NEET-UG 2026 Paper Leak Scam: मोदी सरकार पर '23 लाख छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़' का आरोप, AAP का तीखा हमला

NEET-UG 2026 Paper Leak Scam: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 में पेपर लीक का घोटाला सामने आने के बाद पूरा शिक्षा तंत्र हिल गया है। 3 मई 2026 को हुई परीक्षा को मात्र कुछ दिनों बाद रद्द कर दिया गया। अब 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया है। इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि 'मोदी सरकार 22-23 लाख छात्रों की जिंदगियों से खेल रही है'। विपक्षी दलों का आरोप है कि परीक्षा घोटालों की श्रृंखला थम नहीं रही, जबकि सरकार पारदर्शिता और सुधारों का दावा कर रही है।

यह घटना न सिर्फ छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता, शिक्षा माफिया के राजनीतिक संरक्षण और युवा वोट बैंक पर गहरे राजनीतिक प्रभाव की बहस छेड़ गई है।

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कैसे लीक हुआ पेपर?

3 मई 2026 को देशभर में नीट-यूजी परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए। परीक्षा के तुरंत बाद राजस्थान, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से 'गेस पेपर' या अनुमानित प्रश्नपत्र वायरल होने की खबरें आईं। जांच में पाया गया कि इनमें से कई प्रश्न असली पेपर से मैच कर रहे थे।

NTA और शिक्षा मंत्रालय ने 8 मई से सत्यापन प्रक्रिया शुरू की। 12 मई को केंद्र सरकार की मंजूरी से पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई। CBI को जांच सौंपी गई। अब तक CBI ने कई गिरफ्तारियां की हैं - जयपुर, गुड़गांव, नासिक, पुणे और महाराष्ट्र से आरोपी पकड़े गए। जांच में पता चला कि पेपर लीक का नेटवर्क कोचिंग हब्स (खासकर सीकर, राजस्थान) से जुड़ा था और पेपर ₹2-5 लाख में बिका। कुछ आरोपी बड़े खिलाड़ियों के नाम ले रहे हैं, लेकिन अभी तक शीर्ष स्तर के संरक्षण का खुलासा नहीं हुआ है।

परिणाम: छात्रों में बेचैनी, विरोध प्रदर्शन और कम से कम दो छात्रों की आत्महत्या की खबरें आई हैं। लाखों युवा एक साल का नुकसान झेलने की स्थिति में हैं - कोचिंग फीस, तैयारी का समय, मानसिक स्वास्थ्य सब प्रभावित।

AAP का तीखा हमला: अनुराग ढांडा का बयान

AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने ANI से बात करते हुए मोदी सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार जिस तरह से NEET परीक्षा को लेकर बर्ताव कर रही है, उससे युवाओं के मन में संदेह और बढ़ रहा है। देशभर में लाखों युवा घबराए हुए हैं। परीक्षाएं अचानक रद्द कर दी गईं... अब क्या बदल गया है? क्या मुख्य साजिशकर्ता गिरफ्तार हो गया है? क्या हर साल राजनीतिक संरक्षण प्राप्त और पेपर लीक कराने वाले शीर्ष अधिकारी जेल गए? निचले स्तर के कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। NTA एक महीने बाद दोबारा परीक्षा आयोजित करेगा। इसकी क्या गारंटी है कि इस बार भी पेपर नहीं बिकेंगे? मोदी सरकार 22-23 लाख छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है।

AAP का तर्क है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले वर्षों में भी नीट और अन्य परीक्षाओं में अनियमितताएं आई हैं, लेकिन बड़े गिरोह नहीं टूटे। विपक्ष इसे 'शिक्षा माफिया और राजनीतिक संरक्षण' का प्रतीक बता रहा है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बचाव और सुधार

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को आश्वासन देते हुए कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता छात्रों का भविष्य है। मुख्य घोषणाएं:

  • 21 जून 2026 को नीट-यूजी की पुनर्परीक्षा।
  • अगले वर्ष से परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में।
  • छात्रों की फीस वापस की जाएगी; दोबारा परीक्षा में कोई शुल्क नहीं।
  • 14 जून तक नए एडमिट कार्ड जारी।
  • छात्रों को परीक्षा शहर चुनने का एक सप्ताह का समय।
  • NTA पूरी तरह जवाबदेह है; शून्य त्रुटि का लक्ष्य।

प्रधान ने स्वीकार किया कि 'अनुमानित प्रश्नपत्रों' के जरिए लीक हुआ। उन्होंने कहा कि शिक्षा माफियाओं की साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। NTA DG ने भी 7-10 दिनों में शेड्यूल घोषित करने की बात कही थी।

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