Dhar Bhojshala Verdict Today: MP हाईकोर्ट के फैसले से खत्म हुआ इंतजार, धार भोजशाला को मिला मंदिर का दर्जा
Dhar Bhojshala Verdict Today: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित 11वीं सदी के प्राचीन स्मारक भोजशाला को लेकर दशकों से चला आ रहा कानूनी विवाद पर MP हाईकोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद मामले में आज, 15 मई को MP हाईकोर्ट इंदौर डिवीजन बेंच ने हिंदुओं के हक में अपना फैसला सुनाते हुए भोजशाला को मंदिर का दर्जा दिया है।
फैसले से पहले पूरे धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए अफवाहों और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने को कहा है।

बता दें कि, इंदौर हाईकोर्ट ने 12 मई को मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज अदालत के निर्णय को लेकर जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
धार में हाई अलर्ट, प्रशासन पूरी तरह सतर्क
धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा कि ASI द्वारा संरक्षित प्राचीन संरचना को लेकर अदालत का महत्वपूर्ण फैसला आने वाला है, इसलिए प्रशासन ने सभी जरूरी तैयारियां कर ली हैं। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।
कलेक्टर ने कहा-जिले के सभी नागरिकों से अपील है कि वे शांति बनाए रखें और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों पर विश्वास न करें। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और किसी भी तरह की गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Saraswati Temple vs Kamal Maula Mosque Dispute: क्या है भोजशाला-कमाल मौला विवाद? सरस्वती मंदिर बनाम मस्जिद
धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है। हिंदू पक्ष का मानना है कि यह राजा भोज द्वारा निर्मित वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर है। वे इसे एक प्राचीन विश्वविद्यालय और शोध केंद्र मानते हैं। जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। उनका कहना है कि यहां सदियों से नमाज अदा की जाती रही है। इस परिसर में पूजा और नमाज को लेकर सालों से कानूनी और धार्मिक विवाद चलता आ रहा है।
विवाद को सुलझाने के लिए ASI ने 2003 में एक व्यवस्था की थी। इसके तहत हिंदुओं को हर मंगलवार को पूजा करने और मुस्लिमों को हर शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। शेष दिनों में यह पर्यटकों के लिए खुला रहता है। मामले को लेकर कई बार अदालतों में सुनवाई हो चुकी है। हाल के वर्षों में ASI सर्वे और ऐतिहासिक दस्तावेजों को लेकर भी बहस तेज हुई थी। इसी विवाद से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर इंदौर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच सुनवाई कर रही थी।
इस विवाद पर अब तक क्या-क्या हुआ?
दशकों तक चले विवाद को सुलझाने के लिए वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार को पूजा करने और मुस्लिम समुदाय को प्रत्येक शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई। इस मामले ने हाल के वर्षों में तब गति पकड़ी जब वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग उठी:
मार्च 2024 सर्वेक्षण का आदेश: इंदौर हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक विवाद को सुलझाने के लिए ASI को परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण (ASI Survey) करने का आदेश दिया। यह सर्वेक्षण वाराणसी के ज्ञानवापी मामले की तर्ज पर किया गया।
सर्वेक्षण की प्रक्रिया: लगभग तीन महीने तक ASI की टीम ने आधुनिक तकनीकों जैसे ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) और कार्बन डेटिंग का उपयोग करके खुदाई और जांच की।
ASI रिपोर्ट: सर्वेक्षण के बाद ASI ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की, जिसमें परिसर की वास्तुकला, वहां मिले शिलालेखों और मूर्तियों के साक्ष्यों का विवरण दिया गया।
12 मई 2026: हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और ASI रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
फैसले से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा
संभावित संवेदनशील स्थिति को देखते हुए धार जिले में पुलिस और प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती है। भोजशाला परिसर के आसपास बैरिकेडिंग की गई है और प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या अफवाहों को तुरंत रोका जा सके। प्रशासन ने साफ किया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
लोगों से शांति बनाए रखने की अपील
प्रशासन और पुलिस लगातार लोगों से संयम बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अदालत के फैसले का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की उकसावे वाली गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। धार जिले में आज पूरे दिन सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर रहेंगी और हाईकोर्ट के फैसले के बाद आगे की कार्रवाई उसी के अनुरूप की जाएगी।














Click it and Unblock the Notifications