पाकिस्तान में चल रही थी इमरान खान की सुनवाई, फिर कोर्ट को अचानक याद आईं इंदिरा गांधी, जानिए क्यों हुआ जिक्र?
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उनके खिलाफ जेल में सुनवाई की सरकार ने मंंजूरी दी थी।
अदालत ने यह आदेश इमरान खान की जेल सुनवाई के खिलाफ अपील और खुली अदालत में सुनवाई के साथ-साथ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम विशेष अदालत के न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग पर सुनवाई करते हुए पारित किया। दिलचस्प बात ये है कि इस दौरान कोर्ट ने इंदिरा गांधी का जिक्र किया।

न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब और न्यायमूर्ति समन रिफ़त ने इंट्रा-कोर्ट अपील पर सुनवाई की। न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब ने कहा कि अगली सुनवाई गुरुवार के लिए तय की जा रही है और मामले में जेल में सुनवाई के कारणों का पूरा रिकॉर्ड मांगा है।
पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके करीबी सहयोगी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के खिलाफ गुप्त जानकारी लीक करने के मामले में जेल में मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।
इस मामले में अदालत ने कार्यवाही पर रोक के खिलाफ अटॉर्नी जनरल की याचिका भी खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान जस्टिस औरंगजेब ने कहा कि वे नोटिफिकेशन की जांच करेंगे और सभी मुकदमे खुली अदालत में होंगे, इसलिए यह मुकदमा असाधारण होगा।
इस पर अटॉर्नी जनरल ने तर्क रखा कि यह कोई असाधारण सुनवाई नहीं बल्कि सिर्फ एक जेल सुनवाई है, जिसमें संबंधित एजेंसियों से रिकॉर्ड मांगकर अदालत के सामने रखे जाएंगे।
इस पर कोर्ट ने कहा कि तीनों नोटिफिकेश हाईकोर्ट के नियमों के अनुरूप नहीं है, ये बताया जाए कि आखिर किन परिस्थितियों में ये निर्णय लिया गया कि जेल में मुकदमा चलाया जाएगा? इसके अलावा कोर्ट ने ये भी पूछा कि ये कारण भी स्पष्ट किए जाएं कि आखिर कैबिनेट ने जेल में मुकदमे की मंजूरी क्यों दी?
न्यायमूर्ति औरंगजेब ने कहा कि परिवार के सदस्यों के सुनवाई में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि यह खुली अदालत है। कोर्ट ने कहा कि सिफर मामले में जिस तरह से आरोप दाखिल किया गया, उसे भी खुली अदालत की कार्यवाही नहीं कहा जा सकता।
इसके बाद अदालत ने मामले की कार्यवाही 16 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में भी इंदिरा गांधी मामले की सुनवाई जेल में हुई थी, लेकिन बीबीसी और अन्य पत्रकारों को इसे कवर करने की अनुमति दी गई थी, यह भी वर्तमान की तरह एक पूर्व प्रधानमंत्री का मुकदमा था।
मीडिया से बात करते हुए इमरान खान के वकील सलमान अकरम राजा ने कहा कि संविधान की मूल आवश्यकता यह है कि सुनवाई खुली अदालत में होनी चाहिए। राजा ने टिप्पणी की, "हर किसी को, विशेषकर मीडिया को, यह देखने की अनुमति दी जानी चाहिए कि क्या हो रहा है।"












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