Fatah-4 Missile: Pakistan की नई मिसाइल भारत के लिए बड़ा खतरा? दिल्ली-ग्वालियर समेत कितने शहर रेंज में?

Fatah-4 Missile: साउथ एशिया में एक बार फिर मिसाइलों की ताकत और पावर बैलेंस को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसकी वजह बना है पाकिस्तान का नया फतेह-4 (Fatah-4) ग्राउंड लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल (GLCM) टेस्ट। 14 मई को पाकिस्तान ने इस मिसाइल का टेस्ट किया, जिसने भारत समेत पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर चिंता जताई है।

भारत के कई अहम सैन्य ठिकानों तक पहुंच

यह मिसाइल इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसकी कथित रेंज 750 किलोमीटर तक बताई जा रही है। अगर वाकई में ऐसा है फिर इस मिसाइल की पहुंच भारत के कई अहम सैन्य ठिकानों तक हो सकती है। पाकिस्तान द्वारा ओपन सोर्स में दी गई जानकारी के मुताबिक यह मिसाइल जमीन से बेहद कम ऊंचाई पर उड़ती है, जिससे इसे रडार पर पकड़ना काफी मुश्किल हो सकता है।

क्या है इस मिसाइल की टेक्नोलॉजी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक फतेह-4 में मॉडर्न नेविगेशन सिस्टम और एडवांस गाइडेंस आर्किटेक्चर लगाया गया है। इसका मकसद लंबी दूरी तक उड़ान के दौरान सटीकता बनाए रखना है, चाहे रास्ते में बड़े पहाड़ हों या इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी समस्या। मिसाइल की स्पीड कथित तौर पर मैक 0.7 यानी सबसोनिक है। इसका मतलब यह है कि यह सुपरसोनिक मिसाइलों जैसी तेज नहीं है, लेकिन इसकी खासियत इसकी लो-फ्लाइंग क्षमता, लंबी रेंज और रडार से बचने की कोशिश है।

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कितनी बड़ी है मिसाइल कितना ले जा सकती है पेलोड?

बताया जा रहा है कि मिसाइल लगभग 7.5 मीटर लंबी है, इसका वजन 1,530 किलोग्राम है और इसमें 330 किलोग्राम का वारहेड लगाया जा सकता है। इसकी सटीकता यानी Circular Error Probability (CEP) 5 से 10 मीटर से कम बताई जा रही है। अगर यह दावा सही है, तो यह बड़े सैन्य ढांचों के खिलाफ बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

Fatah-4 Missile

नाम पाक का, काम चीन का!

पाकिस्तानी सेना ने कहा कि फतेह-4 को पूरी तरह पाकिस्तानी टेक्नोलॉजी से बनाया गया है और इसमें एडवांस एवियोनिक्स और मॉडर्न नेविगेशन सिस्टम लगाए गए हैं। लेकिन सब जानते हैं कि बिना चीन की मदद के पाकिस्तान ऐसी मिसाइल नहीं बना सकता वो भी इतनी जल्दी। ये कहीं न कहीं सवाल खड़े कर रहा है कि कैसे चीन पर्दे के पीछे से पाकिस्तान को भारत के खिलाफ और मजबूती दे रहा है।

पाकिस्तान के बड़े नेताओं ने क्यों दिखाई दिलचस्पी?

इस टेस्ट के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और सैनिकों को बधाई दी। यह सिर्फ औपचारिक बयान नहीं था। इससे साफ दिखा कि पाकिस्तान सरकार और सेना इस मिसाइल को देश की सामरिक ताकत का बड़ा सिंबल बनाकर पेश करना चाहती है।

भारत के लिए क्यों चुनौती बन सकती है Fatah-4?

फतेह-4 की 750 किलोमीटर रेंज पाकिस्तान को भारत के अंदर मौजूद कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों तक पहुंचने की क्षमता देती है। इनमें एयरबेस, कमांड सेंटर, लॉजिस्टिक हब, रडार साइट और सैन्य स्टेजिंग एरिया शामिल हो सकते हैं। यह मिसाइल कथित तौर पर सिर्फ 50 मीटर की ऊंचाई तक नीचे उड़ सकती है। इतनी कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों को रडार देर से पकड़ते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि भारत की एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने के लिए कम समय मिलेगा। यही वजह है कि इसे भारत की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस और कमांड नेटवर्क के लिए नई चुनौती माना जा रहा है।

भारत के कौन-कौन से शहर आ सकते हैं निशाने पर?

अगर एरियल डिस्टेंस (हवा में दूरी) के हिसाब से देखें तो-

पंजाब- अमृतसर, लुधियाना, बठिंडा, पटियाला

जम्मू-कश्मीर- जम्मू, पठानकोट, श्रीनगर, उधमपुर

हरियाणा- हिसार, सिरसा, अंबाला

NCR- दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद

राजस्थान- श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर

यूपी- आगरा, मेरठ

एमपी- ग्वालियर

जैसे कई शहर पाकिस्तान की इस मिसाइल की रेंज में आते हैं। ये सभी शहर पाकिस्तान से 750 किलोमीटर के एरियल डिस्टेंस पर हैं।

एक महीने में Fatah-3 और Fatah-4 का टेस्ट, उठे सवाल

ये बात जगजाहिर है कि पाकिस्तान टेक्नोलॉजी में बेहद पिछड़ा देश है। उनका अपना न आईटी सिस्टम है और न ही खुद की कोई टेक्नोलॉजी। ऐसे में पाकिस्तान एक महीने में एक ही मिसाइल के दो अपग्रेडेड वर्जन कैसे बना सकता है। इसका जवाब है चीन। बिना चीन की मदद के पाकिस्तान का मिसाइल बनाना बिल्कुल भी संभव नहीं है। एक्सपर्ट मानते हैं पूरी टेक्नोलॉजी चीन है बस अनबॉक्सिंग और टेस्टिंग पाकिस्तान में हुई है।

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क्या यह भारत के S-400 सिस्टम के लिए भी खतरा है?

इस टेस्ट के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उस वीडियो को लेकर हुई जिसमें लक्ष्य किसी रडार सिस्टम जैसा दिखाई दे रहा था। कुछ ओपन-सोर्स एक्सपर्ट्स ने दावा किया कि यह रूस के 92N6E “Grave Stone” रडार जैसा दिखता है, जो भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का हिस्सा है। हालांकि अगर ऐसा होता तो पाकिस्तान इस बात का प्रचार-प्रसार खुद बढ़-चढ़कर करता। वहीं पाकिस्तान की टेक्नोलॉजी अभी इतनी एडवांस नहीं है कि रूस के S-400 को चकमा दे सके। लिहाजा ये मिसाइल हो सकता है पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ी तरक्की हो लेकिन भारत के लिए बड़ा खतरा बिल्कुल नहीं है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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