Hormuz Crisis: 88 विदेशी जहाज ब्लैक लिस्ट- 278 पर बैन, भारतीयों संग बुरे बर्ताव पर गुस्साई सरकार, चलाया हंटर

Hormuz Crisis: 13 मई को ओमान की खाड़ी में भारतीय जहाज हाजी पर हमला किया गया जिसमें जहाज डूब गया। इस पर भारत सरकार ने गुस्सा जताया था और कहा था कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं अब सरकार ने इस घटना के ठीक बाद एक बड़ा कदम उठाया है जिसका असर 366 विदेशी जहाजों पर पड़ेगा।

366 विदेशी जहाजों पर नहीं काम करेंगी भारतीय

दरअसल भारतीय समुद्री नियामक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DG Shipping) ने गुरुवार को बड़ा फैसला लेते हुए 366 विदेशी झंडो वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को काम पर रखने पर रोक लगा दी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री युद्ध के बीच हजारों भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इन जहाजों पर चालक दल को छोड़ देने, समय पर वेतन नहीं देने, मौत या लापता होने की स्थिति में मुआवजा न देने, कर्मचारियों के साथ उत्पीड़न-अमानवीय व्यवहार करने और भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस घर नहीं भेजने जैसे गंभीर आरोप लगे थे।

क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला?

DG Shipping ने कहा कि कई विदेशी जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और भारत के समुद्री सुरक्षा कानूनों का पालन नहीं कर रहे थे। इसी वजह से सरकार ने Recruitment and Placement Service License (RPSL) रखने वाली कंपनियों को चेतावनी दी कि वे इन जहाजों पर भारतीय नाविकों को तैनात न करें। सरकार का मानना है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता। खासकर ऐसे समय में जब वेस्ट एशिया का समुद्री क्षेत्र युद्ध की चपेट में हो।

278 जहाजों पर लगाया बैन, 88 को ब्लैकलिस्ट

DG Shipping ने जारी सर्कुलर में बताया कि कुल 366 जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें से 278 जहाजों को Restricted यानी प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है, जबकि 88 जहाजों को सीधे Blacklisted कर दिया गया, मतलब ही इनसे शायद ही कभी भविष्य में काम लिया जाए। इसके साथ ही सभी RPSL कंपनियों को आदेश दिया गया कि वे 14 दिनों के भीतर उन भारतीय नाविकों की पूरी जानकारी जमा करें जो इन जहाजों पर काम कर रहे हैं।

सरकार ने आदेश में क्या कहा?

अपने आधिकारिक आदेश में DG Shipping ने साफ कहा:

“नाविकों के बेहतर भविष्य, उन्हें छोड़ देने की घटनाओं और इंटरनेशनल सी एग्रीमेंट्स के उल्लंघन को देखते हुए, 366 जहाजों पर भारतीय नाविकों की भर्ती तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित की जाती है, जब तक कि उचित अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो जाता।”

सरकार ने साफ कर दिया कि अगर जहाज मालिक नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो भारतीय नाविकों को वहां भेजने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ा खतरा

रिपोर्ट्स के अनुसार, फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई जहाज सुरक्षा खतरों, सप्लाई की कमी और समुद्री रास्तों में रुकावट की वजह से अटके हुए हैं। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि मई 2026 तक कम से कम 8 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है। वहीं हजारों अन्य नाविक अब भी फंसे हुए या ऐसे ही छोड़ दिए गए हैं। न उनकी कोई सुध ले रहा और न ही उनकी वापसी का कोई रास्ता तय किया जा रहा है।

कई जहाज मालिकों पर गंभीर आरोप

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि संघर्ष बढ़ने के बाद कुछ जहाज मालिकों ने अपने चालक दल की मदद करना बंद कर दिया। इस वजह से कई भारतीय नाविक बिना पर्याप्त भोजन, बिना वेतन और बिना सुरक्षित वापसी के रास्ते के समुद्र में फंसे रह गए हैं। इससे उनकी स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है।

आगे क्या हो सकता है?

अब नजर इस बात पर रहेगी कि ब्लैकलिस्ट और प्रतिबंधित जहाज नियमों का पालन करते हैं या नहीं। अगर जहाज मालिक सुरक्षा, वेतन और नाविकों की वापसी से जुड़े नियमों को पूरा नहीं करते, तो भारत सरकार और सख्त कदम उठा सकती है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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