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Who is Mojtaba Khamenei: कौन है मोजतबा खामेनेई ? वो 'रहस्यमयी' शहजादे जिनके हाथ में अब होगी ईरान की सत्ता

Who is Mojtaba Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद अब सबकी निगाहें उनके बेटे मोजतबा खामेनेई पर टिकी हैं। मोजतबा को सिर्फ एक 'बेटे' के तौर पर नहीं, बल्कि ईरान के सबसे ताकतवर और रहस्यमयी शख्सियत के रूप में देखा जाता है। भले ही वह सार्वजनिक मंचों पर कम दिखते हों, लेकिन सेना (IRGC) और शासन के भीतर उनका सिक्का चलता है।

इब्राहिम रायसी की मौत के बाद, मोजतबा ही वो अकेले दावेदार बचे हैं जिनके पास धार्मिक ज्ञान और सैन्य समर्थन दोनों है। आइए जानते हैं कि कौन हैं मोजतबा और क्यों उन्हें ईरान का 'अगला उत्तराधिकारी' माना जा रहा है।

Who is Mojtaba Khamenei

Mojtaba Khamenei biography in Hindi: कैसे बने मोजतबा 'मौलवी' से 'दावेदार'?

मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में मशहद में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद धर्मशास्त्र (Theology) में गहरी रुचि दिखाई। 1999 में उन्होंने एक मौलवी बनने के लिए अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। उनकी यह धार्मिक पहचान उन्हें ईरान के कट्टरपंथी मौलवियों के बीच स्वीकार्य बनाती है। सर्वोच्च नेता बनने के लिए धार्मिक योग्यता अनिवार्य है, और मोजतबा ने सालों तक खुद को इसी सांचे में ढाला है ताकि भविष्य में वो अपने पिता की विरासत को कानूनी रूप से संभाल सकें।

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Mojtaba Khamenei Profile: IRGC के साथ पुराना और गहरा रिश्ता

मोजतबा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहे। 1987 में स्कूल खत्म करते ही वह ईरान की सबसे ताकतवर सेना IRGC में शामिल हो गए। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के अंतिम दौर में मोर्चे पर सेवा की। युद्ध के उन कठिन दिनों ने उन्हें सेना के शीर्ष कमांडरों के करीब ला दिया। आज IRGC मोजतबा को अपना सबसे भरोसेमंद साथी मानती है। यही वजह है कि जब भी उत्तराधिकार की बात आती है, सेना का समर्थन सबसे पहले मोजतबा के पाले में गिरता दिखता है।

Mojtaba Khamenei Iran Supreme leader: 2009 के विद्रोह में चमका चेहरा

मोजतबा खामेनेई पहली बार अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में तब आए, जब 2009 में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन भड़के थे। आरोप है कि इन प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने के पीछे मोजतबा का ही दिमाग था। उन्होंने 'बसीज' मिलिशिया और खुफिया तंत्र का इस्तेमाल कर विद्रोह को दबाया। इस घटना ने उनकी छवि एक सख्त और कट्टरपंथी नेता की बना दी। शासन के वफादारों के लिए वह एक मजबूत रक्षक हैं, जबकि विरोधियों के लिए वह एक कठोर शासक की छवि रखते हैं।

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पिता के कार्यालय में 'सुपर बॉस' की भूमिका

पिछले दो दशकों से मोजतबा अपने पिता यानी 'सर्वोच्च नेता के कार्यालय' (Beit-e Rahbari) में एक बेहद प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। वह सिर्फ सलाह ही नहीं देते, बल्कि एक 'कमांडिंग ऑफिसर' की तरह शासन के नेटवर्क को कंट्रोल करते हैं। खुफिया विभाग से लेकर बड़े राजनीतिक फैसलों तक, मोजतबा का हस्तक्षेप रहता है। इस अनुभव ने उन्हें सत्ता चलाने की वो बारीकियाँ सिखाई हैं, जो शायद किसी और दावेदार के पास इस वक्त नहीं हैं।

उत्तराधिकार की रेस में सबसे आगे क्यों?

ईरान की राजनीति में उत्तराधिकारी बनने के लिए धार्मिक मान्यता, सेना का साथ और कूटनीतिक पकड़ जरूरी है। पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की मौत के बाद मोजतबा के सामने कोई बड़ा प्रतिद्वंदी नहीं बचा है। सेना (IRGC) संवैधानिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर मोजतबा को जल्द से जल्द गद्दी पर बिठाना चाहती है ताकि देश में कोई आंतरिक कलह न हो। मोजतबा का धार्मिक नेटवर्क और सैन्य पकड़ उन्हें इस 'पावर गेम' का सबसे मजबूत खिलाड़ी बनाती है।

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