Ali Khamenei Death: खामेनेई का बेटा Mojtaba बनेगा सुप्रीम लीडर? क्या कहता है ईरान का संविधान और इस्लामिक नियम
Ali Khamenei Death: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की रविवार को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों में मौत हो गई। पहले इस घटना पर सिर्फ खबरें आ रही थीं, लेकिन ईरानी मीडिया ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। इस घटना ने ईरान के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है और पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता का खतरा बढ़ा दिया है। 86 साल के खामेनेई दशकों से ईरान की सत्ता के सबसे ताकतवर व्यक्ति थे और देश की लगभग हर बड़ी नीति पर अंतिम फैसला उन्हीं का होता था।
मौत से पैदा हुआ शून्य
ईरानी राज्य टेलीविजन और सरकारी समाचार एजेंसी Islamic Republic News Agency (IRNA) ने रविवार को उनके निधन की आधिकारिक घोषणा की। चूंकि उनका कोई स्पष्ट घोषित उत्तराधिकारी नहीं था, इसलिए उनकी मौत से सत्ता में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सुप्रीम लीडर का पद राष्ट्रपति से भी ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है।

मोज्तबा खामेनेई बनेंगे अगले सुप्रीम लीडर?
सबसे ज्यादा चर्चा खामेनेई के दूसरे बेटे मोज्तबा खामेनेई को लेकर हो रही है। मोज्तबा एक मीडियम-रैंकिंग वाले मौलवी हैं और उन्हें लंबे समय से संभावित उत्तराधिकारी माना जाता रहा है। उनके ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से मजबूत संबंध बताए जाते हैं। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान सशस्त्र बलों में सेवा दी थी। साथ ही वे अपने पिता के "गेटकीपर" के रूप में पर्दे के पीछे से काफी प्रभाव रखते थे।
क्या वे दौड़ में हैं?
अमेरिकी अखबार The New York Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई ने पिछले साल तीन सीनियर मौलवियों को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में पहचाना था। हैरानी की बात यह है कि लंबे समय तक प्रबल दावेदार माने जाने के बावजूद मोज्तबा का नाम उस सूची में शामिल नहीं था।
संवैधानिक अड़चन भी मोज्तबा के रास्ते में
ईरान के संविधान के मुताबिक, 88 सदस्यों वाली Assembly of Experts सुप्रीम लीडर का चुनाव करती है। कानून के मुताबिक, उम्मीदवार के पास "राजनीतिक अनुभव" होना जरूरी है। मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट का कहना है कि मोज्तबा इस कसौटी पर पूरी तरह खरे नहीं उतरते, क्योंकि उन्होंने कभी कोई औपचारिक राजनीतिक पद नहीं संभाला, भले ही वे सुप्रीम लीडर के कार्यालय के संचालन में प्रभावशाली रहे हों।
पारिवारवादी लीडरशिप पर सवाल
शिया इस्लामिक परंपरा में वंशानुगत नेतृत्व को सिर्फ 12 दैवीय रूप से नियुक्त इमामों तक सीमित माना जाता है। ऐसे में मोज्तबा को सुप्रीम लीडर बनाना परंपरा के खिलाफ माना जा सकता है।1989 में भी इसी परंपरा के चलते खामेनेई को रूहोल्लाह खुमैनी के बेटे अहमद के ऊपर चुना गया था। अमेरिका स्थित थिंक टैंक Stimson Center के मुताबिक, 2023 में खामेनेई ने खुद कहा था कि "तानाशाही और वंशानुगत सरकार इस्लामी नहीं हैं।"
अराघी का खुलासा
2024 में अयातुल्ला महमूद मोहम्मदी अराघी, जो नेता चुनने वाले समूह के सदस्य हैं, उन्होंने दो घटनाओं का जिक्र किया। उनके मुताबिक, जब उन्होंने मोज्तबा के नेतृत्व को लेकर जांच की कोशिश की, तो अली खामेनेई ने खुद हस्तक्षेप किया।अराघी ने बताया कि सुप्रीम लीडर ने कहा, "आप जो कर रहे हैं, उससे नेतृत्व के वंशानुगत मुद्दे पर संदेह पैदा होता है।" एक अन्य मौके पर उन्होंने कहा, "इस मुद्दे पर विराम लगाओ।" इन बयानों से संकेत मिलता है कि खामेनेई खुद नहीं चाहते थे कि उनके बेटे मोज्तबा का नाम उत्तराधिकार की बहस में विवाद का कारण बने।
क्या सत्ता बदलेगी?- The Regime Change Chapter
हालांकि वाशिंगटन डीसी स्थित थिंक टैंक Middle East Institute के मुताबिक, सिर्फ सुप्रीम लीडर के मारे जाने से सत्ता परिवर्तन की गारंटी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई ने कथित तौर पर तीन संभावित उत्तराधिकारियों का चयन किया था। ये ऐसे लोग बताए गए हैं जिन्हें शासन को "शुद्ध" करने की सोच रखने वाले कट्टरपंथी गुटों से जोड़ा जाता है। इसका मतलब है कि सिस्टम के भीतर ही नया नेतृत्व उभर सकता है।
आगे क्या?
मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के अनुसार, अगर मोज्तबा को सुप्रीम लीडर बनाया जाता है, तो यह ईरान में उथल-पुथल का कारण बन सकता है। यह उस स्मूद ट्रांजिशन के बिल्कुल विपरीत होगा, जिसकी तैयारी खामेनेई ने संभावित उत्तराधिकारियों की सूची बनाकर की थी। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि 88 सदस्यीय सभा किसे चुनती है और ईरान का अगला राजनीतिक अध्याय किस दिशा में जाता है।
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