सफलता हासिल करने वाली इंडियन आर्मी का मिशन धीरे धीरे धीमा पड़ने लगा, क्योंकि उच्च स्तर पर खराब नेतृत्व के परिणामस्वरूप कई वरिष्ठ अधिकारियों को कमान से हटा दिया गया। इस बीच पाकिस्तानी सेना ने खेमकरण के अपने इलाके में ही हमला करना शुरू कर दिया और रास्तों को तोड़ने लगे, ताकि इंडियन आर्मी आगे नहीं बढ़ सके, जबकि भारतीय सेना उच्चाधिकारियों से आदेश मिलने के इंतजार में खामोश थी, और जब तक भारतीय सेना द्वारा असल उतर की ऐतिहासिक लड़ाई में पाकिस्तानी सेना के पैटन टैंकों को उड़ाया नहीं गया, तब तक वे जमीन हासिल करने में सफल रहे।

ऑपरेशन लाहौर में क्या खामियां थीं?
पाकिस्तान सरकार और सेना ने कभी नहीं सोचा था कि भारत पंजाब में मोर्चा खोलेगा। उन्हें केवल जम्मू और कश्मीर में भारतीय जवाबी कार्रवाई की उम्मीद थी। इसलिए, जब 6 सितंबर को हमला हुआ, तो पाकिस्तानी सेना हैरान रह गई। भारतीय हमले को रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना को लाहौर सेक्टर में सुदृढीकरण भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा। उसे अखनूर मोर्चे पर पाकिस्तानी वायु सेना को अपने ध्यान से हटाना पड़ा और लाहौर की दिशा में आगे बढ़ रहे भारतीय सैनिकों पर हमला करने के लिए विमान का इस्तेमाल करना पड़ा। पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित सैन्य इतिहासकारों के अनुसार, लाहौर पर कब्जा करने की परिकल्पना भारतीय सैन्य योजनाकारों द्वारा नहीं की गई थी, क्योंकि बड़ी संख्या में सैनिकों की आवश्यकता किसी शहर पर कब्जा करने के लिए होती है, लिहाजा इंडियन आर्मी ने अपनी प्लानिंग में थोड़ा बदलाव किया। हालांकि, लाहौर के शाहदरा इलाके में रावी नदी पर पुल को नष्ट करने और लाहौर सेक्टर में मिली सफलता का और ज्यादा फायदा उठाने की स्थिति में लाहौर-वजीराबाद राजमार्ग को बाधित करने की योजना थी, ताकि पाकिस्तानी सैनिक आगे नहीं बढ़ सके।
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